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सारांश जैन कौन हैं, जिन्होंने 33 साल की उम्र में किया है भारतीय टेस्ट टीम में डेब्यू
श्रीलंका के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट में भारत की ओर से 33 साल एक नए ऑलराउंडर सारांश जैन ने डेब्यू किया है.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट में टॉस से पहले उन्हें रवींद्र जडेजा ने टेस्ट कैप पहनाई.
33 साल का होने बाद इंटरनेशनल टीम में डेब्यू करने वाले सारांश दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं. इससे पहले 1998 में रोबिन सिंह ने 33 साल की उम्र में टीम में डेब्यू किया था.
सारांश को चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह टीम में शामिल किया गया है. चोट के कारण सुंदर चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे.
सारांश जैन दाएं हाथ के ऑफ़ स्पिन गेंदबाज़ हैं और दाएं हाथ से बल्लेबाज़ी भी करते हैं.
निचले क्रम में वह टीम को बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी, दोनों से संतुलन बनाने की क्षमता रखते हैं.
यही क्षमता उन्हें वॉशिंगटन सुंदर का विकल्प बनाती है.
कैसा रहा है सारांश का रिकार्ड
क्रिकइन्फ़ो के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के 33 साल के ऑलराउंडर सारांश जैन ने 54 फर्स्ट क्लास मैचों में 31.75 की औसत से 2223 रन बनाए हैं और गेंदबाज़ी में 27.30 की औसत 188 विकेट लिए हैं.
उन्होंने 67 लिस्ट ए और टी-20 मुक़ाबले भी खेले हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट उनका सबसे मज़बूत फ़ॉर्मेट रहा है.
सारांश जैन रविचंद्रन अश्विन को अपना सबसे बड़ा रोल मॉडल मानते हैं.
2024 में क्रिकइन्फ़ो से बात करते हुए उन्होंने कहा था, "मैं अक्सर अश्विन भैया को देखता हूं. उनसे मुझे प्रेरणा मिलती है. मैं भी उन्हीं की तरह पूरे समर्पण के साथ अपना क्रिकेट आगे बढ़ाना चाहता हूं."
अब तक का क्रिकेट सफ़र कैसा रहा
क्रिकइन्फ़ो के मुताबिक़ फर्स्ट क्लास क्रिकेटर सुबोध जैन के बेटे सारांश पिछले कुछ सीज़नों से घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.''
''हालांकि उनका करियर धीरे-धीरे आगे बढ़ा. उन्होंने 2014 में रणजी ट्रॉफ़ी में डेब्यू किया था, लेकिन सुर्खियों में 2022 में आए. तब तक उन्होंने सिर्फ़ फर्स्ट क्लास मैच खेले थे. उसी साल रणजी ट्रॉफ़ी के नॉकआउट राउंड में उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए 13 विकेट लिए और एक हाफ़ सेंचुरी भी लगाई. इससे टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफ़ी का ख़िताब जीता.''
हालिया रणजी ट्रॉफ़ी सीज़न उनके करियर का सबसे सफल सीजन रहा. उन्होंने 57.55 की औसत से 518 रन बनाए और 20.43 की औसत से 30 विकेट लिए. इससे पहले दलीप ट्रॉफ़ी में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. सेंट्रल ज़ोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने दो मैचों में दो अर्धशतक लगाए और 16 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ का खिताब जीता.
श्रीलंका दौरे के लिए उनका चयन क्यों हुआ?
उनके चयन के पीछे कई वजहें रहीं. वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं थे.
वहीं, श्रीलंका की टीम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज़ होने की वजह से चयनकर्ता टीम में एक ऑफ़ स्पिनर चाहते थे.
ऐसे में सारांश सही समय पर सही जगह पर मौजूद थे. इसी महीने वह भारत ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर भी गए थे.
पहले मैच में उनका प्रदर्शन साधारण रहा, लेकिन दूसरे मैच में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाए और छह विकेट लेकर अपनी दावेदारी मज़बूत कर दी.
श्रीलंका की पिचों को देखते हुए भारत के तीन स्पिनरों के साथ उतरने की योजना थी.
तीसरे स्पिनर के लिए मानव सुथार और सारांश जैन के बीच मुक़ाबला था. लेकिन सुथार और सारांश दोनों इस मैच में खेल रहे हैं.
श्रीलंका की टीम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज़ होने का फ़ायदा सारांश को मिल सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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