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अजिंक्य रहाणे ने किक्रेट से लिया संन्यास, कहा- यही सही समय, गाबा में रचा था इतिहास
भारतीय टेस्ट टीम के पूर्व प्रमुख बल्लेबाज़ अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मैट से संन्यास की घोषणा कर दी है.
हाल ही में उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की इच्छा भी जताई थी, लेकिन आख़िरकार एक दशक से ज़्यादा लंबे करियर को विराम देने का फ़ैसला किया.
एक भावुक वीडियो संदेश में रहाणे ने कहा, "ज़िंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज़ की एक शुरुआत होती है और एक अंत भी. जब वह समय आता है तो उसका सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए. बल्लेबाज़ी में मैंने हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया है और उसकी अहमियत को समझा है. आज मुझे लगता है कि आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ क्रिकेट के सभी फॉर्मैट से संन्यास की घोषणा करने का यही सही समय है."
उन्होंने कहा, "कैप नंबर 278, अब विदा लेता हूँ."
रहाणे ने 2011 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से भारत के लिए डेब्यू किया था. पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने 31 गेंदों में शानदार 69 रन बनाए थे. इसके कुछ ही दिनों बाद डरहम में राहुल द्रविड़ के वनडे करियर के विदाई मैच में उन्होंने अपना वनडे डेब्यू किया और 44 गेंदों में 40 रन की अहम पारी खेली.
हालांकि, टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें दो साल और इंतज़ार करना पड़ा. 2013 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान दिल्ली में खेले गए चौथे टेस्ट में उन्हें टेस्ट कैप मिली, लेकिन डेब्यू मैच में वे दोनों पारियों में क्रमशः 1 और 7 रन ही बना सके थे.
लेकिन अगले एक दशक में रहाणे भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ बन गए और 85 टेस्ट मैचों में 5,077 रन बनाए.
वनडे क्रिकेट में भी रहाणे का प्रदर्शन अच्छा रहा. उन्होंने 90 मैचों में 2,962 रन बनाए. हालांकि उनका औसत 35.26 रहा, लेकिन कई मौक़ों पर उन्होंने टीम के लिए अहम पारियां खेलीं. उन्होंने 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले, जिनमें 375 रन बनाए. हालांकि, टेस्ट क्रिकेट ही वह फॉर्मैट था, जिसमें उन्होंने अपनी असली पहचान बनाई.
रहाणे ने कहा, "डोंबिवली से एक छोटे लड़के के रूप में अभ्यास के लिए सफ़र करने वाले उन शुरुआती दिनों से लेकर आज तक, मैंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया. हर दिन, हर पारी और बल्लेबाज़ी का हर मौक़ा. मेरा सपना हमेशा भारत की कैप पहनना था."
उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा एक ही सिद्धांत पर अमल किया कि देश और टीम को ख़ुद से ऊपर रखना है. मैंने पूरी ईमानदारी के साथ यह खेल खेला और हमेशा यह माना कि अगर आपका इरादा सही हो तो यह खेल आपका साथ ज़रूर देता है."
'मुझे गर्व है'
रहाणे ने कहा, "जब मैंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था, तब से भारतीय क्रिकेट ने जबर्दस्त तरक़्क़ी की है. पिछले 20 वर्षों में इसका हिस्सा बनने पर मुझे बेहद गर्व है. एक भारतीय क्रिकेटर के रूप में मेरी पारी भले ही समाप्त हो रही हो, लेकिन इस खेल के साथ मेरा सफ़र ख़त्म नहीं हो रहा. मैं अगली पीढ़ी की मदद करने, उन्हें इस खेल से मिले मूल्यों से परिचित कराने और उस खेल को कुछ लौटाने के लिए उत्सुक हूँ, जिसने मुझे सब कुछ दिया."
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक्स पर लिखा है, ''बहुत कम खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की जर्सी को इतनी गरिमा, विनम्रता और उत्कृष्टता के साथ पहना है. मेलबर्न और लॉर्ड्स में मैच जिताने वाले शतक. कप्तान के रूप में कभी कोई टेस्ट नहीं हारे.''
''डोंबिवली का वह लड़का, जो सुबह पाँच बजे की ट्रेन पकड़कर अभ्यास के लिए जाता था, भारतीय क्रिकेट के सबसे सादगीपूर्ण और भरोसेमंद नायकों में से एक बन गया. उन्हें हमेशा वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हक़दार थे, लेकिन उन पर हमेशा भरोसा किया जा सकता था. सलाम, जिंक्स.''
रहाणे के संन्यास पर क्रिकेट के जाने-माने कॉमेंटेटर हर्ष भोगले ने एक्स पर लिखा है, ''एक जुझारू, वफ़ादार क्रिकेटर, बेहतरीन व्यक्तित्व और निष्पक्ष इंसान के साथ असाधारण टीम खिलाड़ी अब जीवन के नए दौर में आगे बढ़ रहे हैं.''
''अजिंक्य रहाणे को कई वजहों से याद किया जाएगा, लेकिन सबसे बढ़कर 2021 में ऑस्ट्रेलिया में भारत को मिली ऐतिहासिक टेस्ट सिरीज़ जीत में उनके शानदार नेतृत्व के लिए. भारतीय क्रिकेट को रहाणे जैसे व्यक्तित्व का अनुभव आगे भी इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि उनमें वे सभी गुण हैं, जिनकी इस खेल को ज़रूरत है. शानदार करियर के लिए बधाई रहाणे. आपकी बल्लेबाज़ी और खेल के प्रति आपका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा.''
अहम पारी
जब भी विराट कोहली उपलब्ध नहीं रहे, रहाणे ने टीम की कप्तानी संभाली. 2020-21 की बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी उनके कप्तानी करियर का सबसे अहम लम्हा था.
एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद कोहली वापस आ गए थे. इसके बाद रहाणे ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में खेले गए बॉक्सिंग डे टेस्ट में शानदार शतक जड़ते हुए टीम की अगुवाई की और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई.
गंभीर चोटों से जूझ रहे और कई प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद रहाणे ने भारत को लगातार दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सिरीज़ जिताई. इस दौरे का समापन गाबा में मिली ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ, जहां भारत ने ऑस्ट्रेलिया के 32 साल पुराने अजेय रिकॉर्ड का अंत किया.
लगातार नौ वर्षों तक टेस्ट टीम का हिस्सा रहने के बाद दक्षिण अफ्रीका दौरे में ख़राब प्रदर्शन के कारण रहाणे पहली बार भारतीय टेस्ट टीम से बाहर कर दिए गए.
हालांकि, 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए उन्होंने टीम में वापसी की और 89 तथा 46 रन की पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की. लेकिन उनकी वापसी सिर्फ़ तीन टेस्ट मैचों तक ही सीमित रही. भारत के लिए उनका आख़िरी मुकाबला जुलाई 2023 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ खेला गया टेस्ट मैच था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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