You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
शेख़ हसीना अगर बांग्लादेश लौटीं तो भारत को क्या होगा फ़ायदा?
- Author, शुभज्योति घोष
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला, दिल्ली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
शेख़ हसीना बीते दो साल से भारत में हैं. उनके दिसंबर में अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश लौटने और अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताने वाले बयान के बाद बांग्लादेश और भारत दोनों में हलचल पैदा हो गई है.
हालांकि भारत में विश्लेषक इस बयान को 'देश में वापसी की निश्चित घोषणा' के बजाए 'ग्राउंड टेस्टिंग' के रूप में देख रहे हैं.
आधिकारिक तौर पर कम से कम भारत में शेख़ हसीना के रहने के मुद्दे पर दिल्ली के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.
पिछले कुछ दिनों में विदेश और गृह मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि भारत ने न तो शेख़ हसीना को स्वयं आमंत्रित किया है, न ही उन्हें शरण दी है, और न ही अब उन्हें जबरन निष्कासित कर रहा है.
एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने कहा, "अगर वह मौजूदा हालात का आकलन करने के बाद घर लौटना चाहती हैं, तो लौट जाएं. और अगर उन्हें लगता है कि फ़िलहाल उन्हें भारत में ही रहना है, तो ठीक है. इस मामले पर हमारे पास कहने के लिए कुछ नया नहीं है."
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख़ हसीना ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को एक इंटरव्यू दिया.
उन्होंने इस इंटरव्यू में कहा कि वह दिसंबर में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ घर लौटने की योजना बना रही हैं और वह लौटने पर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना चाहती हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह निर्णय इस तथ्य के बावजूद लिया कि घर लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. यहां तक कि उन्हें फांसी भी दी जा सकती है.
पिछले कुछ दिनों में बीबीसी बांग्ला ने शेख़ हसीना के बयान के संबंध में दिल्ली में कई शीर्ष सरकारी अधिकारियों, विश्लेषकों और पूर्व राजनयिकों से बात की है. साथ ही भारत में शरण लिए हुए कई अवामी लीग नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी संपर्क किया है.
उन चर्चाओं से दो मुख्य बातें सामने आईं, जिन पर लगभग सभी पक्ष सहमत हैं.
सबसे पहले शेख़ हसीना के बयान का यह मतलब नहीं है कि वह दिसंबर में भारत से उड़ान भरकर ढाका पहुंचेंगी, ऐसा होना संभव नहीं है.
बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले पांच महीनों में हालात कैसे बदलते हैं, बांग्लादेश सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है, हसीना के लिए नए सिरे से मुक़दमा चलाया जाता है या उन्हें फांसी देने की कार्रवाई की जाती है.
साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय शेख़ हसीना के बारे में क्या सोचता है. क्या शेख़ हसीना वास्तव में दिसंबर में ढाका के लिए विमान में सवार होंगी?
दूसरा पक्ष ये है कि शेख़ हसीना चाहे जितना भी कहें कि उन्होंने अपने फ़ैसले के बारे में किसी भी विदेशी सरकार से सलाह नहीं ली, सभी विश्लेषक इस बात से सहमत हैं कि उन्होंने यह बात भारत की सहमति के बिना बिल्कुल नहीं कही, क्योंकि भारत ने ही वर्तमान में उन्हें शरण दे रखी है.
दरअसल, भारत सरकार का भी मानना है कि इस घोषणा से उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा, बल्कि फायदे की संभावना और बढ़ जाएगी.
क्योंकि अगर शेख़ हसीना सचमुच बांग्लादेश लौट जाती हैं, तो भारत पिछले दो वर्षों से चली आ रही राजनयिक असुविधा से मुक्त हो जाएगा.
अगर वह नहीं भी लौटती हैं, तो भी यह कहा जा सकता है कि शेख़ हसीना लौटना चाहती थीं, लेकिन भारत ने मना किया क्योंकि उनके लौटने के लिए माहौल अनुकूल नहीं था.
इसलिए शेख़ हसीना के बयान को वास्तव में 'एक तीर से कई निशाने साधने' की तरह देखा जा रहा है. इसमें ज़ाहिर तौर पर उन्हें या उनके 'मेज़बान देश' को कुछ भी खोना नहीं है.
दरअसल, यह दोनों पक्षों की सोची-समझी चाल है, जिसके ज़रिए गेंद को बांग्लादेश या बांग्लादेश सरकार के पाले में धकेलने की कोशिश की गई है.
और सिर्फ इसलिए कि वह दिसंबर में लौटने की इच्छा जता रही हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें वास्तव में लौटना ही होगा.
भारतीय सरकार का क्या रुख है?
शेख हसीना के देश लौटने की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई को जवाब दिया कि इस मुद्दे पर उनका रुख नहीं बदला है.
पिछले दो वर्षों से भारत में शेख हसीना के असाइलम के संबंध में भारत का घोषित रुख यह रहा है कि जब शेख हसीना ने एक विशेष सुरक्षा स्थिति में भारत से शरण मांगी थी, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया था.
इस बयान के माध्यम से भारत यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसने शेख़ हसीना को अपनी ओर से शरण नहीं दी और न ही देश छोड़ने में उसकी कोई भूमिका थी. भारत ने इसे कई तरह से समझाया है और कहा है कि परिस्थितियों के कारण उसे शेख हसीना को शरण देनी पड़ी.
लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि डेढ़ साल से अधिक समय से भारत बांग्लादेश सरकार के शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भेजे गए मौखिक या औपचारिक अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दे रहा है.
इसमें कोई संदेह नहीं है कि शेख हसीना की भारतीय धरती पर उपस्थिति भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में अत्यधिक असुविधा का एक कारण बनी हुई है.
अब सवाल यह है कि क्या भारत शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने की बात से सहमत है?
इस सवाल का सीधा सा जवाब है, 100 फीसदी हां.
बीबीसी ने जिन विश्लेषकों और पूर्व राजनयिकों से बात की, उन सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि शेख हसीना ने भारत के अप्रत्यक्ष समर्थन के बिना या भारत से परामर्श किए बिना यह बात नहीं कही.
ढाका में भारत के पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती कहते हैं, "मुझे लगता है कि शेख हसीना वास्तव में वापस लौटने के लिए उत्सुक और गंभीर हैं. उन्हें यह एहसास हो गया होगा कि अवामी लीग को बचाने के लिए उन्हें अपने देश लौटना होगा."
साथ ही उनका मानना है कि शेख हसीना के ढाका लौटने पर उन्हें सीधे फांसी देना जितना आसान लगता है, उतना आसान है नहीं.
चक्रवर्ती ने कहा, "मुझे लगता है कि वह अदालत में मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ अपील करेंगी और उस मुकदमे की सुनवाई के दौरान उन्हें छावनी में सुरक्षा में रखा जाएगा. अब अगर भारत पर्दे के पीछे ढाका के साथ इस बात को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रहा हो तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा."
अगर किसी वजह से वह सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती है, तो हो सकता है कि वह अंततः वापस न लौटें.
अगर वह वाकई दिसंबर में लौट जाती हैं, तो भारत के लिए बांग्लादेश के साथ संबंधों को सामान्य गति से आगे बढ़ाना बहुत आसान हो जाएगा, क्योंकि शेख हसीना को शरण देने की असुविधा अब कूटनीति पर असर नहीं डालेगी.
अगर बांग्लादेश सरकार यह वादा करती है कि शेख हसीना के घर लौटने पर उन पर दोबारा मुकदमा चलाया जाएगा, तो इसे भी भारत के लिए एक उपलब्धि माना जाएगा.
क्या है शेख़ हसीना की रणनीति?
दिल्ली के राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश लौटने के अपने फैसले की घोषणा करने में शेख हसीना ने भी कैलकुलेशन की हैं.
पिछले दो सालों से बांग्लादेश में अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बार-बार यह सुनना पड़ रहा है कि उनके सर्वोच्च नेता विदेश में सुरक्षा के लिए 'भाग गए' हैं, जिससे पार्टी के 'वफादार सैनिकों' का भविष्य खतरे में पड़ गया है.
हक़ीक़त यह है कि जब बांग्लादेश में एक के बाद एक अवामी लीग के कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई या आग लगा दी गई और देश के विभिन्न हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए, उनके खिलाफ मुकदमे दायर किए गए, तो शेख हसीना सहित पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें कोई सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाया.
इतने लंबे समय के बाद देश लौटने की 'एक निश्चित तारीख' की घोषणा करके शेख हसीना यह संदेश देना चाहती हैं कि वह घर लौटने को लेकर गंभीर हैं. इसके माध्यम से वह नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहती हैं और उनके साथ खड़ी रहना चाहती हैं.
एक और बात शेख हसीना यह भी जानती हैं कि अवामी लीग को पुनर्जीवित करने और पार्टी को बांग्लादेश के राजनीतिक मानचित्र पर वापस लाने के लिए, उन्हें शारीरिक रूप से बांग्लादेश की धरती पर कदम रखना होगा, जो भारत में रहते हुए संभव नहीं है.
दिल्ली के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और बांग्लादेश मामलों के विशेषज्ञ जयंत रॉय चौधरी कहते हैं, "मुझे लगता है कि शेख हसीना बीएनपी को यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि वह अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाकर उसे अप्रासंगिक बनाने के प्रयास को स्वयं रोकेंगी. यह स्पष्ट है कि भारत भी उनके इस कदम का मौन समर्थन करता है."
उन्होंने कहा, "लेकिन कम से कम दिल्ली मौखिक रूप से तो यह कहेगी कि शेख हसीना एक 'स्वतंत्र प्रतिनिधि' हैं. इसलिए वह अपने राजनीतिक निर्णय खुद लेंगी."
दरअसल, विश्लेषकों का मानना है कि विशेष रूप से चूंकि शेख हसीना अवामी लीग का नेतृत्व अपने परिवार के बाहर किसी को भी सौंपने के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्हें पार्टी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए अंतिम प्रयास करना होगा. यह काम किसी और को नहीं दिया जा सकता.
उनका मानना है कि अपने दम पर घर लौटने के फैसले की घोषणा करके वह बांग्लादेश सरकार पर कुछ दबाव डाल पाएंगी.
अवामी लीग का ऐसा मानना है कि अंतरिम सरकार के दौरान न्यायाधिकरण की ओर से आयोजित वह मुकदमा जिसमें उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी, कभी भी निष्पक्ष मुकदमा नहीं था.
लेकिन नए सिरे से मुकदमा शुरू करने के खातिर दबाव बनाने के लिए उन्हें पहले बांग्लादेश लौटना होगा. घर लौटने पर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की बात कहकर, शेख हसीना यह संदेश भी देना चाहती हैं कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर भरोसा है. लेकिन उस स्थिति में राज्य को निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई की गारंटी भी देनी होगी.
हालांकि शेख हसीना का कहना है कि वह इन सब के बाद घर लौट आएंगी, लेकिन यह सच नहीं है कि उन्हें दिसंबर में ही लौटना होगा.
अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता क्या करेंगे?
अगस्त 2024 से कई हजार अवामी लीग के नेता, पूर्व सांसद, मंत्री और आम कार्यकर्ता और समर्थक भारत में शरण ले रहे हैं.
इनमें से अधिकतर लोग कोलकाता के पास न्यू टाउन-राजारहाट, असम के गुवाहाटी या त्रिपुरा के अगरतला जैसे शहरों में रहते हैं. शेख हसीना का बयान सामने आने के बाद से बीबीसी बांग्ला ने इनमें से कई लोगों से बात की है.
अवामी लीग के कई शीर्ष नेताओं का मत है कि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पहले से ही बहुत जटिल है. अगर शेख हसीना वापस आती हैं तो यह और भी जटिल और अस्थिर हो सकती है. बीएनपी सरकार यह जोखिम नहीं लेना चाहेगी.
लेकिन अगर उनकी नेता आखिरकार घर लौटने का फैसला करती हैं, तो कितने लोग उनके साथ जाने के लिए सहमत होंगे?
इस सवाल के भी अलग-अलग जवाब हैं. कुछ लोगों का कहना है कि जब भी नेता घर लौटेंगी, देश-विदेश में शरण लिए हुए 'अवामी लीग के सिपाही' निश्चित रूप से हवाई जहाज से उनके साथ ढाका लौटना चाहेंगे.
लेकिन कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि शेख हसीना की अपनी राजनीतिक छवि, महत्व और अंतरराष्ट्रीय मान्यता की तुलना पार्टी के किसी अन्य नेता की छवि या मान्यता से नहीं की जा सकती.
शेख हसीना के मंत्रिमंडल के एक पूर्व सदस्य ने कहा, "अगर नेता पर दोबारा मुकदमा चलाया जाता है, तो पूरी दुनिया, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की निगाहें उन पर होंगी. लेकिन अगर हम देश में जाते हैं, तो हमें तुरंत झूठे आरोपों में जेल में डाल दिया जाएगा. दुनिया में किसी को पता भी नहीं चलेगा. कोई पीछे मुड़कर नहीं देखेगा."
नतीजतन, अगर शेख हसीना वाकई दिसंबर में देश लौटती हैं, तो यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि कितने पार्टी नेता और कार्यकर्ता उनके साथ वापसी की यात्रा करेंगे.
इनमें से कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा है कि उनका मानना है कि बांग्लादेश सरकार चाहे कुछ भी कहे, असल में वह शेख हसीना को देश में वापस नहीं आने देना चाहती.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.