हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक ऐसा दूसरा राज्य बन गया है जहां मुजरई मंदिरों में आने वाले सभी तरह के चढ़ावे की निगरानी के लिए सीसीटीवी
कवरेज अनिवार्य कर दी गई है.
'मुजरई मंदिर' शब्द का प्रयोग आमतौर पर कर्नाटक राज्य में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग की ओर से प्रबंधित या वित्तपोषित मंदिरों के लिए किया जाता है.
नए निर्देश के तहत नक़दी की गिनती और सोने, चांदी और आभूषणों का तत्काल मूल्यांकन भी
सीसीटीवी निगरानी में किया जाएगा, ताकि चोरी और
गड़बड़ियों को रोका जा सके.
राज्य सरकार की ओर से जारी एसओपी से जुड़े
विस्तृत सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सीसीटीवी कैमरे सीधे ज़िला
मजिस्ट्रेट के कार्यालय से जुड़े होंगे.
साथ ही, मुजराई, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारियों की एक
संयुक्त समिति हर तीन महीने में इन व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी.
कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के ये नए आदेश
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद आए हैं.
'सरकारी निगरानी वाले मंदिरों के दानपात्रों में चोरी के मामले आए'
आदेश में कहा गया है, "देश के विभिन्न राज्यों में हाल की घटनाओं के
कारण मंदिरों की हुंडियों (दानपात्रों) से चोरी और उनकी सुरक्षा को लेकर ख़बरें
सामने आई हैं. इसके अलावा, राज्य के धार्मिक
बंदोबस्ती विभाग के अधिकार क्षेत्र वाले मंदिरों में हुंडियों की गिनती और लेखांकन
के दौरान चोरी और धन के दुरुपयोग जैसी घटनाओं की भी रिपोर्ट मिली है."
अतिरिक्त मुख्य सचिव और राजस्व सचिव राजेंद्र
कुमार कटारिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, "सुरक्षा कारणों से मंदिरों में लगाए गए सीसीटीवी वेब कैमरों को संबंधित ज़िला
मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय पुलिस थाने के
दफ़्तरों से जोड़ा जाना चाहिए. इनकी निगरानी के लिए ट्रैफ़िक कंट्रोल रूम की तर्ज़
पर डैशबोर्ड भी स्थापित किए जाएं."
आदेश में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली
को और बढ़ावा देने के लिए सभी मंदिरों में क्यूआर कोड लगाए जाएं. इसका उद्देश्य
श्रद्धालुओं के नक़दी, बैग या पर्स लेकर आने के कारण भीड़ में होने
वाली जेब काटने जैसी घटनाओं को कम करना है.
साथ ही, किसी भी तरह के
दुरुपयोग को रोकने के लिए क्यूआर कोड के नीचे संबंधित बैंक का विवरण (आईएफ़एससी
आदि) भी प्रदर्शित किया जाए.
आदेश में कहा गया है कि हुंडी (दानपात्र) को
हटाने से लेकर हुंडी की गिनती में शामिल प्रत्येक कर्मचारी को रकम सौंपने और गिनती
पूरी होने के बाद उसे वापस लेने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए.
यह रिकॉर्डिंग तारीख़ और समय के साथ की जानी अनिवार्य होगी.
चढ़ावे की गिनती में सिर्फ़ सरकारी कर्मी तैनात होंगे
साथ ही, दानपात्र से
प्राप्त धनराशि की गिनती के लिए केवल सरकारी कर्मचारियों, बैंक कर्मियों और होमगार्ड के जवानों की सेवाएं
लेने को अनिवार्य किया गया है. आदेश के अनुसार, चोरी की किसी भी
घटना की स्थिति में संबंधित मंदिर अधिकारियों और तालुका स्तर के अधिकारियों को सीधे
तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.
आदेश के अनुसार, ज़िला मजिस्ट्रेट
और पुलिस अधीक्षक हर महीने निगरानी रिपोर्ट तैयार कर विभाग के सचिव और पुलिस
महानिदेशक (डीजीपी) को भेजेंगे.
शीर्ष 11 मंदिरों से होती है 600 करोड़ रुपये की आय
कर्नाटक में मुजराई विभाग के तहत 35,566 मंदिर हैं. इनमें से केवल शीर्ष 11 मंदिरों को दान आदि से सालाना 600 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है.
मंदिरों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया
गया है. सालाना 25 लाख रुपये या उससे अधिक आय वाले मंदिरों को ए
श्रेणी में रखा गया है और ऐसे मंदिरों की संख्या 205 है.
वहीं, सालाना 5 लाख रुपये से अधिक आय वाले 193 मंदिर बी श्रेणी में आते हैं.
बाक़ी 34,168 मंदिरों की सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है.
सबसे अधिक आय वाला मंदिर कुक्के सुब्रह्मण्य
मंदिर है,
जिसकी सालाना आय लगभग 168 करोड़ रुपये है. पिछले दो दशकों में बॉलीवुड
सितारे ऐश्वर्या राय, अमिताभ बच्चन और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर समेत
कई प्रसिद्ध हस्तियां इस मंदिर के दर्शन के लिए आ चुकी हैं.