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संतोष दुबे से अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी ने क्या की पूछताछ
अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है. राज्य सरकार की गठित एसआईटी इस क्रम में अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर रही है. मसलन मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारी, नकदी गिनने की प्रक्रिया से जुड़े लोग और शिकायतकर्ता.
इसी क्रम में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले में मुखर रहे पूर्व कारसेवक और स्थानीय हिंदूवादी नेता संतोष दुबे से एसआईटी ने रविवार को पूछताछ की.
चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संतोष दुबे मीडिया से बात करते रहे हैं. उन्होंने इस दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे.
संतोष दुबे का आरोप है कि चढ़ावा चोरी को लेकर चंपत राय समेत कई लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में है.
इस मामले के सामने आने के बाद यूपी सरकार ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था. एसआईटी ने इस मामले में एक प्रारंभिक रिपोर्ट यूपी सरकार को दी थी.
इसके बाद इस मामले में एसआईटी ने आठ लोगों को गिरफ़्तार किया है. सभी आठ अभियुक्तों की न्यायिक हिरासत सोमवार को 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है.
हालांकि, एसआईटी की जांच अभी जारी है और वो लगातार पूछताछ कर रही है.
'मुझसे पूछा गया कि चोरी की जानकारी कैसे मिली'
इसी कड़ी में एसआईटी ने हिंदू धर्म सेना के प्रमुख संतोष दुबे से पूछताछ की है.
पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में बताया कि उन्हें रविवार रात स्थानीय पुलिस ने सूचना दी थी कि एसआईटी उनसे पूछताछ करना चाहती है.
उन्होंने कहा, "कल रात हमारे यहां के कोतवाल मनोज शर्मा मेरे पास आए थे. उन्होंने मुझसे कहा कि एसआईटी ने मुझे बुलाया है. मैं रात आठ बजे सीओ सिटी कार्यालय पहुंचा. वहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पूछताछ हुई."
दुबे के मुताबिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्क्रीन पर एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत और जांच टीम के अन्य अधिकारी मौजूद थे.
वो बताते हैं, "मुझसे पूछा गया कि मुझे कथित चोरी के बारे में कब और कैसे पता चला. मैंने पूरा घटनाक्रम क्रमवार बताया. इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मेरे पास कोई दस्तावेज़ या सबूत हैं तो उन्हें भी उपलब्ध कराया जाए."
दुबे का कहना है कि उन्होंने करीब 50 पन्नों के दस्तावेज़ तैयार कर रखे थे, जिन्हें उन्होंने सोमवार दोपहर सीओ सिटी कार्यालय में जमा करा दिया.
संतोष दुबे ने और क्या बताया
एसआईटी की पूछताछ की पुष्टि करते हुए संतोष दुबे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि उन्हें एसआईटी ने उनके दावे को लेकर सबूत उपलब्ध कराने को कहा था.
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि वो दस्तावेज़ लेकर आए थे और उन्हें एसआईटी के सामने पेश किया.
उन्होंने कहा, "कल मुझे एसआईटी की टीम ने बुलवाया था. वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए मुझसे मेरी बात उन्होंने जानी. मैं पहले से जो भी कहता आ रहा था, वही बात मैंने उनको बताई."
"मुझसे कहा गया कि अगर मेरे पास कुछ प्रूफ़ हैं तो मैं उन्हें उपलब्ध कराऊं क्योंकि परसों उन्हें जांच जमा करनी है. वही मैं लेकर आया हूं. काफ़ी देर तक चर्चा हुई. वो जो हमसे जानना चाहते थे कि जो भी दस्तावेज़ राम जन्मभूमि को लेकर उपलब्ध हैं, उन्हें मैं देने आया हूं."
वहीं समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में संतोष दुबे ने कहा कि उन्हें एसआईटी से बहुत सकारात्मक आश्वासन मिला है और अच्छी कार्रवाई होगी.
उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने ज़मीन का घोटाला किया, जिन लोगों ने मंदिर में ग़बन करवाया और चोरी करवाई, हमने उन्हीं के ख़िलाफ़ अपना बयान दर्ज कराया है. अगले सप्ताह तक मेरे पास और सबूत आ जाएंगे, वह भी सौंपेंगे."
संतोष दुबे ने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें उम्मीद है उन सभी के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एसआईटी एक-एक कर उन सभी लोगों से पूछताछ करेगी, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से ट्रस्ट और मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी
उधर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल को अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने का निर्देश दिया है.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया.
लाइव लॉ के अनुसार, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफ़ाफ़े में दाख़िल की जाएगी.
सीईओ पद के लिए आवेदन
इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं.
ट्रस्ट की ओर से जारी विज्ञापन में कहा गया है कि ऐसे उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी जो हिंदू हो और वैष्णव परंपरा का अनुयायी हो. चयनित अधिकारी मंदिर के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं और विभिन्न विभागों के समन्वय की ज़िम्मेदारी संभालेगा.
ट्रस्ट की ओर से इसे प्रशासनिक व्यवस्था को और संस्थागत बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है.
हालांकि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ट्रस्ट पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों और उनकी जांच को लेकर चर्चा में है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.