चीन के सरकारी मीडिया को सीमा पर भारतीय सैनिकों की ओर से गोली चलने का डर

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भारत और चीन के बीच सीमा तनाव कम करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें चल रही हैं. लेकिन दोनों देशों की मीडिया में इससे इतर तनावपूर्ण बयान छप रहे हैं.

इसी कड़ी में चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने रिपोर्ट छापी है कि भारत की तरफ़ से चली गोली के 'असहनीय परिणाम' होंगे.

अख़बार ने पर्यवेक्षकों के हवाले से लिखा है कि भारत का सीमा पर जवानों की संख्या बढ़ाना और चीनी सेना के साथ किसी झड़प में गोली चलाने की इजाज़त देना दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाएगा और भारत के लिए भी इसके परिणाम ख़तरनाक होंगे.

अख़बार लिखता है कि ये बात ऐसे वक़्त में हो रही है जब भारत ने चीन के साथ तनाव कम करने को लेकर सहमति जताई थी.

"दोनों देशों के मिलिट्री कमांडर स्तर की मीटिंग में ये तय हुआ था कि वे फ्रंटलाइन पर सैनिकों की संख्या और नहीं बढ़ाएंगे लेकिन भारत अपने वादे को लेकर ईमानदारी नहीं बरत रहा जिससे तनाव बढ़ रहा है."

अख़बार ने जानकारों के हवाले से लिखा है कि 'तनाव को देखते हुए, चीन को भारत की चाल को लेकर सीमा पर अलर्ट हो जाना चाहिए और किसी संभावित सैन्य टकराव के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि भविष्य में सीमा पर ये सामान्य बात होने वाली है.'

भारतीय अख़बार की रिपोर्ट के बाद आई प्रतिक्रिया

अख़बार में लिखी गई ये प्रतिक्रिया भारत के द हिंदू अख़बार की एक रिपोर्ट के बाद आई है.

इस रिपोर्ट में छपा था कि भारत ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर पीएलए के सैनिक आगे बढ़ेंगे तो भारतीय सैनिक उन पर गोली चला सकते हैं. एक शीर्ष भारतीय अधिकारी (अनाम) ने अख़बार से ये बात कही थी.

अधिकारी ने कहा था, "अब हमने चीन से कह दिया है कि अगर आप हमारे नज़दीक आएंगे तो हम गोली चलाएंगे. सैनिकों को भी आत्मरक्षा में गोली चलाने का अधिकार दे दिया गया है."

हाल के दिनों में पूर्वी लद्दाख में पेंगॉग त्सो झील के पास भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई बार हवाई फ़ायरिंग हुई है.

भारत और चीन के बीच हुई छठे दौर की वार्ता में दोनों देश सीमा पर और अधिक सैनिक न भेजने पर सहमत हुए हैं. भारतीय अधिकारी का कहना है कि भारत सीमा पर अपनी मज़बूत मौजूदगी बनाए रखेगा.

उन्होंने कहा, "हमारा रुख़ स्पष्ट है, चीन पहले आया था, उसे ही पहले पीछे हटना होगा."

ग्लोबल टाइम्स की इस हालिया रिपोर्ट में बीजिंग की चिंगहुआ यूनिवर्सिटी के एक एक्सपर्ट कियान फेंग कहते हैं कि भारत ने सीमावर्ती इलाक़ों में निर्माण कार्य और सैन्य तैयारियां कभी नहीं रोकी. उनका दावा है कि भारत ने पाकिस्तान और चीन की सीमा पर दो-तीन लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं.

हिंदू अख़बार की रिपोर्ट पर अख़बार में और भी लेख लिखे गए हैं. एक ऐसे ही लेख में इस बात की आशंका जताई गई है कि भारत की तरफ़ से भी पहली गोली चल सकती है.

भारत और चीन के सैनिकों के बीच जून में गलवान घाटी में झड़प हुई थी जिसमें बीस भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी.

चीन ने अपने हताहत हुए सैनिकों की संख्या जारी नहीं की थी. लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने हाल ही में चीन के सैनिकों के मारे जाने का भी दावा किया था.

क्या बनी थी सहमति?

भारत और चीन में सीमा पर तनातनी को लेकर कोर कमांडर स्तर के छठे चरण की बातचीत के बाद 22 सितंबर को साझा बयान जारी किया गया था.

दोनों देशों के संयुक्त बयान में बताया गया था कि सीमा पर भारत-चीन और सैनिकों को भेजना बंद करेंगे.

सैन्य कमांडर स्तर की हुई बातचीत के बाद साझे बयान में कहा गया था, ''दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत को और मज़बूत करने पर बनी सहमति को गंभीरता से लागू करने की ज़रूरत है. ग़लतफ़हमियों से बचने की ज़रूरत है और साथ ही सीमा पर सैनिकों की संख्या अब नहीं बढ़ानी है. कोई भी पक्ष सीमा पर एकतरफ़ा यथास्थिति से छेड़छाड़ नहीं करे और ऐसा कोई भी क़दम नहीं उठाया जाए जिससे समस्या जटिल हो. दोनों देशों वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर हालात को स्थिर करने की कोशिश करेंगे.''

इसके अलावा हालिया बातचीत में कहा गया कि एलएसी पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा.

लेकिन द हिन्दू अख़बार के अनुसार रक्षा सूत्रों ने कहा कि अब भी सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति नहीं बन पाई है.

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