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हाफ़ पैंट, टीशर्ट और नंगे पांव: टीएमसी नेता जहांगीर ख़ान की पुलिस क्यों करा रही है फाल्टा में परेड
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान से ही सुर्ख़ियों में रहे फाल्टा सीट से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर ख़ान अभी भी चर्चाओं में हैं.
बीती आठ जून को जहांगीर ख़ान को पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ़ ने नेपाल बॉर्डर से गिरफ़्तार किया था. उस समय बीबीसी बांग्ला को एक सूत्र ने बताया था कि जहांगीर ख़ान देश से भागने की तैयारी में थे.
'फाल्टा का पुष्पा' कहे जाने वाले जहांगीर ख़ान को गिरफ़्तार किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा में उनकी दो बार परेड कराई है.
सोमवार 15 जून को कराई गई दूसरी परेड में वो हाफ़ पेंट और टीशर्ट पहने हुए थे.
इस दौरान जहांगीर ख़ान हाथ जोड़ते और कान पकड़ते हुए भी नज़र आए. पहली बार कराई गई परेड के दौरान भी उन्होंने हाफ़ पेंट और टीशर्ट पहनी हुई थी लेकिन उस समय उनके पैरों में चप्पलें थीं. लेकिन सोमवार को कराई गई परेड के दौरान वो नंगे पैर थे.
जहांगीर ख़ान पर हत्या, फ़िरौती समेत कम से कम पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने पांच मामलों में उनकी गिरफ़्तारी पर 26 मई तक अंतरिम रोक लगा दी थी.
हालांकि जहांगीर ख़ान ने दोबारा हाई कोर्ट का रुख़ किया था लेकिन वेकेशन बेंच ने उन्हें पांचों एफ़आईआर में राहत देने से इनकार कर दिया था.
क्यों कराई गई परेड
नेपाल सीमा से गिरफ़्तारी के बाद इलाक़े में दो-दो बार उनको सड़कों पर घुमाने और कभी कान पकड़ कर तो कभी हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगने वाली तस्वीरें और वीडियो वायरल हैं. इस मामले पर विवाद भी हो रहा है.
लेकिन आख़िर जहांगीर को उसी इलाक़े में इस तरह सड़कों पर क्यों घुमाया गया जहां चुनाव से पहले तक उनकी तूती बोलती थी? इस मुद्दे पर कोई पुलिस अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ कहने को तैयार नहीं है.
हालांकि ज़िला पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी को बताया, "जहांगीर के ख़िलाफ़ फाल्टा थाने में विभिन्न मामले में सात प्राथमिकी दर्ज हैं. उनमें से कुछ मामले में घटना के पुनर्निर्माण और सबूत जुटाने के मक़सद से ही उनको मौक़े पर ले जाया गया था."
लेकिन पुलिस की जीप के बजाए पैदल क्यों ले जाया गया और वो हाथ जोड़कर माफ़ी मांगते क्यों नज़र आ रहे थे? इस सवाल पर उन अधिकारी का कहना था कि इसका एक मक़सद इलाक़े के लोगों को यह संदेश देना था कि अब उनको जहांगीर से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है और उसका आतंक ख़त्म हो चुका है.
हालांकि उस अधिकारी ने इस सवाल पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या पुलिस को ऐसा करने के लिए ऊपर से कोई निर्देश मिला था?
बीबीसी बांग्ला के वरिष्ठ पत्रकार शुभोज्योति घोष कहते हैं कि इस तरह से परेड कराया जाना एक मैसेजिंग है. वो कहते हैं कि इससे नई सरकार जनता में ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके राज में दबंगों का ये हश्र होगा.
कौन हैं जहांगीर ख़ान
जहांगीर को तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी का क़रीबी माना जाता था जो दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा में काफ़ी चर्चित नेता थे.
प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि जहांगीर ख़ान ने साल 2021 में चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन परदे के पीछे उनकी काफ़ी सक्रिय भूमिका रही थी. अभिषेक बनर्जी से कथित क़रीबी के कारण इलाक़े में उनकी पहचान बाहुबली नेता के तौर पर थी.
साल 2021 में चुनाव बाद की हिंसा को लेकर भी उनका नाम सामने आया था. वह दक्षिण 24-परगना ज़िला परिषद में पीडब्ल्यूडी और सड़क परिवहन विभाग के प्रमुख थे.
जहांगीर ने फाल्टा स्थित बेलसिंघा शिक्षायतन स्कूल से साल 2002 में 12वीं पास की थी.
इस साल चुनाव आयोग के पास जमा हलफ़नामे में उन्होंने व्यापार और सामाजिक कार्य को अपना पेशा बताया था. इसके मुताबिक़, उनकी कुल संपत्ति 2.10 करोड़ है.
चुनाव के दौरान जब ख़ुद को बताया 'पुष्पा'
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए थे और चार मई को परिणाम आए थे. इन चुनावों में बीजेपी ने 207 सीटें और टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं.
दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा सीट पर भी मतदान हुआ था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं पाईं और उसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान की घोषणा की थी.
फाल्टा विधानसभा सीट पहले से चर्चाओं में रही थी क्योंकि बीजेपी का आरोप था कि स्थानीय टीएमसी नेता जहांगीर ख़ान लोगों का उत्पीड़न करते हैं.
चुनाव प्रक्रिया के दौरान यहां ऑब्ज़र्वर बनाए गए यूपी के चर्चित आईपीएस अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था.
इसमें अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को चेतावनी दी थी. वीडियो में वह कहते दिखे, "अच्छी तरह से समझ लें, किसी ने बदमाशी की तो कायदे से इलाज किया जाएगा. कहीं से ख़बर आई कि किसी ने कोई ख़ुराफ़ात की, किसी को परेशान करने की कोशिश की तो उसकी अच्छी से ख़बर ली जाएगी. जहांगीर के घरवाले भी ये सुन लें. उसे बता देना. बार-बार ख़बरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है. उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत."
इस वीडियो के वायरल होने के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आईपीएस अजयपाल शर्मा की निंदा की थी और उनको हटाने की मांग की थी.
इस पर जहांगीर ख़ान ने कहा था कि अगर अजयपाल 'सिंघम' हैं तो वो भी 'पुष्पा हैं जो झुकता नहीं है.'
फिर चुनाव से हटे पीछे
माना जा रहा था कि फाल्टा सीट पर टीएमसी के जहांगीर ख़ान का मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला से है. सीपीआई (एम) के शंभू नाथ कुर्मी को भी चुनावी मैदान में गिना जा रहा था.
लेकिन मतदान से पहले ही जहांगीर ख़ान ने अचानक चुनावी रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी. तृणमूल कांग्रेस का कहना था कि यह उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है न कि पार्टी का.
इस मामले पर जहाँगीर ख़ान ने कहा था, "मैं फाल्टा की मिट्टी का बेटा हूँ. मैं हमेशा फाल्टा में शांति और विकास चाहता हूँ. मेरा सपना फाल्टा को सुंदर बनाना था. मुख्यमंत्री फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज देंगे और इसी वजह से मैं 21 मई को होने वाले मतदान से ख़ुद को अलग कर रहा हूँ."
उनकी इस घोषणा पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि 'जहांगीर ख़ान भाग गए क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला.'
हालांकि मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा एक लाख से ज़्यादा वोटों से जीत गए. उन्होंने 149666 यानी कि 71.2% वोट हासिल किए.
राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए दूसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के शंभु नाथ कुर्मी रहे, जिन्हें 40645 (19.34%) वोट मिले. कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर रही जिसके प्रत्याशी अब्दुर रज़्ज़ाक को 10084 (4.8%) वोट मिले.
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के नाम पर भी 7783 (3.7%) वोट पड़े.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.