फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप: मेसी की दीवानगी जब सिर चढ़कर बोली

    • Author, एलिज़ाबेथ कॉनवे
    • पदनाम, वर्ल्ड कप रिपोर्टर, कैनसस सिटी
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में ये दिन फुटबॉल के सबसे बड़े स्टार खिलाड़ियों के नाम रहा. लेकिन इतने सारे दिग्गज खिलाड़ियों के बीच भी लियोनेल मेसी सबसे ऊपर रहे.

फ्रांस के किलियन एम्बापे और नॉर्वे के एरलिंग हालांड ने विश्व कप में दो-दो गोल करके बेहतरीन शुरुआत की.

लेकिन इसके कुछ घंटों बाद फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप का मंच एक और मैच के लिए तैयार था.

इस मैच में हमेशा की तरह मुख्य आकर्षण थे- लियोनेल मेसी. इस मैच में मेसी ने ये साबित भी कर दिया कि ये पूरी तरह मेसी का शो था.

वर्ल्ड कप में उनकी पहली हैट्रिक, वर्ल्ड कप के इतिहास में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए 16वाँ गोल, और एक बार फिर यह साबित करना कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनका जादू अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराया और इस जीत के केंद्र में मेसी ही रहे. तीनों गोल मेसी के नाम रहे.

छह वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ी बने मेसी

जब कैनसस सिटी में सूरज ढल रहा था, तब 38 वर्षीय मेसी छह वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी क्रिस्टियानो रोनाल्डो को एक दिन पहले यह उपलब्धि हासिल कर पीछे छोड़ दिया.

वर्ष 2006 में जर्मनी में हुए विश्व कप में मेसी ने पहला मैच खेला था. उस समय वे 18 साल के थे.

ठीक 20 बाद बाद फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक मेसी ने अपने देश के लिए 200वाँ अंतरराष्ट्रीय मैच खेला और शानदार प्रदर्शन पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया.

मैच के बाद मेसी ने कहा, "अपने परिवार, अपने साथियों और उन लोगों के साथ इस पल का आनंद लेना, जो हमेशा मेरे साथ रहे हैं, बेहद ख़ूबसूरत अहसास है. हमारी टीम बहुत एकजुट और मज़बूत है. मैं अच्छा महसूस कर रहा हूँ. हमने एक कठिन मैच जीता और पहले मुक़ाबले में जीत के साथ शुरुआत करना बेहद महत्वपूर्ण था. मैं प्रशंसकों का आभारी हूँ क्योंकि उन्होंने एक बार फिर दिखा दिया कि अर्जेंटीना के लोग फुटबॉल के लिए कितने जुनूनी हैं. उन्होंने फिर से पूरा स्टेडियम भर दिया."

मैच की शुरुआत में ही मेसी ने अपनी झलक दिखा दी थी.

चौथे मिनट में वे डिफ़ेंस को चीरते हुए आगे बढ़े और अल्जीरिया के गोलकीपर लूका जिदान को छकाकर गेंद गोल में पहुँचा दी, लेकिन ऑफ़साइड के कारण गोल रद्द कर दिया गया.

इसके बावजूद दर्शकों ने ऐसा जश्न मनाया मानो अर्जेंटीना वर्ल्ड कप जीत गया हो. पत्रकार एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा रहे थे. सबको लग रहा था कि यह तो बस शुरुआत है.

स्टेडियम हुआ मेसीमय

18वें मिनट में आख़िरकार वो अहम पल आया. लगभग 25 गज की दूरी से उन्होंने अपने बाएँ पैर से शानदार कर्लिंग शॉट लगाया, जो गोलपोस्ट के ऊपरी दाएँ कोने की ओर गया.

फ्रांस के महान खिलाड़ी जिनेदिन जिदान के बेटे लूका जिदान ने दोनों हाथ लगाए, लेकिन शॉट की ताक़त इतनी ज़्यादा थी कि गेंद गोल में चली गई.

कैनसस सिटी स्टेडियम अर्जेंटीना के प्रशंसकों की ख़ुशी से गूँज उठा. यह मेसी का वर्ल्ड कप में 14वाँ गोल था और एक ऐतिहासिक मैच की शुरुआत भी.

पूर्व फ़ुटबॉलर लियोन उस्मान ने कहा, "मेसी ऐसे जश्न मना रहे हैं जैसे यह उनका पहला वर्ल्ड कप गोल हो. उनकी प्रतिभा ऐसी है कि लगता ही नहीं कि उनकी उम्र बढ़ रही है. गेंद उनके पैरों तक शानदार तरीक़े से पहुँची और जैसा उनसे उम्मीद थी, उन्होंने बेहतरीन फ़िनिश किया."

अपने पहले वर्ल्ड कप मैच के दो दशक बाद और रिकॉर्ड 27वें वर्ल्ड कप मुक़ाबले में खेलते हुए भी मेसी उम्र को चुनौती देते नज़र आए.

पूरे मैच में वे लगातार विकल्प तलाशते रहे, खेल को पढ़ते रहे और अर्जेंटीना के अगले आक्रमण की योजना बनाते रहे. वे फ़िट, तेज़ और बेहद ख़तरनाक भी दिखाई दिए.

60वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल किया. लूका जिदान की एक बड़ी ग़लती से गेंद सीधे उनके पास पहुँची और उन्होंने पूरे धैर्य के साथ गेंद को गोल में डाल दिया.

इस गोल के साथ वे वर्ल्ड कप इतिहास के संयुक्त सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बनने से सिर्फ़ एक गोल दूर रह गए. साथ ही वे वर्ल्ड कप में दो गोल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए.

अब तक उम्र उनकी क्षमता को बिल्कुल भी कम नहीं कर सकी है.

35 साल की उम्र पार करने के बाद उन्होंने वर्ल्ड कप में 10 गोल किए हैं, जो हैरी केन, डिएगो माराडोना, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और थिएरी हेनरी के कुल वर्ल्ड कप गोलों से भी अधिक हैं.

वर्ल्ड कप में मेसी की हैट्रिक

76वें मिनट में निको गोंजालेज़ के पास पर मेसी ने अपनी हैट्रिक पूरी की. मानो यह पहले से ही तय था.

इस हैट्रिक के साथ उन्होंने जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज़ा के वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.

दोनों हाथ आसमान की ओर उठाए, आँखें ऊपर टिकाए और अर्जेंटीना के हज़ारों प्रशंसकों के बीच अपने नाम के नारों के साथ मेसी उस पल को महसूस कर रहे थे.

उनके जैसे महान खिलाड़ी के लिए भी यह क्षण बेहद ख़ास था. उन्होंने स्टेडियम में मौजूद हज़ारों समर्थकों की ओर मुड़कर उनका आभार व्यक्त किया.

जब उन्हें मैदान से बाहर बुलाया गया, तो पूरा स्टेडियम खड़ा होकर तालियाँ बजाने लगा. उनका नाम पूरे कैनसस सिटी स्टेडियम में गूँज रहा था.

अंतिम सीटी बजने के काफ़ी देर बाद भी अर्जेंटीना के हज़ारों प्रशंसक स्टेडियम में जश्न मनाते रहे.

पूरा स्टेडियम नीले और सफ़ेद रंग के समंदर में बदल चुका था. ढोल लगातार बज रहे थे और प्रशंसक पूरे जोश के साथ गा रहे थे.

कई लोगों ने अपनी जर्सी पर मेसी का नाम पहन रखा था, जबकि कई अपने शरीर पर बने उनके टैटू दिखा रहे थे. हर बातचीत का विषय सिर्फ़ मेसी थे.

उनके लिए मेसी सिर्फ़ एक खिलाड़ी नहीं हैं. अर्जेंटीना के प्रशंसकों ने उन्हें "हीरो", "आइडल" और "हमारा बेटा" जैसे शब्दों से सम्मान दिया.

चार साल पहले उन्होंने अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप जिताया था. ऐसे में कौन यह कहने की हिम्मत करेगा कि मेसी अपनी टीम को एक बार फिर ख़िताब तक नहीं पहुँचा सकते?

कैनसस सिटी चीफ़्स के स्टार क्वार्टरबैक पैट्रिक महोम्स आमतौर पर इस स्टेडियम के सबसे बड़े आकर्षण होते हैं. लेकिन वे भी बाक़ी दर्शकों की तरह मेसी के जादू में खोए नज़र आए.

सुपरस्टार खिलाड़ियों से भरे इस दिन में भी उम्र को मात देने वाले अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी सबसे ऊँचे खड़े दिखाई दिए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित