बुधवार शाम को भारत ने 15 अप्रैल तक सभी वीज़ा रद्द कर दिए. ऐसा करके भारत उन देशों में शामिल हो गया जिन्होंने कोरोना वायरस को लेकर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि ये ज़रूरी था और सरकार सिर्फ़ नियमों का पालन कर रही है.
लेकिन ये हड़कंप का संकेत भी है.
भारत के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि भारत कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए अपनी पूरी रफ़्तार, प्रतिबद्धता और क्षमता के साथ ही सर्वश्रेष्ठ तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है.
भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और अगर यहां ये वायरस फैला तो नतीजे चिंताजनक हो सकते हैं.
ये भी सच है कि चरमराई और असमान स्वास्थ्य व्यवस्था के बावजूद भी भारत ने पोलियो का ख़ात्मा किया है और स्वाइन फ्लू जैसी महामारी का सामना किया है और हाल ही में ख़तरनाक निपाह वायरस से भी निबटा है.
इसकी एक वजह भारत का बीमारियों पर निगरानी रखने का कार्यक्रम भी है जिसके तहत हर सप्ताह उन बीमारियों का आंकड़ा जुटाया जाता है जो बड़े पैमानों पर फैल सकती हों.
इस कार्यक्रम के तहत रैपिड रेस्पांस टीमें बनाई जाती हैं जो किसी भी ख़ास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसी बीमारी के सामने आने पर उससे निबटने के लिए तैयार रहती हैं.
अब तक डायरिया, डेंगू, चिकन पॉक्स, फूड पॉइजनिंग, खसरा और हैजा आदि बीमारियों से निबटने में इस कार्यक्रम का इस्तेमाल किया जाता रहा है.
शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक यदि भारत में कोरोना वायरस फैलता है तो मरीज़ों की पहचान के लिए इसी कार्यक्रम का इस्तेमाल किया जाएगा.
हालांकि ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि रैपिड रेस्पांस कार्यक्रम कोरोना से निबटने में कितना कारगर होगा या ये कितना तैयार है.
भारत का स्वास्थ्य डेटा अपर्याप्त ही है और हर मामले में मौत की रिपोर्ट भी नहीं की जाती है.