हिमाचल प्रदेश: बाग़ियों ने बढ़ाया बीजेपी-कांग्रेस का सिरदर्द
कभी प्रधानमंत्री की बाग़ियों से चुनाव में बैठने की अपील, कभी केंद्रीय मंत्री का भावुक होकर आंसू बहाना, तो कहीं मंच पर स्थानीय नेताओं का अपना दर्द बयान करना और कहीं 'मुझे याद रखना' जैसे पोस्टर से सियासत करना. बाग़ियों को रिझाने वाले ऐसे तमाम पल पिछले एक महीने में हिमाचल की राजनीति में देखने को मिले.
2022 विधानसभा चुनाव लंबे समय बाद ऐसा पहला चुनाव है जिसमें हिमाचल प्रदेश की राजनीति के बड़े नाम, बीजेपी के सबसे बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल ने हिस्सा नहीं लिया, वहीं कांग्रेस की तरफ़ से भी छह बार के मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह और पूर्व मंत्री स्वर्गीय सुखराम के ना होने से सियासी माहौल एकदम अलग था.
असल में हिमाचल का ये चुनाव दोनों दलों की दूसरी पीढ़ी ने लड़ा. इनमें राष्ट्रीय स्तर के और प्रदेश के बड़े कई नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है. लेकिन चुनावी नतीजे से पहले कोई भी ज़ोर शोर से जीत का दावा नहीं कर रहा है.
इसकी सबसे बड़ी वजह दोनों पार्टियों के बाग़ी उम्मीदवार हैं जिनकी ज़मीन पर मज़बूत पकड़ है. बीजेपी के 21 और कांग्रेस के क़रीब सात बाग़ी उम्मीदवार ऐसे हैं जो अपनी अपनी पार्टी का खेल बिगाड़ सकते हैं.