पेरू की राजनीति में बुधवार का दिन उथल-पुथल से भरा रहा. देश को पहली बार महिला राष्ट्रपति मिली है. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति पेद्रो कास्टिलो की संसद भंग करने की कोशिशों के बीच उन्हें महाभियोग चलाकर पद से हटाया गया.
पूर्व उपराष्ट्रपति डीना बोलुआर्ते ने बुधवार को नाटकीय घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति पद की शपथ ली. बुधवार को ही पेद्रो कास्टिलो ने कहा था कि वो संसद को एक "आसाधारण आपतकालीन सरकार" से बदल रहे हैं.
हालांकि, सांसदों ने इसको दरकिनार करते हुए एक आपतकालीन बैठक बुलाकर कास्टिलो को महाभियोग चलाकर पद से हटा दिया. इसके बाद कास्टिलो को हिरासत में ले लिया गया और उनपर विद्रोही होने का आरोप लगा.
पेशे से वकील, 60 वर्षीय बोलुआर्ते ने पद संभालने के बाद कहा कि वो जुलाई 2026 तक राष्ट्रपति रहेंगी. पेद्रो कास्टिलो का कार्यकाल भी उसी समय ख़त्म होने वाला था.
शपथ ग्रहण के बाद बोलुआर्ते ने देश को मौजूदा संकट से निकालने के लिए राजनीतिक शांति समझौते पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा, "मैं देश को बचाने के लिए सिर्फ़ थोड़ा वक़्त चाहती हूं."
बुधवार को नाटकीय सियासी घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब पेद्रो कास्टिलो ने नेशनल टेलीविज़न पर दिए संबोधन में आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी.
उन्होंने एलान किया कि वो विपक्षियों के नियंत्रण वाली कांग्रेस को भंग करेंगे. इसके बाद कई मंत्रियों ने विरोध में इस्तीफ़े देने शुरू कर दिए. संवैधानिक अदालत के प्रमुख ने कास्टिलो पर तख़्तापलट की कोशिश का आरोप लगाया.
अमेरिका ने भी कास्टिलो से अपना फ़ैसला वापस लेने का आग्रह किया. इसके बाद पेरू की पुलिस और सशस्त्र बलों ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें उन्होंने संवैधानिक आदेश के प्रति सम्मान ज़ाहिर किया.
कास्टिलो ने जुलाई 2021 में राष्ट्रपति का पद संभाला था. इसके बाद से अब तक उनके ख़िलाफ़ तीन बार महाभियोग चलाया जा चुका है.
विपक्षी पार्टियों ने बुधवार को भी आपातकालीन सत्र बुलाकर महाभियोग पर वोटिंग कराई.
पेद्रो कास्टिलो को पद से हटाने के लिए 101 वोट पड़े जबकि केवल छह लोग ही इसके ख़िलाफ़ थे. 10 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
पद से हटाए जाने के बाद कास्टिलो को पुलिस परिसर में देखा गया. बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया और संवैधानिक आदेश को न मानने के लिए उनपर विद्रोही होने का आरोप लगा.