कोरोना: अमरीका में दो लाख से अधिक संक्रमित, 4700 से अधिक की मौत

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अमरीका में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 2 लाख से अधिक हो गए हैं.

जॉन हॉप्किन्स युनिवर्सिटी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार यहां 213,000 से अधिक लोगों में कोरोना संक्रमण है जबकि 4,700 से अधिक की इसके कारण मौत हो चुकी है.

संक्रमण के आधे से अधिक मामले अकेले न्यू यॉर्क में हैं. प्रदेश के गवर्नर एंड्रू कुओमो का कहना है कि बाकी प्रदेशों में भी स्थिति भयावह हो सकती है.

इससे पहले मंगलवार वो उप राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि अमरीका में महामारी का स्वरूप कुछ वैसा ही हो सकता है जैसा इटली में हुआ था.

पूरे विश्व में कोरोना के कारण सबसे अधिक मौतें इटली में हुई हैं. इटली में कोरोना अब तक 13,155 लोगों की जान ले चुका है जबकि 110,500 से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं.

मेडिकल सप्लाई की कमी

बुधवार शाम कोरोना टास्क फोर्स से संबंधित एक प्रेस कॉन्फ्रेस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि "आप एक मास्क को स्टेरिलाइज़ कर बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं, एक एन95 मास्क को स्टेरिलाइज़ कर आप कम से कम इसे 20 बार इस्तेमाल कर सकते हैं."

उन्होंने कहा कि सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि देश में मास्क, ग्लव्स जैसे मेडिकल सुरक्षा उपकरणों की कोई कमी न हो.

ट्रंप ने कहा कि अमरीका न केवल देश के भीतर मास्क, ग्लव्स, वेंटिलेटर्स का उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रहा है बल्कि दूसरे देशों से भी जल्द से जल्द मेडिकल उपकरण लाने की भी कोशिश कर रहा है. 11 कंपनियां फिलहाल देश के लिए वेंटिलेटर्स बना रही हैं.

इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि जिनके पास मास्क नहीं हैं वो लोग मुंह ढ़कने के लिए स्कार्फ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

बुधवार को एक बार फिर ट्रंप ने स्कार्फ की हिमायत की और कहा कि कई लोग स्कार्फ इस्तेमाल कर रहे हैं और ये बेहतर तरीका है.

हाल में अमरीका में कोरोना संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों के बीच एन95 मास्क और सर्जिकल मास्क की कमी की बात भी सामने आई थी.

स्वास्थ्यकर्मियों का कहना था कि उनसे कहा गया है कि वो एक ही मास्क का बार-बार इस्तेमाल करें और ज़रूरत पड़ने पर स्कार्फ का इस्तेमाल करें.

वहीं अमरीका में फिलहाल स्वास्थ्य अधिकारी इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं कि सभी को मास्क पहनने की सलाह दी जाए या नहीं.

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार सेंटर ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रपीवेन्शन के लिए जारि किए गए एक इंटरनल मेमो में कहा गया है कि साधारण कपड़े मास्क भी वायरस को फैलने से रोकने में कारगर होगा.

इससे पहले अमरीकी सरकार ने इस बारे में अपने नागरिकों से अब तक मास्क पहन कर बाहर जाने के लिए नहीं कहा था.

ट्रंप ने कहा कि अमरीका के लिए आने वाले दिन "भयावह हो सकते हैं" और अमरीकियों को डरना नहीं चाहिए बल्कि डट कर तैयार रहना चाहिए.

एक पत्रकार के सवाल से उत्तर में उन्होंने कहा कि महामारी से निपटने के लिए सरकार अस्पताल भी बना रही है.

बुधवार को हुए संवाददाता सम्मेलन में मौजूद इंफेक्शियसस डिज़ीज़ेज़स एक्सपर्ट एंटोनी फाउची ने कहा कि "कोरोना से बचाव का सबसे कारगर तरीक इसका टीका होगा. इस पर फिलहाल काम चल रहा है और टीके का टेस्ट हो रहा है. लेकिन आम लोगों के बाज़ार में टीका आने में कम से कम एक-देढ़ साल लगने वाले हैं."

लॉकडाउन करने से ट्रंप का इनकार

पत्रकारों के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि वो फिलहाल देश में ट्रेनें और देश के भीतर चल रही उड़ानों को रद्द करने पर कोई विचार नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि ये बड़ा फ़ैसला है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. वो लोगों की अधिक जांच पर विचार कर रहे हैं.

स्वीडन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में आम जनजीवन का चलते रहना ज़रूरी है. उन्होंन कहा कि जिन देशों ने अपने देश को पूरी तरह लॉकडाउन किया है उनके सामने दूसरी तरह की समस्याएं खड़ी हो गई हैं.

स्वीडन सरकार ने देश में हाई स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए हैं और बीमारों को दूसरों से दूरी बनाए रखने के लिए कहा है लेकिन देश में लॉकडाउन नहीं किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक ट्रेडॉस एडहनॉम गीब्रिएसिस ने कहा है कि दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर वो चिंतित हैं.

उन्होंने कहा कि बीते एक सप्ताह में पूरी दुनिया में कोरोना के कारण होने वाली मौतों की संख्या में बड़ा उछाल आया है और ये लगभग दोगुना हो गई हैं.

उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस वायरस संक्रमण के मामले 1 मिलियन (10 लाख) हो जाएंगे और मौतों का आंकड़ा 50,000 तक पहुंच जाएगा.

जॉन हॉप्किन्स युनिवर्सिटी के अनुसार अब तक कोरोना के कारण पूरे विश्व में 42,075 लोगों की मौत चुकी हैं. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार अब तक दुनिया में इस कारण 40,777 लोगों की जान गई है.

विश्व स्वास्थय संगठन, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि विकासशील देश इस महामारी से कारगर रूप से निपट सकें और इसके बाद अपनी अर्थव्यवस्था को भी बचा सकें इसके लिए उनके कर्ज को माफ़ किया जाना ज़रूरी है.

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