'सूडान के पूर्व राष्ट्रपति को सऊदी अरब से मिले थे लाखों डॉलर'

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सूडान में एक जासूस ने एक कोर्ट में बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर को सऊदी अरब से लाखों डॉलर मिले हैं.

भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने अल-बशीर सोमवार कोर्ट में हाज़िर हुए, उनके वकीलों का कहना है कि यह आरोप निराधार है.

महीनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद तीन दशक तक सूडान की सत्ता में रहने वाले बशीर का अप्रैल में तख़्तापलट हो गया.

जून में अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि बशीर के घर पर अनाज की बोरियों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा पाई गई है.

रविवार को लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं और बशीर का तख़्तापलट करने वाली सैन्य नेतृत्व के बीच एक क़रार हुआ कि जल्द ही चुनाव कराए जाएंगे.

कोर्ट में सफ़ेद कपड़े और पगड़ी पहने पूर्व राष्ट्रपति सलाखों के पीछे नज़र आए. न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बशीर ने लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की.

उन्होंने कहा, "पुलिस जांचकर्ता अहमद अली मोहम्मद ने अदालत को बताया कि बशीर को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से 2.5 करोड़ डॉलर मिले हैं."

उन्होंने कहा कि 75 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति को सऊदी अरब से और भी पैसे मिले हैं.

रॉयटर्स के मुताबिक बशीर के वकील ने कहा, "बशीर को मिले अवैध लाभ के आरोपों के संबंध में कोई जानकारी या सबूत नहीं है."

क्या हैं भ्रष्टाचार के आरोप?

ओमर अल-बशीर पर विदेशी मुद्रा रखने, भ्रष्टाचार करने और अवैध तरीके से गिफ़्ट पाने से जुड़े आरोप हैं.

अप्रैल में सत्ता से उन्हें बेदख़ल किए जाने के बाद सूडान सेना के जनरल अब्देल फ़तह अल-बुरहान ने कहा था कि बशीर के घर से 11.3 करोड़ डॉलर से अधिक सूडानी पाउन्ड और विदेशी मुद्रा मिली हैं.

इस पर अदालत में सुनवाई जुलाई में ही होनी थी लेकिन तब सुरक्षा कारणों से इसे टाल दिया गया था.

बशीर पर और क्या आरोप?

मई में सूडान के सरकारी वकील ने बशीर पर लोगों को उकसाने और प्रदर्शनकारियों की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया.

अप्रैल में बशीर के सत्ता से बेदखल किए जाने के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन में मारे गए एक डॉक्टर की मौत के आरोप की जांच के बाद यह आरोप लगाया गया.

यह डॉक्टर राजधानी खार्तूम में प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों का अपने घर पर इलाज कर रहा था, तभी पुलिस ने उनकी बिल्डिंग में आंसू गैस छोड़े.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी के बताया कि डॉक्टर अपना हाथ ऊपर कर बिल्डिंग से बाहर निकले और पुलिस को बताया कि वे डॉक्टर हैं लेकिन उन्हें तुंरत गोली मार दी गई.

लोकतंत्र कैसे मिलेगा?

बशीर के ट्रायल को इस रूप में देखा जाएगा कि नए अधिकारी पिछले शासन के दौरान किए गए अपराधों से निपटने में कितना कामयाब रहा?

शनिवार को बशीर के तख़्तापलट के बाद सूडान में सत्तारूढ़ सैन्य परिषद और विपक्षी गठबंधन ने सत्ता में साझेदारी के एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

इस समझौते के मुताबिक एक नई गवर्निंग काउंसिल बनाई जाएगी जिसमें जनता के प्रतिनिधि और जनरल दोनों शामिल होंगे, ताकि देश में चुनाव कराए जा सकें और प्रजातंत्र स्थापित हो.

'हेमेती' ने दी सहमति

इस वक़्त सूडान में सबसे ताक़तवर व्यक्ति सरकारी सुरक्षा बल 'रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स' यानी 'आरएसएफ़' के कमांडर जनरल मोहम्मद हमदान 'हेमेती' डागोलो हैं और उन्होंने इस समझौते की शर्तों का पालन करने पर अपनी सहमति जताई है.

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने एक सैन्य प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस नई गवर्निंग काउंसिल के सदस्यों को सोमवार को शपथ दिलाए जाने की उम्मीद थी लेकिन लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के अनुरोध के बाद इस समारोह को स्थगित कर दिया गया.

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