चीन के सामने भारत की वायु सेना का ‘शक्ति प्रदर्शन’ - प्रेस रिव्यू

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अगले महीने अरुणाचल प्रदेश, असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भारतीय वायु सेना हवाई युद्धाभ्यास करेगी. इसमें पहली कतार के फाइटर्स, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और ड्रोन शामिल होंगे.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार ये युद्धाभ्यास ऐसे वक्त होगा जब पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद ईस्टर्न सेक्टर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों के बीच बीते 32 महीनों से रिश्ते तल्ख़ हैं.

एक से लेकर पांच फरवरी तक होने वाला ये कमांड स्तर का युद्धाभ्यास होगा जिसमें युद्ध के लिए ईस्टर्न एयर कमांड की तैयारी का टेस्ट होगा. एक सूत्र के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि इसमें रफ़ाल और सुखोई 30एमकेआई फ़ाइटर जेट जैसे ईस्टर्न सेक्टर के सभी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा. ये जेट हासिमारा, तेज़पुर और चाबुआ एयर फ़ील्ड से उड़ान भरेंगे.

अरुणाचल प्रदेश के तवांग के यांग्त्से में दोनों देशों के बीच हुई झड़प के बाद बीते साल दिसंबर नौ को एयर फोर्स ने पूर्वोत्तर में दो दिनों का युद्धाभ्यास किया था. लेकिन सूत्र के अनुसार अगले महीने होने वाला युद्धाभ्यास बड़े स्तर पर होगा और इसमें सी-10जे सुपर हर्क्युलिस, चिनूक और अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों जैसे कई और तरह के प्लेटफॉर्म भी शामिल किए जाएंगे.

अख़बार लिखता है कि लतागार तीसरे साल पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ सटी सीमा के पास चीन ने 50 हज़ार सैनिकों को तैनात किया है और यहां बड़ी मात्रा में भारी हथियार भी रखे हैं. अब तक डेपसांग और डेमचोक जैसी रणनीतिक तौर पर अहम जगहों में सेना के डिस्इन्गेजमेन्ट पर भारत के साथ बात करने के लिए भी चीन नहीं तैयार हो रहा.

इसके साथ ही सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के पास एलएसी के पास चीन ने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है. उसने 4,500 सैनिकों की दो कंबाइन्ड आर्म्स ब्रिगेड को टैंकों और भारी हथियारों के साथ ईस्टर्न सेक्टर में तैनात किया है.

भारत के साथ सटी 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर चीन ने जगह-जगह पर अपनी वायु सेना की गतिविधि बढ़ा दी है. होटन, काशगर, गारगुंसा, शिगात्से जैसे वायु सेना के ठिकानों पर उसने उड़ानपट्टी को बढ़ाया है, बंकर बनाए हैं, ईंधन रखने के डिपो बनाए हैं और यहां फ़ाइटर जेट, बॉम्बर जेट और टोही विमानों की संख्या बढ़ाई है.

डोकलाम के पास जहां सिक्किम, भूटान और तिब्बत की सीमा मिलती है उसने भूटान के क्षेत्र के नज़दीक उसने इन्फ्रास्चर निर्माण का काम बढ़ाया है. ये भी भारत के लिए चिंता का विषय है. साल 2017 में जोम्फेरी इलाक़े में सड़क बनाने की चीन की कोशिश को रोकने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था जो 73 दिनों तक रहा.

अल-सीसी का भारत दौरा, एजेंडे में क्या है?

अगले सप्ताह मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तेह अल-सीसी भारत पहुंचने वाले हैं. वो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार उम्मीद की जा रही है कि इस दौरान भारत और मिस्र के बीच रक्षा, सुरक्षा और साइबर सुरक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में क़रीब दर्जनभर समझौते हो सकते हैं.

रक्षा और कृषि के मामले में मिस्र भारत का सहयोगी बनना चाहता है, और भारत से एलसीए तेजस, आकाश जैसी मिसाइलें, डीआरडीओ का स्मार्ट एंटी एयरफ़ील्ड वीपन और और रडार जैसे रक्षा उपकरण खरीदना चाहता है.

कभी सेना प्रमुख रहे अल-सीसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक चुनौतियों से पूरी तरह वाकिफ़ हैं और मिस्र की सेना को और मज़बूत करना चाहते हैं.

अख़बार लिखता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में मज़बूत संबंधों को दिखाते हुए मिस्र का एक सैन्य दस्ता गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हो रहा है. भारत में निर्मित रक्षा उपकरणों में अल-सीसी की दिलचस्पी के कारण इस साल बेंगलुरु के येलाहान्का में होने वाले एरो-इंडिया 2023 में शामिल होने के लिए भी मिस्र को निमंत्रण दिया गया है.

मिस्र ने भी भारत को हर दो साल में एक बार होने वाले अमेरिका और मिस्र के साझा युद्धाभ्यास में शामिल होने के लिए न्योता दिया है. ये युद्धाभ्यास इस साल सितंबर में मिस्र में होगा.

अख़बार लिखता है कि माना जाता है कि चरमपंथ की चुनौती से जूझ रहे मिस्र का अल-सीसी ने सख्ती से सामना किया है और भारत के लिए उसके साथ हाथ मिलाना इस मुश्किल से निपटने में भारत की मदद करेगी. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर भी समझौता हो सकता है.

मिस्र खाद्य संकट से जूझ रहा है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण और भी गहरा गया है. वो भारत से गेंहूं खरीदना चाहता है और माना जा रहा है कि अल-सीसी की यात्रा के दौरान इस पर चर्चा हो सकती है.

अख़बार लिखता है कि अल-सीसी इससे पहले बीते नौ सालों में दो बार भारत आ चुके हैं, लेकिन पहली बार वो बतौर मुख्य अतिथि गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे. भारत और मिस्र दोनों इस साल कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत के 75 साल मना रहे हैं, ऐसे में अल-सीसी का दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

हिरासत में मौत पर हाई कोर्ट ने कही महत्वपूर्ण बात

महाराष्ट्र सरकार को कथित तौर पर हिरासत में मारे गए एक व्यक्ति के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने परिजनों को 15 लाख रुपये से अधिक देने का आदेश दिया है.

जनसत्ता अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार जस्टिस कंकनवाड़ी और जस्टिस अभय वाघवासे की औरंगाबाद पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हिरासत में मौत सभ्य समाज में सबसे बुरे अपराधों में से एक है.

कोर्ट ने कहा कि अधिकारों की आड़ में पुलिस आम नागरिकों को अमानवीय तरीके से परेशान नहीं कर सकती.

अख़बार लिखता है कि कोर्ट ने कहा कि पुलिस के पास लोगों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और अपराध रोकने के लिए ताकत है लेकिन यह असीमित नहीं है. इस ताकत की आड़ में पुलिसकर्मी किसी आम नागरिक के साथ अमानवीय तरीके से अत्याचार या व्यवहार नहीं कर सकते.

कोर्ट ने कहा, "नागरिकों का जीवन बचाना सरकार का काम है और अगर सरकार का कोई नुमाइंदा सत्ता की आड़ में अत्याचार करता है तो उसे इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए उस नागरिक को मुआवज़ा देना होगा."

प्रदीप नाम के एक व्यक्ति की मां ने कोर्ट में याचिका दी थी और आरोप लगाया था कि दो पुसिलकर्मियों क मारपीट के कारण 23 साल के उनके बेटे की मौत हो गई थी. उन्होंने पुलिस से 40 लाख रुपये के मुआवज़े की मांग की थी और दोषी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.

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