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कोविड-19 का टीका भारत में आपको खुले बाज़ार में कब से मिलने लगेगा - प्रेस रिव्यू
भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो चुकी है. 16 जनवरी से भारत में टीके लगने शुरू हो गए थे. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्राथमिकता के स्तर पर पहले तीन करोड़ स्वास्थकर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जा रही है.
लेकिन एक बड़ा सवाल ये था कि आख़िर आम आदमी इन टीकों को कब ले पाएगा?
बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर के अनुसार, अभी तक टीकाकरण के लिए कम लोग आगे आए हैं इसलिए केंद्र सरकार मार्च या अप्रैल तक सामान्य बाज़ार में टीकों को उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है. अख़बार के मुताबिक़, सरकार टीकाकरण की दर को बढ़ाना चाहती है इसलिए वो जल्द से जल्द बाज़ार में वैक्सीन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है.
इन टीकों की स्टेबिलिटी छह महीने है. यानी ये टीके छह महीने तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं. अख़बार ने सूत्र के हवाले से लिखा है कि जनवरी महीने में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के पास कोविड वैक्सीन की क़रीब 10 करोड़ खुराक थीं.
भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्रगाण करते हुए कई पड़ोसी देशों को कोविशील्ड यानी कोरोना की वैक्सीन भेजी है. एक बड़ी चुनौती इन वैक्सीन को छह महीने के भीतर इस्तेमाल कर लेने की है.
श्रीलंका ने भारत के साथ पोर्ट डील को किया रद्द
भारत को श्रीलंका की राजपक्षे सरकार से झटका लगा है.
राजपक्षे सरकार अपने देश में पोर्ट निजीकरण के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन के ख़तरे से जूझ रही है. ऐसे में उसने भारत के साथ साल 2019 में हुई एक पोर्ट डील को रद्द कर दिया है.
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, श्रीलंका ने कोलंबो पोर्ट पर भारत और जापान के लिए ईस्ट कंटेनर टर्मिनल विकसित करने के लिए एक समझौता किया था, जिसे अब उसने रद्द कर दिया है. इस पोर्ट में अडानी ग्रुप का बतौर इंवेस्टर शामिल था.
हालांकि, श्रीलंका ने भारत को एक दूसरा ऑफ़र ज़रूर दिया है. इसके तहत श्रीलंका ने वेस्ट कंटेनर टर्मिनल विकसित करने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव में भारत के साथ जापान भी शामिल है.
सरकार का कहना- एक किसान ने दिल्ली बॉर्डर पर की आत्महत्या, किसान संगठनों ने कहा 10 ने ली जान
किसान संगठनों का दावा है कि किसान आंदोलन में प्रदर्शन के दौरान अभी तक दस किसानों ने अपनी जान ले ली. वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि अभी तक बॉर्डर पर एक ही किसान ने आत्महत्या की है.
द हिंदू की ख़बर के अनुसार, केंद्र सरकार का कहना है कि बीते साल सितंबर से दिसंबर के बीच दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे 39 किसानों के खिलाफ़ केस दर्ज किया गया था.
सरकार ने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस के अनुसार अभी तक दिल्ली सीमा पर हो रहे प्रदर्शन में एक शख़्स ने आत्महत्या कर ली थी.
हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा के आंकड़ों के मुताबिक़, किसान आंदोलन में अब तक कम से कम 10 लोगों ने आत्महत्या की है. उनमें से कई ने तो अपने पीछे सुसाइड-नोट भी छोड़ा था, जिसमें उन्होंने काले क़ानून को अपने मरने की वजह बताया था.
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