यूपी के महोबा में व्यापारी की हत्या और एसपी का निलंबन: अब तक हमें जो मालूम है

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले में खनन व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद कबरई क़स्बे में तनाव बना हुआ है. क़स्बे में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है और पुलिस महानिदेशक ने इस पूरे मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है.

इस घटना के बाद महोबा के डीएम अवधेश तिवारी को हटा दिया गया है और उनकी जगह सत्येंद्र कुमार को डीएम बनाया गया है.

पत्थर की खदानों के लिए देश भर में मशहूर महोबा ज़िले के कबरई क़स्बे में आठ सितंबर को एक खनन व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने महोबा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए अपनी जान को ख़तरा बताया था.

वीडियो वायरल होने के कुछ ही घंटे बाद इंद्रकांत त्रिपाठी को गोली मारे जाने की सूचना भी आ गई. बताया जा रहा है कि वीडियो जारी करने से पहले इंद्रकांत त्रिपाठी ने कथित तौर पर रिश्वत मांगने की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की थी.

इंद्रकांत त्रिपाठी को गोली लगने के बाद महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उनकी संपत्तियों की जांच सतर्कता विभाग से कराए जाने के आदेश दे दिए गए. इस बीच, गर्दन में गोली लगने के बाद इंद्रकांत त्रिपाठी को कानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ रविवार को उनकी मौत हो गई.

तत्कालीन एसपी पर आरोप

44 वर्षीय व्यवसायी इंद्रकांत त्रिपाठी पर हमले और एसपी मणिलाल पाटीदार के निलंबन के दो दिन बाद इंद्रकांत त्रिपाठी के भाई रविकांत त्रिपाठी ने पाटीदार, कबरई थाने के निलंबित थानाध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला और दो अन्य लोगों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास और ज़बरन वसूली समेत कई अन्य धाराओं में एफ़आईआर दर्ज कराई.

रविवार को इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद एफ़आईआर में हत्या के प्रयास की जगह हत्या की धारा जोड़ने की मांग की गई, लेकिन अभी तक एफ़आईआर में तब्दीली नहीं हुई है.

हालाँकि घटना के बाद कबरई पहुँचे प्रयागराज ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रेम प्रकाश ने मीडिया को बताया था कि पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार और सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमा हत्या के मुक़दमे में तब्दील किया जा रहा है.

उनका कहना था, "पूर्व एसपी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए महोबा तलब किया गया है. इसके अलावा अन्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की छह टीमें बनाई गई हैं जिन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है. पुलिस जल्द ही सभी अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लेगी."

इस बीच, राज्य सरकार ने मामले की जाँच के लिए मंगलवार को एसआईटी गठित कर दी है.

राज्य के पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी के मुताबिक, "महोबा में व्यवसायी के मौत के कारणों की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है जो सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी. इस विशेष जाँच टीम का नेतृत्व वाराणसी रेंज के आईजी विजय सिंह मीणा करेंगे और डीआईजी शलभ माथुर और अशोक त्रिपाठी इसके सदस्य होंगे."

मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं

इस मामले में एफ़आईआर भले ही 11 सितंबर को दर्ज की गई, लेकिन अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. वहीं इंद्रकांत त्रिपाठी के परिजनों में इस बात को लेकर भी ग़ुस्सा है कि उनके कुछ परिचितों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. इसके बाद से कबरई में माहौल तनावपूर्ण हो गया.

इंद्रकुमार त्रिपाठी के बड़े भाई रविकांत त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया, "भाई के अंतिम संस्कार से लौटते समय पुलिस उनके व्यावसायिक सहयोगी पुरुषोत्तम सोनी को रास्ते से ज़बरन उठाकर अपनी जीप में बैठाकर ले गई और फिर थाने में बंद कर दिया. पुलिस अभी भी हम लोगों का उत्पीड़न कर रही है. पुलिस वाले निलंबित पुलिस अधीक्षक का बचाव कर रहे हैं और हमारा उत्पीड़न कर रहे हैं. हमें परेशान कर रहे हैं."

रविकांत कहते हैं, "तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार ने उनके भाई से छह लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी और नहीं देने पर उसे झूठे मुक़दमे में फँसा कर जेल भेजने की धमकी दी थी. भाई पर हमला सोशल मीडिया पर उस एलान के कुछ घंटों बाद हुआ है, जिसमें उसने कहा था कि वह अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सभी जानकारियों को सार्वजनिक करेगा. मुझे संदेह है कि भंडाफोड़ होने के डर से अभियुक्तों ने उनके भाई पर हमले की योजना बनाई."

मृतक इंद्रकांत त्रिपाठी महोबा में ख़नन विस्फोटकों की सप्लाई करते थे. इस व्यवसाय में उनके भाई रविकांत त्रिपाठी समेत कुछ अन्य लोग भी पार्टनर थे.

कबरई के ही रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज परिहार बताते हैं, "कबरई में पहाड़ों की कटाई होने के कारण बड़ी संख्या में क्रशर प्लांट लगे हैं. पहाड़ों को तोड़ने के लिए डेटोनेटर, जिलेटिन की छड़ें और ऐसे ही तमाम विस्फोटकों का उपयोग होता है. इस व्यवसाय में यहाँ के कई लोग लगे हैं. सरकार की ओर से इसका लाइसेंस दिया जाता है."

पंकज परिहार लाइसेंस के पहलू पर बताते हैं, "लेकिन लाइसेंस की सीमा से अधिक की सप्लाई आमतौर पर सभी व्यवसायी करते हैं और उसके लिए पुलिस और विभाग के अधिकारियों को मोटा पैसा देते हैं. ख़नन व्यवसाय में अवैध कारोबार किसी से छिपा नहीं है और बिना पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के यह संभव नहीं है."

पंकज परिहार कहते हैं कि व्यवसायियों और पुलिस-प्रशासन के बीच कथित लेन-देन का यह खेल नियमित रूप से चलता रहता है, लेकिन लॉकडाउन के चलते कुछ व्यवसायी ऐसा करने में असमर्थ थे, जिसके चलते उन्हें पुलिस वालों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा.

इस बीच, इस मामले में राजनीतिक बयानबाज़ी भी जमकर हो रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह इंद्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड में दिखावटी निलंबन की लीपापोती नहीं बल्कि गिरफ़्तारी करे.

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, "महोबा के 'इंद्रकांत त्रिपाठी सरकारी हत्याकांड' में दिखावटी निलंबन की लीपापोती न करके सरकार गिरफ़्तारी करे. आरोपित पुलिस कप्तान व ज़िलाधिकारी के ख़िलाफ़ इतनी ढिलाई क्यों? पुलिस किस अधिकार से जन प्रतिनिधियों को जनता से मिलने व उनके मुद्दे उठाने से रोक रही है? क्या कोई हिस्सेदारी है?"

वहीं सोमवार को इंद्रजीत त्रिपाठी के घर संवेदना जताने जा रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और शाम को उन्हें रिहा किया गया.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर सवाल उठाए हैं.

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