कोरोना वायरस: नोएडा में हॉटस्पॉट सील क्यों कर रही है योगी सरकार

    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा समेत राज्य के 15 ज़िलों के हॉटस्पॉट इलाक़ों को 15 अप्रैल तक सील करने का फ़ैसला किया है.

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या फ़िलहाल 343 है. इनमें से 58 मामले नोएडा यानी गौतमबुद्ध नगर के हैं.

नोएडा मंगलवार से चर्चा में बना हुआ है. यहां के एक इलाक़े से एक साथ 315 लोगों को जाँच के लिए ले जाया गया है.

नोएडा की जेजे कोलॉनी के इन 315 लोगों को ग्रेटर नोएडा स्थित एक सेंटर में निगरानी के लिए रखा गया है.

घर में काम करने वाली महिला संक्रमित

ग्रेटर नोएडा में कोविड रिस्पॉन्स टीम के नोडल अफ़सर नरेंद्र भूषण के मुताबिक़, सीज़ फ़ायर कंपनी के कर्मचारियों के घरों में काम करने वाले कई लोग जेजे कॉलोनी में रहते हैं.

सीज़ फ़ायर वही कंपनी है जिसके 16 कर्मचारियों के कोरोना वायरस से संक्रमित मिलने के बाद कंपनी को सील कर दिया गया था.

यहां के कर्मचारियों से वायरस कई दूसरे लोगों में भी पहुंचा.

नोएडा के क़रीब 58 मामलों में से 39 इससे जुड़े हैं. सीज़ फ़ायर कंपनी के कर्मचारी के घर में काम करने वाली एक महिला भी कोरोना पॉज़िटिव मिली, जो जेजे कॉलोनी की रहने वाली हैं.

यहां अब तक चार मामले सामने आ चुके हैं.

गौतम बुद्ध नगर के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सुहास एल वाय ने साफ़ किया कि इस इलाक़े में कोई नया मामला नहीं मिला है, पुराने मामलों को देखते हुए, यहां 'क्लस्टर कंटेनमेंट' के तहत एहतियाती क़दम उठाए गए और लोगों को शिफ़्ट किया गया.

नरेंद्र भूषण ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमारी टीम ने जेजे कॉलोनी में पहुंचकर देखा कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग का लेवल बहुत कम है. बहुत से लोग पास-पास एक ही जगह रहते हैं. जिसके बाद फ़ैसला किया गया कि इन्हें दूसरी जगह ले जाकर निगरानी में रखा जाएगा."

वहीं, गौतमबुद्ध नगर के ज़िलाधिकारी सुहास एल वाय ने बीबीसी हिंदी को बताया कि फ़िलहाल इन सभी लोगों को ऑब्ज़र्वेशन में रखा गया है.

वे कहते हैं, "इन लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग की जा रही है. स्क्रीनिंग के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ तय करेंगे कि किन-किन लोगों की टेस्टिंग करानी है, उनके तुरंत सैंपल लेकर टेस्ट कराए जाएंगे. इसके अलावा जिनको क्वारंटीन करके रखे जाने की ज़रूरत है, उन्हें किसी अलग जगह रखा जाएगा. बाक़ी को डिस्चार्ज करके होम क्वारंटीन कराएंगे."

अधिकारियों के मुताबिक़ देखा जा रहा है कि क्या किसी में कोई लक्षण है या कोई हाई रिस्क ग्रुप में हैं, यानी किसी को हाई बीपी जैसी बीमारियां हैं, ऐसे लोग मिलने पर उनका सैंपल टेस्ट के लिए भेजा जाएगा. बाक़ी स्वस्थ लोगों को दो-तीन दिन में घर वापस भेज दिया जाएगा.

प्रशासन ने जेजे कॉलोनी और इसके आस-पास के इलाक़ों में सेनेटाइज़ेशन बढ़ा दिया है.

नोएडा में कोरोना की स्थिति

नोएडा शुरुआत से ही कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट रहा है.

यहां तेज़ी से मामले बढ़े, जिनमें ज़्यादातर लोग विदेशों से घूमकर आए लोग थे.

मामले लगातार बढ़ते रहने से नाराज़ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां के अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी.

इसके बाद ज़िलाधिकारी को बदल दिया गया था. साथ ही लखनऊ से कुछ और अधिकारियों को भी स्थिति संभालने के लिए भेजा गया था.

इसके बाद नोएडा में कोरोना को लेकर नई रणनीति अपनाई गई और स्थिति को बहुत हद तक क़ाबू में कर लिया गया है.

ये ऐसे समझा जा सकता है कि शनिवार से लगातार तीन दिन नोएडा में कोरोना का कोई नया मामला सामने नहीं आया था और सिर्फ़ मंगलवार को एक मामला सामने आया है.

नई रणनीति

नरेंद्र भूषण बताते हैं कि उनकी पोस्टिंग के बाद रणनीति में बदलाव किए गए और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए छह घंटे की समय सीमा निर्धारित की गई.

जब भी नोएडा में कोई कनफर्म मरीज़ निकलता है, तो तुरंत कॉल सेंटर, एरिया सर्विलांस टीम और रेपिड रिस्पॉन्स टीम को अलर्ट कर दिया जाता है.

कॉल सेंटर से मरीज़ को तुरंत फ़ोन कर पूछा जाता है कि उनके परिवार में कितने लोग हैं, उनके घर में कौन काम करता है, उनका ड्राइवर कौन है और वो पिछले दिनों वो किन-किन लोगों के संपर्क में आए.

नरेंद्र भूषण बताते हैं, "ये तीनों टीमें छह घंटे में ये जानकारी निकाल लेती हैं कि इनके साथ वाले कौन लोग थे, जो रिस्क में है. क्योंकि हम उन्हें मूव करने से नहीं रोकेंगे तो वो अनजाने में दूसरों में वायरस फैला देंगे."

फाइव टाइम पीरिएड स्ट्रेटेजी

इसके अलावा पूरे गौतमबुद्ध ज़िले में कोरोना वायरस से निपटने के लिए फाइव टाइम पीरिएड रणनीति अपनाई गई है.

इसमें पाँच स्टेज होते हैं. पहला स्टेड एक से सात अप्रैल तक था, जिसे इमिडिएट और अर्जेंट स्टेज कहा जाता है.

दूसरा आठ से 14 अप्रैल तक, जो नियर इमिडिएट स्टेज है.

तीसरी स्टेज अप्रैल के आख़िर में आएगी. इसे शॉर्ट टर्म कहते हैं.

चौथी स्टेज पूरी मई चलेगी, जिसे मीडियम टर्म कहा जाता है.

उसके बाद पाँचवी स्टेज पूरे जून चलेगी, जिसे लॉन्ग टर्म कहेंगे.

इस रणनीति के तहत प्रशासन ये अनुमान लगाता है कि इस हफ़्ते कितने मरीज़ आ सकते हैं. उसके हिसाब से तैयारी की जाती है.

अधिकारियों के मुताबिक़, "प्रशासन पाँच पैरामीटर पर रोज़ मॉनिटरिंग करता है. इसके हिसाब से हम अपनी रिक्वायरमेंट को रिवाइज़ भी करते हैं. लॉजिस्टिक का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, पैनिक ना हो."

नरेंद्र भूषण के मुताबिक़, हालात को देखते हुए इमीडिएट और अर्जेंट वाली स्टेज को शिफ़्ट भी किया जा सकता है. "जैसे फिलहाल शिफ़्ट कर दिया गया है. अब 7 अप्रैल से 14 अप्रैल को पहली स्टेज बना दिया गया है, फिर 15 -21 अप्रैल नियर इमीडिएट हो जाएगी."

उनके मुताबिक़, इसके हिसाब से पूरी तैयारी की जाती है. जैसे कितने बेड की ज़रूरत होगी, आइसोलेशन कैपेसिटी, क्वारंटीन कैपेसिटी तय की जाती है, मैन पॉवर बढ़ाई जाती है, डॉक्टर्स के लिए पीपीई का इतंज़ाम किया जाता है, टेस्टिंग किट तैयार की जाती हैं.

पूरे ज़िले के लिए 300 सर्विलांस कन्टेनमेंट टीमें भी बनाई गई हैं. जो एपिसेंटर के आस-पास के इलाकों का दौरा कर रही हैं. इन टीमों में स्वास्थ्य, रेवेन्यू और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं. हर टीम में तीन सदस्य हैं. इन टीमों ने मंगलवार से ही काम शुरू किया है.

'जान सबकी क़ीमती'

डीएम सुहास कहते हैं कि हमारी मोबाइल टीमें जेजे कॉलोनी के दूसरे इलाक़ों से भी सैंपल ले रही हैं.

नोडल अफ़सर नरेंद्र भूषण कहते हैं कि चाहे कोई अमीर हो या ग़रीब, सबकी जान की क़ीमत बराबर है. "झु्ग्गी बस्तियां हमारी प्रोफाइलिंग में हाई रिस्क ग्रूप में आते हैं, यहां के लोगों का आसानी से कोरोना वायरस की चपेट में आने का ख़तरा होता है, इसलिए हमारा फोकस ऐसे इलाक़ों पर ज़्यादा है. ज़िले में कई जगह प्रवासी मज़दूर भी रहते हैं, कई बार वो एक घर में बीस-बीस की संख्या में रहते हैं. उनके घरों को ख़ास तौर पर सेनेटाइज़ कराया जा रहा है."

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