कोरोना: निज़ामुद्दीन के तीन किलोमीटर दायरे में सभी की होगी जांच - प्रेस रिव्यू

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दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए सैंकड़ों लोगों के कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव पाए जाने के बाद सरकार ने कहा है कि इस इलाक़े के तीन किलोमीटर दायरे में रहने वाले सभी लोगों की जांच होगी.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार गुरुवार से मरकज़ इमारत के तीन किलोमीटर और निज़ामुददीन के पांच किलोमीटर के दायरे के भीतर रहने वाले हर व्यक्ति की जांच होगी. जिन लोगों में मामूली खांसी जैसे लक्षण भी पाए गए उनका इलाज होगा.

स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से अख़बार लिखता है कि स्वास्थ्यकर्मी हर घर जाकर लोगों की जांच करेंगे और इस पूरे इलाक़े को पूरी तरह लॉकडाउन करेंगे.

माना जा रहा है कि निज़ामुद्दीन एकमात्र वो जगह है जहां से सबसे अधिक कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ पाए गए हैं.

यहां से कुल 2346 लोगों को निकाला गया है. इनमें खांसी, बुखार जैसे लक्षणों से पीड़ित 536 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और बाकी 1810 लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है.

'मामूली लक्षण हुए तो अस्पताल में नहीं रहना होगा'

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार अस्पतालों पर दबाव कम करने के लिए दिल्ली सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि मामूली लक्षण वाले मरीज़ों को घर पर ही रहने के लिए कहा जाए.

सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि फ़िलहाल सभी पॉज़िटिव लोगों को अस्पताल में रखा जा रहा है लेकिन जिन लोगों में मामूली लक्षण हैं उन्हें घर पर ही क्वारंटीन कर फ़ोन के ज़रिए उनकी निगरनी करने पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है.

इसे न केवल संक्रमितों के संपर्क में स्वास्थ्यकर्मी कम आएंगे बल्कि ज़रूरतमंदों को अस्पताल में बेहतर इलाज भी मिल पाएगा.

राजधानी दिल्ली में छह डॉक्टर संक्रमित

देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले तीन और डॉक्टर कोरोना वायरस पॉज़िटिव पाए गए हैं. इसके साथ ही दिल्ली में अब तक कुल छह डॉक्टर संक्रमित पाए गए हैं.

एशियन एज ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि बुधवार को एक डॉक्टर के पॉज़िटिव पाए जाने के बाद ही दिल्ली प्रदेश कैंसर इंस्टीट्यूट को सैनिटाइज़ करने के लिए बंद कर दिया गया है. डॉक्टर का इलाज चल रहा है और उसके संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारंटीन में जाने के लिए कहा गया है.

वहीं, सरदार वल्लभबाई पटेल अस्पताल में काम करने वाले एक डॉक्टर और सफ़दरजंग अस्पताल में काम करने वाली उनकी पत्नी भी कोरोना संक्रमित हैं.

इससे पहले मोहल्ला क्लीनिक के दो डॉक्टर और प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले एक डॉक्टर का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आया था.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा है कि कोरोना वायरस महामारी से लड़ते हुए अगर किसी स्वास्थ्यकर्मी की मौत हो जाती है तो प्रदेश सरकार उनके परिवार को एक करोड़ रुपये देगी.

जम्मू-कश्मीर में इन लोगों को मिलेगा मूल निवासी का दर्जा

जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के क़रीब आठ महीनों बाद केंद्र सरकार ने वहां के मूल निवासियों के संबंध में नियम जारी किए हैं.

जनसत्ता अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार नए नियमों के अनुसार जो कोई बीते 15 साल से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं उन्हें यहां के मूल निवासी का दर्जा दिया जाएगा. ये प्रावधान जम्मू कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2020 नाम के एक गजट अधिसूचना के माध्यम से किए गए हैं.

जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने इसे यहां के लोगों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कना कहा है.

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर लिखा, "इस क़ानून को लाने का समय मन में शंका पैदा करता है. जिस वक़्त सारी कोशिशें कोरोना वायरस महामारी से जूझने में लगनी चाहिए उस वक़्त सरकार जम्मू कश्मीर के लिए मूल निवासी क़ानून ला रही है. पहले चोट पहुंचाकर वो फिर उस पर नमक लगा रही है."

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के ट्विटर पर उनकी तरफ़ से लिखा गया है, "जम्मू-कश्मीर का ये नया क़ानून अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के साथ ही शुरू हुआ था ताकि यहां की जनसंख्या को बदला जा सके. जब पूरी दुनिया एक बड़ी महामारी से जूझ रही है तब सरकार यहां के लोगों की सहमति को दरकिनार कर बड़े फै़सले ले रही है."

बीते साल 5 अगस्त को सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया था.

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