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कोरोना: बिहार में 'बाहर से आने वालों की सूचना देने पर हत्या ?'
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, बिहार से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस बिहार में "रंजिश का वायरस" भी बन गया है.
लॉकडाउन के दरम्यान बिहार में बाहर से आ रहे लोगों और स्थानीय लोगों के बीच मनमुटाव और विवाद की खबरें कई ज़िलों से आई हैं.
बाहर से आए लोगों को स्वीकार करने में स्थानीय लोग संकोच कर रहे हैं. इसलिए बिहार सरकार ने बाहर से आए हर शख्श की क्वरंटीन की व्यवस्था उसके निकटवर्ती स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र अथवा अस्पताल में की है.
लेकिन, बिहार की राजधानी पटना से लगभग 150 किमी दूर सीतामढ़ी के रुनीसैदपुर थाना अंतगर्त मधौल गांव में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसमें कथित रूप से 20 साल के बबलू नाम के युवक की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसने महाराष्ट्र से गांव आए कुछ लोगों के बारे में जिला प्रशासन को बता दिया था.
रुनीसैदपुर थाने में दर्ज एफ़आईआर के अनुसार युवक के पिता विनोद सिंह ने मुंबई से 20 मार्च को गांव लौटे मुन्ना कुमार महतो, सुधीर कुमार महतो और दोनों के परिजनों के ऊपर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाया है.
बबलू के बड़े भाई गुड्डु सिंह ने बीबीसी को बताया, "महाराष्ट्र से आने के कारण उन लोगों के बारे में भाई ने कंट्रोल रूम को बताया था. 24 मार्च को उन दोनों को मेडिकल टीम उठा ले गई और जांच कराई गई थी. जांच के बाद उन्हें होम क्वरंटीन पर भेज दिया गया था. जब उन लोगों को पता लगा कि मेरे भाई ने ही सूचना दी थी, तभी से वे इसके दुश्मन बन गए थे. रविवार की शाम को अकेला पाकर उन लोगों ने उसे पकड़ लिया और पीटने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी."
दो गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच
आरोपों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों नामजद लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
रुनीसैदपुर के थाना प्रभारी ने बीबीसी से कहा, "आरोपों के अनुसार हमनें कंट्रोल रूम की डायरी खंगाली है. लेकिन उसमें शिकायतकर्ता के रूप में उस युवक का नाम दर्ज नहीं है, जिसकी हत्या हुई है. ये भी हो सकता है कि युवक ने फोन करके सूचना दी हो. इसलिए सीडीआर की जांच के बाद ही यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि उस युवक ने सूचना दी थी या नहीं!"
पुलिस के मुताबिक युवक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गहरे जख्मों के निशान नहीं मिले हैं.
थाना प्रभारी कहते हैं, "अभी तक हमारी जांच में यही निकलकर आया है कि युवक और आरोपी पक्ष के बीच मारपीट गांव में ही हुई है. लेकिन किस बात पर हुई है, यह जांच का विषय है. जहां तक आरोपियों की बात है तो वो मुंबई से हाल ही में लौटे हैं और सूचना मिलने पर ही उनकी जांच कराई गई, ये सच है."
कोरोना को लेकर बने सीतामढ़ी के जिला कंट्रोल रूम की डायरी के मुताबिक दोनों आरोपियों जो महाराष्ट्र से लौटे थे, उनके बारे में सूचना देने वाले का नाम "ओम भारती" के रूप में दर्ज है.
क्या ओम भारती के जरिए गयी थी सूचना?
सीतामढ़ी के रहने वाले स्थानीय पत्रकार दीपक शास्त्री बताते हैं, "ओम भारती जदयू के स्थानीय नेता हैं. हो सकता है कि बबलू ने पहले ओम भारती को ही सूचना दी होगी, क्योंकि स्थानीय राजनीति करने के के कारण लोग उन्हें जानते हैं."
हमने ओम भारती से भी बात की. वे कहते हैं, "मेरी पत्नी जिला पार्षद हैं. जन प्रतनिधि होने के नाते उन्हें ऐसी सूचनाएं लगातार मिल रही हैं. उन्हीं में से मिली किसी सूचना पर हमने जिला प्रशासन को सूचित किया होगा और इसलिए हमारा नाम दर्ज है. बाकी इस घटना से मेरा कोई वास्ता नहीं है ना ही मैं उस युवक को जानता हूं."
पुरानी रंजिश की बात
घटना को लेकर सीतामढ़ी के एसपी विकास वर्मन ने बीबीसी को बताया,"अब तक की जांच में दोनों पक्षों की पुरानी रंजिश की बात ही सामने आ रही है. कोरोना से लेकर इसका कोई संबंध नहीं दिखता सिवाय आरोपों के. हालांकि, हमलोग हत्या की जांच में अभी भी जुटे हुए हैं."
सीडीआर निकाल कर जांच करे पुलिस
लेकिन हत्या की जांच में सीतामढ़ी पुलिस के आपसी रंजिश के तर्क को सिरे से ख़ारिज करते हुए बबलू के परिजनों का कहना है कि पुलिस जानबूझकर इस मामले को घुमा रही है.
बड़े भाई गुड्डू कुमार ने कहा, "पुलिस मामले की लीपापोती कर रही है. हमारी आरोपियों से कोई पुरानी रंजिश नहीं है. सच यह है कि पुलिस वो बयान नहीं दर्ज कर रही है जो हम लोग कह रहे हैं."
गुड्डू सीडीआर (कॉल डीटेल रिकार्ड) निकाल कर जांच करने मांग करते हुए कहते हैं, "चूंकि भाई का फ़ोन भी उस घटना के बाद से गायब है, इसलिए हमारे पास सुबूत नहीं हैं कि हम बता सकें. लेकिन, हम दावे के साथ कह सकते हैं कि उसने 24 तारीख की शाम को छह बजे के आसपास कंट्रोल रूम को फ़ोन किया था. तब मैं खुद उसके साथ था. मैं भी 14 मार्च को ही पुणे से लौटा हूं, सुबह ही भाई ने मेरी भी जांच खुद ले जाकर कराई थी. "
वे कहते हैं, "मेडिकल टीम साढ़े आठ बजे के करीब आयी. वह उस टीम को लेकर आरोपियों के घर तक गया था. ख़ुद ही जगाकर उन्हें बाहर बुलाया और जांच के लिए भिजवाया. उसी दिन आरोपियों के घर की औरतों ने भाई के साथ गाली-गलौज भी की थी. यह पूरे गांव ने देखा था."
पुलिस को इंतजार अब युवक के मोबाइल की सीडीआर का है जिससे पता चल सके कि क्या उसने सच में बाहर से आने वालों के बारे में कंट्रोल रूम को सूचना दी थी?
क्वरंटीन किए जाने पर पत्थरबाज़ी
बिहार के जहानाबाद में भी सोमवार को बाहर से आए लोगों के साथ प्रशासन की झड़प हुई.
जहानाबाद के दयाली बिगहा गांव में दिल्ली से लौटे कुछ लोगों की सूचना पाकर प्रशासन की टीम दल-बल के साथ उन्हें होम क्वरंटीन करने गई थी.
इसी बीच बाहर से आए लोगों के परिजनों ने बीडीओ डॉ अजय कुमार पर किसी बात को लेकर हमला कर दिया. डॉ अजय के मुताबिक थोड़ी ही देर में लोग इतनी पत्थरबाजी करने लगे कि उन्हें लौटने पड़ा, उनकी गाड़ी को भी नुकसान हुआ.
बहरहाल में बिहार में लॉकडॉउन के दौरान लाखों की संख्या में अप्रवासी लौटकर आए हैं. जिनके आने से राज्य पर अचानक एक अतिरिक्त भार पड़ गया है.
बाहर से आए लोगों के लिए राज्य भर में राहत व आपदा केंद्र चलाए जा रहे हैं.
बिहार सरकार ने घोषणा की है कि लॉकडाउन के बाद बिहार आने वाले हर शख्स को 14 दिनों तक क्वरंटीन में रखा जाएगा. इसलिए पुलिस और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लौटकर आ चुके लोगों को ढूंढकर निकालना और उन्हें क्वरंटीन में भेजना हो गया है.
बिहार स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार कोरोना के संदिग्धों के अब तक केवल 977 सैंपल ही जांचे गए हैं. जिनमें 15 पॉजिटिव पाए गए हैं और एक मरीज़ की मौत भी हो चुकी है.
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