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पहले आर्टिकल 370 और अब कोरोनाः लगातार ख़तरे में कश्मीर का टूरिज्म सेक्टर
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
पिछले साल 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के खास दर्जे को खत्म कर दिया था. उसके बाद के छह महीने कश्मीर के टूरिज्म सेक्टर के लिए बुरे रहे, लेकिन जब कारोबार धीरे-धीरे पटरी लौटना शुरू हुआ तो कोरोना की दस्तक ने हालात बद से बदतर कर दिए.
भारतीय प्रशासित कश्मीर में बसंत के मौसम ने दस्तक दे दी है. बादाम के पेड़ों में फूल आ गए हैं, सरसों के खेत लहलहा रहे हैं, चेरी और ट्यूलिप के फूल खिल रहे हैं. लेकिन, ऐसे खुशनुमा मौसम में भी कश्मीर में सैलानी नदारद हैं. कोरोना वायरस के चलते कोई भी इस वक्त कश्मीर नहीं आना चाहता.
पहले से मुश्किल से जूझ रही कश्मीर की टूरिज़्म इंडस्ट्री कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद पूरी तरह से थम गई है.
पिछले साल 5 अगस्त के बाद से अगले करीब छह महीने तक कश्मीर की टूरिज्म इंडस्ट्री में कोई गतिविधि नहीं हुई.
पहले आर्टिकल 370 खत्म करने से डूबा कारोबार
5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर को खास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को वापस ले लिया था और पूरे राज्य को लॉकडाउन कर दिया था.
भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट कर इन्हें केंद्र शासित इलाकों में तब्दील कर दिया.
स्पेशल स्टेटस को खत्म किए जाने के बाद से कश्मीर में भारी सुरक्षा लॉकडाउन कर दिया गया और इसके चलते टूरिस्ट्स के आगमन में गिरावट आई.
कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुताबिक, कश्मीर की अर्थव्यवस्था 5 अगस्त के बाद से करीब 18,000 करोड़ रुपये के नुकसान का शिकार हो चुकी है.
5 अगस्त के बाद के छह महीनों में अकेले होटल सेक्टर को ही 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
हाउस बोट्स पड़ी हैं खाली
हाउस बोट ओनर्स एसोसिएशन, कश्मीर के वाइस प्रेसिडेंट अब्दुल राशिद के मुताबिक, "श्रीनगर की मशहूर डल झील में हाउस बोट्स सूनी पड़ी हैं."
राशिद बताते हैं, "हमारी हाउस बोट इंडस्ट्री सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पांच महीने तक पहले कश्मीर लॉकडाउन रहा. इस दौरान हमें बड़ा नुकसान उठाना पड़ा. 2014 में कश्मीर में भयानक बाढ़ आई और इसकी वजह से भी हमारे कारोबार को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद 2016 में उथल-पुथल के चलते कश्मीर छह महीने तक बंद रहा जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को झटका लगा."
उन्होंने कहा, "हमारी इंडस्ट्री एक बेहद बुरे वक्त का सामना कर रही है. आप ख़ुद जाकर इस कारोबार से जुड़े लोगों की तकलीफ को देख सकते हैं."
राशिद कहते हैं कि पिछले छह-सात महीनों में इस कारोबार से जुड़े ज्यादातर लोगों ने बाज़ार से पैसे उधार लिए थे और उन्हें एक अच्छे सीजन की उम्मीद थी. उन्हें लग रहा था कि वे अच्छी कमाई करेंगे और अपने कर्ज चुका देंगे.
यह पूछे जाने पर कि जब कारोबार बंद पड़ा है तो इससे जुड़े लोग क्या कर रहे हैं, राशिद ने कहा, "वे कुछ नहीं कर रहे हैं. हमारे हाउस बोट कारोबार की हालात बेहद खराब है. हमें नहीं पता कि हमें कल खाना मिल पाएगा या नहीं. हमारे पास होटल या कोई दूसरा बिजनेस नहीं है. हम पूरी तरह से अपनी हाउस बोट पर निर्भर हैं. हमें ट्रस्ट्स और एनजीओ से मदद की दरकार है."
श्रीनगर की डल झील में आठ सौ से ज्यादा हाउस बोट्स हैं. कश्मीर आने वाले टूरिस्ट्स के लिए हाउस बोट में ठहरना सबसे पसंदीदा काम होता है.
राशिद ने कहा कि गुजरे महीनों में लंबे चले शटडाउन और इंटरनेट को बंद किए जाने के बाद धीरे-धीरे उनका कामकाज पटरी पर लौटना शुरू हुआ था.
उन्होंने कहा, "हम अपने ग्राहकों को बताने लगे थे कि कश्मीर में अब चीजें सामान्य हो गई हैं. साथ ही हम उन्हें यह भी समझा रहे थे कि कश्मीर में अब कानून और व्यवस्था की कोई दिक्कत नहीं है. इंटरनेट की दिक्कत तकरीबन खत्म हो चुकी है और हम अपने कस्टमर्स से संपर्क कर पा रहे हैं. लेकिन, कोरोना के अचानक आने से हमारी जिंदगियां थम सी गई हैं."
जम्मू और कश्मीर की यूनियन टेरिटरी (यूटी) में अब तक कोविड-19 के कुल 45 मामले सामने आए हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है.
श्रीनगर और कश्मीर के दूसरे हिस्सों में प्रशासन ने सख्त पाबंदियां लागू की हैं ताकि लोगों को आवाजाही से रोका जा सके.
सभी कारोबारी प्रतिष्ठान, शैक्षिक संस्थान और दफ्तर बंद हैं. सड़क पर कोई सार्वजनिक वाहन मौजूद नहीं है. प्रशासन ने गुजरे सोमवार को ऐलान किया था कि अगले आदेश तक सभी सार्वजनिक पार्कों और बागों को बंद रखा जाए.
सरकार ने विदेशी टूरिस्ट्स के कश्मीर में आने पर रोक लगा दी है.
होटलों में बुकिंग्स कैंसिल हुईं
कोरोना को देखते हुए कश्मीर के होटलों में सभी बुकिंग्स कैंसिल हो चुकी हैं. होटल मालिकों का कहना है कि अगर इस तरह के हालात बने रहे तो वे अपने स्टाफ को कैसे सैलरी दे पाएंगे.
होटेलियर्स क्लब, कश्मीर के चेयरमैन मुश्ताक अहमद ने बीबीसी को बताया कि यह सेक्टर पूरी तरह से बैठ गया है.
अहमद ने कहा, "कोरोना वायरस के पहले कुछ बुकिंग्स कैंसिल हुई थीं, लेकिन अब 100 फीसदी बुकिंग्स कैंसिल हो चुकी हैं. हमारा धंधा पूरी तरह से ठप्प पड़ गया है. हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा. हमें नहीं पता कि आने वाले दिनों में हम अपने एंप्लॉयीज को कैसे सैलरी दे पाएंगे. हम एक सीमा तक ही चीजें झेल सकते हैं. आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद होटल इंडस्ट्री को करीब 3,000 करोड़ रुपये का लॉस हुआ है."
रेस्टोरेंट्स के भी हालात खराब
पहलगाम के एक रेस्टोरेंट के मैनेजर जाविद अहमद ने कहा कि पहलगाम के खूबसूरत इलाके में इस बार एक भी टूरिस्ट नजर नहीं आ रहा है.
उन्होंने कहा, "हमारे यहां 26 एंप्लॉयीज हैं और उनकी नौकरियां दांव पर लगी हुई हैं. अगर ऐसे हालात जारी रहे तो रेस्टोरेंट मालिक कैसे सैलरी दे पाएंगे?"
पहलगाम के होटल हिलटॉप के सीनियर मैनेजर मुनीब अहमद ने कहा कि उनके पास जितनी भी बुकिंग्स थीं वे सब कैंसिल हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि इन बुकिंग्स के कैंसिल होने की वजह से उन्हें 5 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.
जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद यह पहला टूरिस्ट सीजन था.
सरकार ने कश्मीर में टूरिस्ट्स को लाने के लिए देश के दूसरे शहरों में आक्रामक तरीके से रोड शो किए थे.
शिकारों में सैर करने वाले नदारद
श्रीनगर की डल झील के शिकारे वालों को भी ऐसे ही हालात से दो-चार होना पड़ रहा है. शिकारा वाले टूरिस्ट्स को डल झील की सैर कराते हैं.
शिकारा एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गुलाम अहमद मीर का कहना है कि 5 अगस्त से ही टूरिस्ट्स कश्मीर नहीं आ रहे हैं और शिकारे खाली पड़े हुए हैं.
मीर के मुताबिक, "पहले सरकार ने राज्य के खास दर्जे को हटाने से पहले ही टूरिस्ट्स को कश्मीर छोड़कर जाने के लिए कह दिया. अब कोरोना ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. जाहिर है कि इसका हमारी इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ना था."
गुलमर्ग के एक स्थानीय फोटोग्राफर मुहम्मद शफी ने तंगमर्ग में अपने घर से फोन पर बीबीसी को बताया कि चीजें सुधरने लगी थीं, लेकिन तब तक कोरोना वायरस की खबर आ गई. तब से मैंने काम के लिए गुलमर्ग जाना बंद कर दिया.
शफी ने बताया, "मुझे पिछले दो महीने से चार-पांच सौ रुपये रोजाना की कमाई हो जाती थी. अब मेरी कमाई बंद हो गई है. मैं अपने घर बैठा हूं. गुलमर्ग बंद पड़ा है. वहां कोई नहीं जा रहा. जीवित रहना हमारी प्राथमिकता है."
70 फीसदी टूरिज्म खत्म
कश्मीर टूरिज्म के डायरेक्टर निसार अहमद वानी ने बीबीसी को बताया कि कोरोना वायरस का बुरा असर केवल कश्मीर के टूरिज्म पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि पूरी दुनिया इससे जूझ रही है.
वानी ने कहा, "इस वक्त सबसे बड़ी चीज लोगों की जिंदगियां बचाना है. कोरोना के बाद 70 फीसदी टूरिज्म खत्म हो गया."
जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने भी 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया ताकि कोरोना के खतरे से निबटा जा सके.
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