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महाराष्ट्र: निर्णायक हो सकता है सोमवार, निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर
महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के तौर-तरीकों और उसमें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका को चुनौती देनी वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच सोमवार को फ़ैसला सुना सकती है.
महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम को संविधान के विरुद्ध बताकर कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर रविवार को सुनवाई शुरू हुई और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की हैं. सुनवाई सोमवार को भी जारी रहेगी.
शिव सेना की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की, "अगर उनके पास बहुमत है तो वे सदन में साबित करें. अगर नहीं है तो हमें दावा पेश करने दें. जल्द से जल्द सदन में शक्ति परीक्षण होना चाहिए."
उन्होंने कहा, "सुबह 5.17 पर राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया और 8 बजे दो लोगों ने शपथ ले ली. क्या दस्तावेज़ दिए गए, न्योता कब दिया गया, सबकुछ रहस्य है. राज्यपाल ने जिस तरह से पार्टियों को सरकार बनाने का न्योता दिया गया, उसमें पक्षपात दिखता है."
इसी तरह याचिकाकर्ताओं में शामिल शिव सेना की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा, "हम कल बहुमत साबित करने को तैयार हैं."
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर उठाया सवाल
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, "मैं कुछ बीजेपी विधायकों और निर्दलीय विधायकों की ओर से पेश हुआ हूं. मुझे नहीं पता कि सुनवाई रविवार को क्यों हो रही है. रविवार को सुनवाई नहीं होनी चाहिए. मेरे हिसाब से तो यह मामला सुनवाई के लिए लिस्ट ही नहीं होना चाहिए था."
जवाब में कोर्ट ने कहा, "हमें यह केस असाइन किया गया है."
इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "इकट्ठा हुए दलों को सरकार बनाने का मौलिक अधिकार नहीं है. उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता."
कांग्रेस-एनसीपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा, "महाराष्ट्र में जो हुआ, वह विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त को बढ़ावा देना है."
'क्या राज्यपाल को अधिकार नहीं है?'
जस्टिस एनवी रमन ने कांग्रेस और एनसीपी की ओर से दलीलें दे रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, ''क्या आप यह कहना चाहते हैं कि गवर्नर के पास (सरकार बनाने का न्योता देने और शपथ दिलाने का) कोई आधार नहीं था?''
इस पर सिंघवी बोले, ''ये लोकतंत्र की हत्या है. कल एनसीपी ने तय किया है कि अजित पवार पार्टी के विधायक दल के नेता नहीं हैं. अगर उनके पास अपनी पार्टी का ही समर्थन नहीं है तो वह कैसे उप-मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं?''
बीजेपी की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा, "जो सरकार बनाने की इच्छा रखता है, राज्यपाल उसे बुलाएंगे ही. जब उनके पास (शिव सेना और सहयोगियों के पास) समय था, तब उन्हें बना लेनी चाहिए थी सरकार."
'कोर्ट फ्लोर टेस्ट का दिन भी दिन करे'
मुकुल रोहतगी ने कहा, "कोर्ट को आज आदेश देने की ज़रूरत नहीं है. राज्यपाल का आदेश ग़रैक़ानूनी नहीं था. कोर्ट को फ़्लोर टेस्ट का दिन तय करने का आदेश भी नहीं देना चाहिए."
मुकुल रोहतगी ने कहा, "क्या सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को पहले फ़्लोर टेस्ट करवाने का आदेश दे सकते हैं? इस याचिका के साथ कुछ संलग्न नहीं है, इन्हें पता ही नहीं है कुछ, वे तीन हफ़्तों तक सोते रहे. अपने दावे के समर्थन में इन्होंने कोई दस्वापेज़ पेश नहीं किए हैं."
मुकुल रोहतगी ने कहा, "मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी एक पार्टी हैं, इसलिए उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए और उनका पक्ष सुनना चाहिए."
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को नोटिस जारी किए.
सॉलिसिटर जनरल से दस्तावेज़ पेश करने के लिए कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे तक दो तरह के दस्तावेज़ मांगे हैं-
1. देवेंद्र फडणवीस की ओर से सरकार बनाने का दावा करने के लिए राज्यपाल को सौंपा गया विधायकों का समर्थन पत्र.
2. राज्यपाल की ओर से सरकार बनाने का न्योता देने समेत तमाम दस्तावेज़.
अब सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे फिर सुनवाई शुरू होगी. कोर्ट ने कहा कि सोमवार को ही सुनवाई के बाद उचित फ़ैसला सुनाया जा सकता है.
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