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अमित शाह को क्यों है वेंकैया नायडू से शिकायत
मौका था उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की किताब के विमोचन का, लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इशारों-इशारों में चुटकी लेना नहीं भूले.
उपराष्ट्रपति के तौर पर नायडू के अब तक के दो साल के कार्यकाल पर आधारित उनकी पुस्तक 'लिस्निंग, लर्निंग एंड लीडिंग' के विमोचन कार्यक्रम में मौजूद अमित शाह ने कहा कि उन्हें वेंकैया नायडू से एक छोटी-सी शिकायत है कि वो सत्ता पक्ष के लोगों से कुछ ज़्यादा सख्ती से पेश आते हैं और (राज्यसभा में) हर मंत्री उनसे डरता है.
हालांकि उन्होंने इस दौरान वेंकैया नायडू के बीजेपी और सरकार में योगदान की सराहना भी की.
'उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहता था'
इसी मौके पर वेंकैया नायडू ने बताया कि वो कभी उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे. नायडू कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इच्छा ज़ाहिर की थी कि उनके दूसरे कार्यकाल में वह सरकार से हटना चाहते हैं. लेकिन अमित शाह ने उन्हें ऐसा न करने के लिए मना लिया.
वेंकैया नायडू ने बताया कि वो तो चाहते थे कि वो भारतीय जनसंघ के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता दिवंगत नानाजी देशमुख के पदचिह्नों पर चलते हुए रचनात्मक कार्य करें.
दो साल पहले जब वैंकैया नायडू उपराष्ट्रपति बनाए गए थे उस वक्त वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामाशेषन ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि बीजेपी को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो राज्यसभा को अच्छी तरह से संभाल पाएं क्योंकि वहां एनडीए को पूरा बहुमत नहीं था. इसके अलावा उनके दोस्त सभी पार्टियों में थे.
आज भी राज्यसभा में बीजेपी का बहुमत नहीं है, लेकिन विपक्ष की स्थिति लगातार कमज़ोर हो रही है. कुछ सांसदों के इस्तीफे के बाद विपक्षी सांसदों की संख्या घटी ही है, साथ ही बीजेपी लगातार अपनी स्थिति बेहतर कर रही है.
हाल में फ्लोर मैनेजमेंट के ज़रिए बीजेपी ने कई महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा से आसानी से पास करवाए, जिसके बाद विपक्ष की भूमिका पर काफी सवाल भी उठे.
सक्रिय राजनीति से दूर रखने की कोशिश?
जब वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति बने थे तो ये सवाल भी उठा था कि उनके लिए उपराष्ट्रपति का पद प्रमोशन जैसा है या फिर ये उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर रखने की कोशिश है.
इस सवाल के जवाब में भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को बेहद करीब से देखने वाले और अखिल भारतीय छात्र परिषद के नेता के समय से वेंकैया नायडू को जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय कहते हैं, "उपराष्ट्रपति की ज़िम्मेदारी तो महत्वपूर्ण है लेकिन जहां तक मेरी जानकारी है वेंकैया नायडू पहले इसके लिए अनिच्छुक ही थे, जब उन्हें पार्टी अध्यक्ष ने इसके बारे में बताया तो उन्होंने अनिच्छा जताई थी लेकिन अमित शाह ने उन्हें मना लिया था."
रामबहादुर राय के मुताबिक़ वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला भी प्रधानमंत्री के स्तर पर लिया गया लगता था.
उन्होंने कहा, "बीते तीन साल में कामकाज के प्रति निष्ठा और अनुशासन से जिन मंत्रियों ने नरेंद्र मोदी के सामने अपनी दमदार छवि बनाई थी, उनमें वेंकैया रहे थे. यही वजह है कि उन्हें उनकी निष्ठा का सम्मान मिला."
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