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पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने क्यों कहा- कॉकरोच इकट्ठा हो गए तो सब कुछ उलट देंगे, सेना से क्या मिला जवाब?
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने मुल्क की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
गुरुवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट को संबोधित करते हुए मोहसिन नक़वी ने कहा कि मौजूदा शासन व्यवस्था पूरी तरह नाकाम हो चुकी है और देश की समस्याओं का समाधान करने में बुनियादी रूप से अक्षम है
इसी दौरान नक़वी ने कॉकरोच का भी ज़िक्र किया और कहा, "हम अपने युवाओं को वो नहीं दे पा रहे हैं जो वो चाहते हैं. आप उनको नौजवान कहें, या कॉकरोच कहें या जो मर्ज़ी कहें. लेकिन अगर ये कॉकरोच एक साथ इकट्ठा हो गए, तो यह सब कुछ उलट-पुलट कर सकते हैं."
दरअसल भारत में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी बनी और उसने आंदोलन कर शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया.
मोहसिन नक़वी की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब सोशल मीडिया पर ख़ुद को "कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान" कहने वाला एक नया अभियान उभर रहा है. यह समूह दावा करता है कि उसका मक़सद भ्रष्टाचार, ख़राब शासन व्यवस्था और पाकिस्तान के गहराते आर्थिक संकट को चुनौती देना है.
इस समूह के इंस्टाग्राम अकाउंट के 1.14 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं. अपने परिचय में यह ख़ुद को युवाओं की ओर से संचालित एक आंदोलन बताता है, जिसका नारा है, "पाकिस्तान उसके लोगों का है, भ्रष्ट माफ़ियाओं का नहीं."
मोहसिन नक़वी अपने देश में भी युवाओं की नाराज़गी को जायज़ ठहरा रहे हैं. नक़वी ने कहा, ''आप लोग पिछले चार-पाँच सालों से जितनी भी कोशिश कर रहे हैं, चीज़ें वहीं की वहीं रुकी हुई हैं क्योंकि युवाओं की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है. जब तक आपके यूनिट्स नहीं बनेंगे, वे ओनरशिप नहीं लेंगे और नई लीडरशिप सामने नहीं आएगी, तब तक यह काम नहीं होगा.''
नक़वी ने कहा- सिस्टम फेल हो गया
नक़वी ने कहा, ''युवाओं की वास्तविक माँगें क्या हैं? हम समझते हैं कि अपने युवाओं को दो-चार हज़ार रुपये का स्टाइपेंड देकर या टैबलेट्स बाँटकर ख़ुश कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. वे सिर्फ़ एक चीज़ माँगते हैं. निज़ाम ठीक हो, इंसाफ़ मिले, मेरिट पर काम हो और रोज़गार के अवसर मिलें.''
''आप इस युवा को जो चाहे कहें, लेकिन अगर यह युवा शक्ति संगठित और एकजुट हो गई, तो यह सब कुछ बदल सकती है. इससे पहले कि वे अपना असंतोष जताएं, हमें उनकी माँगें पूरी करनी चाहिए. वे आपसे कोई टैबलेट या कुछ पैसे नहीं माँग रहे; अगर आप अवसर देंगे, तो वे ख़ुद हर महीने हज़ारों डॉलर कमा सकते हैं.''
नक़वी ने कहा, ''मिसाल के तौर पर, कोई ऐसा घर नहीं चल सकता जो महीने की शुरुआत में ही लाखों के क़र्ज़ में हो. हमारी फेडरल सरकार का हाल यह है कि जब बजट बनता है तो वह घाटे में बनता है और हम सिर्फ़ यह चर्चा करते हैं कि इस साल कितना क़र्ज़ लेना है.''
''हर साल क़र्ज़ बढ़ता जा रहा है. चाहे प्रधानमंत्री 14-16 घंटे काम क्यों न कर लें, जब तक इस सिस्टम को रीसेट नहीं किया जाएगा, स्थिति नहीं बदलेगी. सभी राजनीतिक दलों को एक कमरे में बैठकर चाहे एक दिन, एक महीना या एक साल लगे देश के हर एक मुद्दे और प्रशासनिक सुधारों पर सहमति बनानी होगी. जब तक सब एकजुट होकर इसे नहीं बदलेंगे, देश की हालत ऐसी ही रहेगी.''
नक़वी के इस बयान पर पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन अहमद शरीफ़ चौधरी से भी पूछा गया.
पाकिस्तान के पत्रकार ने अहमद शरीफ़ चौधरी से पूछा, ''गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने कहा है कि पाकिस्तान में गवर्नेंस नाम की कोई चीज़ नहीं है और ये निज़ाम नाकाम हो चुका है. क्या आप इससे सहमत हैं?''
इसके जवाब में आईएसपीआर के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने कहा, ''गृह मंत्री साहब का जो कॉमेंट है, ये उनका पर्सनल ओपिनियन है. मैं इस पर कॉमेंट नहीं करूंगा लेकिन गुड गवर्नेंस सुरक्षित और स्थिर पाकिस्तान में ही संभव है. इसके बिना हमारे मामलात हल नहीं हो सकते हैं. पिछले 12 सालों से हर पार्टियां इस बात पर सहमत हैं. गुड गवर्नेंस कैसे आएगा, इसे सियासी पार्टियों को फ़ैसला करना होगा.''
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने क्या कहा?
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डॉ आरिफ़ अल्वी ने भी मोहसिन नक़वी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है. डॉ अल्वी ने एक्स पर लिखा है, ''सिस्टम नाकाम नहीं हुआ है. सिस्टम पर क़ब्ज़ा करने वाले लोग सिस्टम को नाकाम कर चुके हैं. उन्होंने इसे बर्बाद किया है.''
अल्वी ने कहा, ''संसदीय लोकतंत्र एक ही आधार पर टिका होता है और वो है- जनादेश. इसी कारण चुनाव कराए जाते हैं. जब चुनावों में धांधली होती है और जनादेश चुरा लिया जाता है, तो जिन लोगों के पास जनता की वैध स्वीकृति नहीं होती, वे देश को आख़िरकार गर्त की ओर ले जाते हैं.''
अल्वी ने कहा, ''लाखों लोगों के भरोसे के नेता इमरान ख़ान को जेल में डालना और जनता की पसंद की जगह भ्रष्ट, फासीवादी और अभिजात्य शासन स्थापित करना व्यवस्था की नाकामी नहीं है. यह व्यवस्था को कमज़ोर करने और उसके साथ छल करने का नतीजा है.''
''पाकिस्तान की संसदीय व्यवस्था विफल नहीं हुई है. 1977 से लगातार सत्ता प्रतिष्ठान ने इसे कमज़ोर किया है और जनता को अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन चलाने के अधिकार से वंचित किया है.
पाकिस्तान के लोगों से मेरी अपील है कि इस बहस में न उलझें. यह एक राजनीतिक धुआं है, जिसका मक़सद असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है. अर्थव्यवस्था की तबाही, संवैधानिक शासन में गिरावट, राजनीतिक दमन, हत्याएं और उन हज़ारों लोगों की क़ैद, जिनका एकमात्र अपराध यह था कि उन्होंने अपने वोट का सम्मान किए जाने की मांग की.''
नक़वी ने कहा कि नागरिकों तक सुविधाएं पहुँचाने का एकमात्र तरीक़ा ज़्यादा प्रशासनिक इकाइयों का गठन है. उन्होंने नए नेतृत्व की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया और कहा कि देश के युवा भत्ते और लैपटॉप नहीं, बल्कि न्याय, योग्यता के आधार पर अवसर और रोज़गार चाहते हैं.
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के महासचिव नय्यर बुखारी ने वहाँ के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन से कहा कि पार्टी की केंद्रीय कार्यकारी समिति (सीईसी) नए प्रशासनिक इकाइयों के मुद्दे पर विचार करेगी, लेकिन इसका रास्ता संवैधानिक होना चाहिए, न कि कार्यपालिका के आदेशों के जरिए.
बुखारी ने कहा कि संविधान इस संबंध में स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है. नए प्रांतों का गठन या किसी प्रांत की सीमाओं में बदलाव संबंधित प्रांतीय विधानसभा, नेशनल असेंबली और सीनेट में दो-तिहाई बहुमत के बिना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि नए प्रांत किसी कार्यकारी आदेश से नहीं बनाए जा सकते.
उन्होंने कहा कि यदि दक्षिण पंजाब सहित नए प्रांतों के गठन को लेकर गंभीरता है, तो मामला संसद में लाया जाए और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाए.
बुखारी ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से आग्रह किया कि उनकी पार्टी, जो पंजाब और केंद्र दोनों में सत्ता में है, सबसे पहले अपने ही प्रांत में इस प्रक्रिया की शुरुआत करे. उन्होंने याद दिलाया कि दक्षिण पंजाब प्रांत के गठन का प्रस्ताव पहले से ही पंजाब विधानसभा में लंबित है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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