नीरज चोपड़ा पर भारी पड़े गेंदबाज़ रहे श्रीलंका के रुमेश, पाकिस्तान के अरशद नदीम को क्या मिला

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भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर नीरज चोपड़ा को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.

श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ उन्हें पछाड़कर गोल्ड मेडल मेडल हासिल कर लिया.

नीरज ने 85.83 मीटर का थ्रो किया. भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता.

पाकिस्तान के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और नीरज के प्रतिद्वंद्वी अरशद नईम नौवें स्थान पर रहे.

तेज़ विपरीत हवा के बावजूद नीरज चोपड़ा ने पहली ही कोशिश में 80.97 मीटर का थ्रो किया.

नीरज ने अपनी दूसरी कोशिश में शानदार वापसी की और पूरा ज़ोर लगाकर थ्रो किया.

इस थ्रो के साथ ही उन्होंने जेवलिन के गिरने का इंतज़ार भी नहीं किया.

वो दोनों हाथ उठाकर जश्न मनाने लगे और ख़ुशी से चिल्लाए.

पाथिरागे कैसे निकले नीरज से आगे

स्कोरबोर्ड पर 85.83 मीटर का थ्रो दर्ज होते ही नीरज सीज़न के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल की दौड़ में पहली पोजिशन पर पहुंच गए.

नीरज ने इसके बाद 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के दो और थ्रो किए. हालांकि, उनका पांचवां और छठा प्रयास फाउल रहा.

टोक्यो विश्व चैंपियनशिप के दौरान लगी चोट से वापसी के बाद यह नीरज का पहला बड़ा मेडल है.

लेकिन 85.83 मीटर के थ्रो की कामयाबी ज़्यादा देर तक नहीं टिकी.

कुछ ही देर बाद इस सीज़न के वर्ल्ड नंबर वन थ्रोअर श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर दिया.

इस थ्रो के साथ ही पाथिरागे ने गोल्ड मेडल की रेस में बढ़त हासिल कर ली और आख़िर में मेडल भी अपने नाम कर लिया.

इस साल शानदार फॉर्म में चल रहे रुमेश पथिरागे ने सिर्फ़ एक लीगल थ्रो किया और वही नीरज के थ्रो से आगे निकल गया.

रुमेश पाथिरागे इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन जेवलिन थ्रोअर माने जा रहे हैं.

उनके नाम इस सीज़न का विश्व का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 92.62 मीटर है और इस साल उन्होंने जिन-जिन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है, उनमें से अधिकांश में जीत हासिल की है.

रोम डायमंड लीग में रुमेश पाथिरागे 2026 सीज़न में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले पहले जेवलिन थ्रोअर बने थे.

23 वर्षीय पाथिरागे ने 92.62 मीटर का थ्रो कर प्रतियोगिता का नया रिकॉर्ड बनाया, श्रीलंका का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया और सीज़न का विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी अपने नाम किया.

क्वालिफिकेशन राउंड के बाद नीरज चोपड़ा ने भी रुमेश की तारीफ़ की थी.

नीरज ने कहा था, "वह बहुत अच्छा लड़का है. वह मेरा दोस्त है. इस साल उसने शानदार प्रदर्शन किया है. मुझे ख़ुशी है कि वह श्रीलंका के लिए कुछ बड़ा कर रहा है."

कौन हैं रुमेश पाथिरागे?

'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़ रुमेश पाथिरागे पहले मध्यम तेज़ गेंदबाज़ थे, लेकिन बाद में उन्होंने जेवलिन थ्रो को अपना खेल बना लिया. उन्हें इस खेल से उनके कोच टोनी प्रसन्ना ने परिचित कराया.

रुमेश ने द इंडियन एक्सप्रेस से एक इंटरव्यू में कहा था, "कोच टोनी ने ही मुझे जेवलिन थ्रो से परिचित कराया. वह हमेशा कहते हैं कि अगर मैं बुनियादी तकनीक को सही तरीक़े से सीखूं और उसी पर कायम रहूं, तो एक दिन उसका फल ज़रूर मिलेगा. वह सिर्फ़ मेरे कोच नहीं हैं, बल्कि मुझे खेल के साथ-साथ जीवन की भी सीख देते हैं."

किशोरावस्था में रुमेश करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाज़ी करते थे.

अंडर-18 स्तर पर उन्होंने एक बार 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार भी हासिल की थी. उस प्रतियोगिता में वह श्रीलंका और आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलने वाले ईशान मलिंगा के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे.

रुमेश के करियर की सबसे बड़ी पहचान उनकी निरंतरता रही है. श्रीलंका के पूर्व जेवलिन थ्रोअर सुमेधा रणसिंघे की तरह नहीं, जो 85 मीटर का आंकड़ा पार करने के बाद अपना प्रदर्शन बरकरार नहीं रख पाए.

रुमेश लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं. 2025 सीज़न में उन्होंने 13 बार 82 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका था.

यशवीर सिंह को ब्रॉन्ज़ मेडल

इस कॉमनवेल्थ गेम में यशवीर भारत के दूसरे सितारे बन कर उभरे.

आख़िरी राउंड शुरू होने से पहले यशवीर छठे स्थान पर थे.

इसके बाद के थ्रो में वर्ल्ड चैंपियन केशोर्न वॉलकॉट ने 82.55 मीटर का थ्रो कर उन्हें सातवें स्थान पर धकेल दिया.

लेकिन यशवीर ने अपनी आख़िरी कोशिश में 85.41 मीटर का नया पर्सनल बेस्ट थ्रो किया.

इसके दम पर वह सीधे ब्रॉन्ज मेडल हासिल करने की पोजिशन में पहुंच गए और आख़िरकार उन्होंने ये मेडल जीत लिया. स्थिति में पहुंच गए और अपने करियर का पहला बड़ा मेडल जीत लिया.

इस प्रतियोगिता में भारत के तीसरे खिलाड़ी रोहित यादव कुछ समय के लिए तीसरे स्थान पर थे.

लेकिन दक्षिण अफ़्रीका के डाउ स्मिट ने 82.88 मीटर का थ्रो कर उन्हें पीछे छोड़ दिया.

रोहित का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दूसरे प्रयास में आया, जब उन्होंने 81.56 मीटर का थ्रो किया. इसके बाद वह अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सके.

उनके कई थ्रो निर्धारित दिशा से भटक गए और वह प्रतियोगिता में छठे स्थान पर रहे.

कैसा रहा पाकिस्तान के अरशद नदीम का प्रदर्शन

पाकिस्तान के ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम नौवें स्थान पर रहे और मेडल जीतने से चूक गए.

अरशद फाइनल में अपनी लय हासिल नहीं कर सके.

उनका पहला प्रयास फाउल रहा, जबकि दूसरे और तीसरे प्रयास में उन्होंने क्रमशः 77.41 मीटर और 75.39 मीटर का थ्रो किया.

12 खिलाड़ियों के बीच वह नौवें स्थान पर रहे और शीर्ष-8 में जगह नहीं बना सके.

इसलिए उन्हें तीन राउंड के बाद ही प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा.

भारत के कितने मेडल

ग्लासगो में चल रहे गेम्स के आठवें दिन भारत ने कुल 6 मेडल जीते. इनमें 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल रहे. जूडो में अस्मिता डे ने गेम्स के इतिहास में भारत को पहला गोल्ड दिलाया.

इसके 15 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दूसरा गोल्ड जीता. यामिनी मौर्य ने सिल्वर मेडल हासिल किया.

एथलेटिक्स में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन स्पर्धा में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचा. वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने.

भारत मेडल तालिका में 10वें स्थान पर है. टीम ने अब तक 5 गोल्ड, 12 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज सहित कुल 23 मेडल जीते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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