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तारिक़ रहमान के दौरे पर चीन ने बांग्लादेश को क्या देने का किया है वादा
- Author, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
शुक्रवार को बांग्लादेश से म्यांमार और चीन होकर एक इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव आया है.
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने अपने चीन दौरे के आख़िरी दिन शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ात की.
बांग्लादेश पीएमओ के प्रवक्ता महदी अमीन ने बताया है कि दोनों नेताओं की बैठक में तीस्ता मास्टर प्लान के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापारिक घाटा कम करने और रणनीतिक साझेदारी के मुद्दों पर चर्चा हुई है.
अमीन ने बताया, बांग्लादेश और चीन ने अपने मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों को 'दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी' में बदलने के लिए एक नई कार्य योजना अपनाई है.
दोनों नेताओं के बीच यह बैठक बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपुल' में शुक्रवार को स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह 10 बजे हुई.
मेहदी अमीन ने उस बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों को तारिक़ रहमान के चीन दौरे और बैठक के बारे में जानकारी दी.
ग़ौरतलब है कि 17 फ़रवरी को सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान की यह पहली विदेश यात्रा है.
21 जून को ढाका से रवाना होने के बाद, बांग्लादेशी प्रधानमंत्री दो दिवसीय मलेशिया यात्रा पूरी करने के बाद चीन के लिए रवाना हुए थे.
चीन और बांग्लादेश के बीच समझौते
चीन की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकों में हिस्सा लिया.
बांग्लादेश प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस यात्रा और बैठक के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक के रूप में 13 एमओयू और 4 अतिरिक्त समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि चीन के साथ चल रही विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, "चीन सड़कों, पुलों और रेलवे में 'बहुआयामी परिवहन तंत्र' बनाने में हमारी मदद करना चाहता है."
इसके अतिरिक्त, इस बैठक के संबंध में चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि दोनों देशों को संबंधों में सुधार करना चाहिए और विकास साझेदारी में सहयोग करना चाहिए.
दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया.
तीस्ता जल बंटवारे पर हुई बात
अमीन ने बताया कि तारिक़ रहमान ने चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के अध्यक्ष झाओ लेजी से भी मुलाक़ात की.
उनके अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक में एक-दूसरे की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की गई.
उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बैठक में तीस्ता नदी का प्रबंधन सबसे अहम मुद्दा रहा. चीन ने इस परियोजना के लिए तकनीकी सहायता देने और फ़िज़िबिलिटी स्टडी करने में दिलचस्पी दिखाई है.
अमीन का कहना था कि इसके अलावा बीसीआईएम (बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार) इकोनॉमिक कॉरिडोर के ज़रिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने, चटगांव पोर्ट को क्षेत्रीय हब के तौर पर विकसित करने और मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण की योजनाएं भी बनाई गई हैं.
उनका कहना था, "दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बातचीत के आधार पर एक 16-सूत्रीय संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया है. उसमें आपसी रिश्तों के भविष्य के रोडमैप और अहम फैसलों की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी गई है."
अमीन ने बताया कि चीन ने सड़क, पुल और रेलवे के बुनियादी ढांचे के साथ ही विकास के प्रयासों में मदद के साथ ही अनवारा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईजेड), मोंगला इकोनॉमिक ज़ोन, पर्यावरण-अनुकूल विकास और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया है.
ब्रिक्स की सदस्यता देने का चीन ने किया समर्थन
दूसरी ओर, चीन के विदेश मंत्रालय ने दोनों नेताओं की बैठक के बाद एक बयान जारी किया है. उसमें आपसी संबंधों को बेहतर बनाने, संप्रभुता और आंतरिक मामलों का समर्थन करने और विकास में साझेदारी को बढ़ावा देने में सहयोग का भरोसा दिया गया है.
बयान के अनुसार, "दुनिया की परिस्थितियां चाहे कैसे भी बदले, बीजिंग चीन और बांग्लादेश के बीच दोस्ताना रिश्तों के मुख्य मक़सद से कभी नहीं भटकेगा. चीन हमेशा एक भरोसेमंद दोस्त, अच्छे पड़ोसी और बेहतर साझीदार के तौर पर बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा."
बयान में यह भी कहा गया है, "चीन बांग्लादेश की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की कोशिशों का समर्थन करता है और किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करता है."
अमीन ने बीजिंग में दोनों नेताओं की बैठक के बाद कहा, "दोनों देशों के बीच जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं उनमें मूल रूप से निवेश में सहयोग, हरित विकास और दूसरे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है."
अमीन का कहना था कि बैठक में एक साझा कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई है.
उन्होंने कहा, "हमारे 'ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव' के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इसके साथ ही मानव संसाधन विकास के लिए सहयोग की एक अलग योजना पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं."
उनका कहना था कि चीन ने रोहिंग्या समस्या के समाधान में भी बांग्लादेश के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है.
इस यात्रा के दौरान चीन ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करने और बांग्लादेश को ब्रिक्स की सदस्यता दिलाने में मदद का भी भरोसा दिया है.
प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान तीन दिवसीय चीन दौरे के बाद शुक्रवार रात को राजधानी ढाका लौट गए.
भारत के साथ तनाव
प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंध काफ़ी बिगड़ गए थे.
लेकिन बांग्लादेश में तारिक़ रहमान के सत्ता में आने के बाद दोनों देश आपसी संबंधों को सुधारने में दिलचस्पी दिखा रहे थे.
जबकि हाल के दिनों में भारत ने 'तथाकथित बांग्लादेशियों' को सीमा पार धकेलने के प्रयास किए हैं. इसे लेकर दोनों देशों के बीच एक तरह का तनाव है.
हाल ही में तारिक़ रहमान के सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान के दिल्ली दौरे को लेकर विवाद हुआ और इस मुद्दे को बांग्लादेश ने राजनयिक स्तर पर उठाया.
दरअसल दिल्ली हवाई अड्डे पर कथित तौर पर इमिग्रेशन संबंधी 'परेशानियों' के बाद ज़ाहिद उर रहमान वापस ढाका लौट गए थे.
उन्होंने इसे एक 'अप्रत्याशित' घटना बताते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया था. हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ज़ाहिद उर रहमान अपनी इच्छा से दिल्ली एयरपोर्ट से वापस चले गए थे.
तारिक़ रहमान को फ़रवरी महीने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली आने के लिए न्योता भेजा था. हालाँकि रहमान ने इसके बावजूद मलेशिया और चीन को प्राथमिकता दी.
तारिक़ रहमान की पार्टी सत्ता में आने से पहले कह रही थी कि उसकी सरकार स्वतंत्र विदेश नीति पर चलेगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.