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मुंबई लोकल ट्रेन में हत्या: मृतक की बहन बोलीं, 'इतने लोग थे कोई मेरे भाई को बचाने नहीं आया'
- Author, अल्पेश करकरे
- पदनाम, बीबीसी मराठी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
"मेरा बेटा काम पर गया था, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटा. अब हम क्या करें? सब कुछ बर्बाद हो गया है."
"उसने मेरे बेटे की जान इस तरह क्यों ले ली? मेरे बेटे ने उसका क्या बिगाड़ा था? हमारे बेटे को न्याय दिलाइए."
यह दर्दभरी पुकार 22 वर्षीय मयंक रमेश लोहार के माता-पिता की है, जिनके बेटे की ट्रेन में हुए चाकू हमले में मौत हो गई.
आरोप है कि 23 जून को मुंबई की जीवनरेखा (लाइफ़लाइन) मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में रोशन सुवर्णा नाम के शख़्स के चाकू हमले में मयंक रमेश लोहार की जान चली गई. एक पल में पूरे लोहार परिवार का सहारा छिन गया.
मयंक की मौत के बाद विरार स्थित उनके घर में शोक का माहौल है. परिवार का कोई भी सदस्य अभी तक इस सदमे से उबर नहीं पाया है.
परिजनों का कहना है कि मयंक की मां आज भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठी रहती हैं, इस उम्मीद में कि उनका बेटा काम से घर लौट आएगा. मयंक के पिता समेत पूरा परिवार उनके लिए न्याय की मांग कर रहा है.
ग्रेजुएशन, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां
मयंक लोहार 22 साल के थे. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी. वह अंधेरी के एक मॉल में सेल्समैन के रूप में काम करते थे.
लोहार परिवार पहले अंधेरी में रहता था और बाद में नालासोपारा आकर बस गया. परिवार पिछले 30 वर्षों से इन दोनों इलाकों से जुड़ा रहा है.
मयंक की पढ़ाई नालासोपारा में हुई थी. वह परिवार में दूसरे नंबर के बच्चे थे. परिवार में उनके माता-पिता, दो भाई और एक बहन हैं.
शिक्षा पूरी करने के बाद वह अपने करियर और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे थे. वह अपनी कमाई से परिवार का सहारा बन रहे थे. लेकिन उनकी अचानक मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
मयंक के पिता 52 साल के हैं और ड्राइवर का काम करते हैं. उनका छोटा भाई और बहन पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ा भाई नौकरी करता है. परिवार के सदस्यों के अनुसार, संयुक्त परिवार में मयंक ही सबसे बड़ा सहारा थे.
'अभियुक्त को फांसी दी जाए', परिवार की मांग
मयंक के पिता रमेश लोहार ने बीबीसी मराठी से बातचीत में कहा,
"अभियुक्त को फांसी की सजा दी जानी चाहिए. वह एक गंभीर अपराधी है."
"हमारे बेटे की हत्या कर दी गई और हमारा परिवार बर्बाद हो गया. इसलिए हम न्याय की मांग करते हैं."
रमेश लोहार ने आगे कहा,
"मेरे बेटे ने सिर्फ अपने सहयात्रियों से लोकल ट्रेन का दरवाजा बंद करने के लिए कहा था और इसी वजह से उसकी जान ले ली गई."
"मेरे बेटे ने उसका क्या बिगाड़ा था? प्रशासन को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए."
सुरक्षा की कमी के कारण मेरा भाई नहीं बच सका
मयंक की बहन मेघा लोहार ने बीबीसी मराठी से कहा,
"पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण मेरा भाई बच नहीं सका. वहां इतने लोग थे, फिर भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. उस पर बड़े चाकू से हमला किया गया. हमने अपने परिवार का एक हिस्सा खो दिया."
"अभियुक्त को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. क्योंकि अगर उसे आज सजा नहीं मिली, तो कल और लोग मारे जाएंगे."
लोकल ट्रेन में मामूली विवाद कैसे बना जानलेवा?
23 जून की रात काम खत्म करने के बाद मयंक चर्चगेट से नालासोपारा जाने वाली फास्ट लोकल ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में घर लौट रहे थे.
उस दिन मुंबई में भारी बारिश हो रही थी. डिब्बे का दरवाजा खुला हुआ था, जिससे बारिश का पानी और तेज हवा अंदर आ रहे थे. इसलिए मयंक ने रोशन सुवर्णा नाम के एक सहयात्री से दरवाजा बंद करने का अनुरोध किया.
इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और आरोप है कि अभियुक्त सहयात्री ने मयंक के पेट में तेजधार चाकू से हमला कर दिया.
पुलिस के मुताबिक, गंभीर रूप से घायल मयंक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
पुलिस क्या कहती है?
30 वर्षीय अभियुक्त रोशन सुवर्णा मयंक लोहार की हत्या के बाद लगभग 15 घंटे तक फरार रहा.
वह बोरीवली से मीरा रोड होते हुए पनवेल पहुंचा. बुधवार (24 जून 2026) दोपहर में उसे पनवेल से गिरफ्तार कर लिया गया.
मीरा रोड का निवासी रोशन अंधेरी एयरपोर्ट के पास एक कार्गो हैंडलिंग सेंटर में कार्यरत था. जांचकर्ताओं के अनुसार, उसके पिता और बड़ा भाई भी उसी कंपनी में काम करते हैं.
पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि शराब के नशे में हुए विवाद के बाद गुस्से में उसने चाकू से हमला किया.
उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और अदालत ने उसे 30 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
बोरीवली रेलवे पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक डीएम खुपरेकर ने बताया कि बोरीवली जीआरपी और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है.
एक मौत और कई सवाल
मुंबई लोकल ट्रेनों में हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं. लेकिन यात्रियों का कहना है कि इतनी छोटी-सी बात पर हुई इस दुखद घटना ने एक बार फिर यात्री सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है.
अब कई सवालों के जवाब तलाशने की जरूरत है, जैसे लोकल ट्रेनों में विवादों को बढ़ने से कैसे रोका जाए, हथियार लेकर यात्रा करने वालों पर कैसे नियंत्रण रखा जाए और आपात स्थिति में तुरंत मदद कैसे उपलब्ध कराई जाए.
मयंक लोहार के परिवार की अब सिर्फ एक ही उम्मीद है-उनके बेटे को न्याय मिले और किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.
पश्चिम रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने कहा,
"रेलवे में हुई यह घटना बेहद दुखद है. हम हमेशा यात्रियों की सुरक्षा पर जोर देते हैं."
"उस समय हमारी पुलिस, रेलवे कर्मचारी और आपातकालीन कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे थे. हालांकि, इलाज के दौरान मयंक की मृत्यु हो गई. पुलिस और रेलवे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच जारी है."
उन्होंने आगे कहा, "इस घटना के बाद यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है. रेलवे यात्रा और व्यवस्था सुरक्षित है. हम यात्रियों और रेलवे प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध हैं."
अभियुक्त के वकील ने क्या कहा?
इस मामले के अभियुक्त रोशन सुवर्णा के वकील सुरेंद्र लांडगे ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा,
"रोशन के अनुसार, उस समय बारिश हो रही थी और लोकल ट्रेन का दरवाजा बंद करने को लेकर दोनों के बीच बहस हुई थी."
"इसी दौरान मयंक ने रोशन पर हाथ उठा दिया, जिससे उसके चश्मे गिर गए और आंख में चोट लग गई. रोशन को बिना चश्मे के धुंधला दिखाई देता है. इसी बहस और गुस्से के दौरान उसने कथित तौर पर यह अपराध किया."
रोशन क्या काम करता है और उसके पास चाकू क्यों था, इस सवाल पर वकील ने कहा कि रोशन का अपना कारोबार है. वह बारकोड बनाने का काम करता है. हालांकि, उसके बैग में चाकू क्यों था, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.