इंग्लैंड-आयरलैंड में सिरीज़ हारने के बाद गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर पर सवाल, क्या कह रहे हैं पूर्व खिलाड़ी और फैंस

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भारत इंग्लैंड से टी-20 सिरीज का पांचवां मैच भी हार गया.

पहला मैच बारिश की वजह से रद्द होने के बाद भारत इंग्लैंड से लगातार हारा है.

साउथहैम्पटन में खेले गए सिरीज के आख़िरी टी-20 मैच में इंग्लैंड ने भारत को 56 रन से शिकस्त दी.

शनिवार को खेले गए मुक़ाबले में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया जो ग़लत साबित हुआ.

पहले बल्लेबाज़ी करते हुए इंग्लैंड की टीम ने भारत के सामने 258 रनों का लक्ष्य रखा. लेकिन भारत निर्धारित 20 ओवरों में आठ विकेट के नुक़सान पर 201 रन ही बना सकी.

आख़िरी मैच में संजू सैमसन को मौका दिया गया लेकिन वो भी सिर्फ़ 27 रन ही बना सके.

वैभव सूर्यवंशी को इस मैच से बाहर रखा गया था.

ब्रिस्टल में चौथे टी-20 मैच में भी भारत को हार मिली थी. भारत ने इंग्लैंड को 159 रन का लक्ष्य दिया था. लेकिन इंग्लैंड ने 13.5 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया था.

सिरीज़ हारने पर चौतरफ़ा सवाल

पहले आयरलैंड और अब इंग्लैंड में 'व्हाइटवॉश' की वजह से टी-20 की चैंपियन इंडियन टीम पर चौतरफ़ा सवाल उठ रहे हैं.

कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर दोनों की आलोचना हो रही है.

भारत की इंग्लैंड के ख़िलाफ़ लगातार हार और इस सिरीज़ से पहले आयरलैंड के ख़िलाफ़ मिली दो अप्रत्याशित हारों ने श्रेयस अय्यर पर दबाव बढ़ा दिया है, जिन्होंने जून की शुरुआत में भारत की टी-20 टीम की कप्तानी संभाली थी.

बल्लेबाज़ी में मजबूत मानी जाने वाली भारतीय टीम के बैटर इस सिरीज़ में बिल्कुल नाकाम रहे.

इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल में रनों का अंबार लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ आयरलैंड और इंग्लैंड की पिचों पर असहज दिखे. वे तेज़ रन बनाने की कोशिश में लगातार बड़े शॉट खेलते रहे, लेकिन सफल नहीं हो सके.

चौथे मैच में हार के बाद भारत के पूर्व विकेटकीपर दीप दासगुप्ता ने कहा था कि भारत की बल्लेबाज़ी में कोई योजना नहीं दिख रही है और वह समझ नहीं पा रहे कि टीम किस दिशा में जा रही है.

भारत का अस्थायी गेंदबाज़ी आक्रमण भी इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को रोकने में नाकाम रहा है, क्योंकि जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या दोनों को इस सिरीज़ के लिए आराम दिया गया था.

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने शनिवार को मैच हारने के बात कहा कि एक साथ कई विकेट गंवाना भारत की हार की बड़ी वजह रही.

साउथहैम्पटन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, '' ये इस इस सिरीज़ की सबसे अच्छी पिच थी और बल्लेबाज़ी के दौरान हमारा रवैया भी अलग था. पहले मैच से ही परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं. पेशेवर खिलाड़ियों के तौर पर हमें इन्हें समझना और इनके मुताबिक खुद को ढालना होगा. यह बातचीत करना भी ज़रूरी है कि हम क्या बेहतर कर सकते थे. फील्डिंग की अहम भूमिका होती है और हमें इस पर काम करना होगा."

सपाट पिचों पर खेलने की आदत हार की वजह?

कई लोग भारत की हार के लिए आईपीएल के लिए बनाई जाने वाली सपाट पिचों को जिम्मेदार मान रहे हैं.

उनका कहना है भारत घरेलू मैदानों पर जीत जाता है लेकिन विदेशी पिचों पर उसके बल्लेबाज़ टिक नहीं पाते हैं.

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ जोफ़्रा आर्चर ने साफ़ कहा था कि इंग्लैंड में क्रिकेट खेलना आईपीएल से काफ़ी अलग है.

उन्होंने कहा भारतीय बल्लेबाज़ों को इंग्लैंड के माहौल में ढलने की जरूरत थी क्योंकि यहां क्रिकेट आईपीएल से काफ़ी अलग है.

उनका कहना था आईपीएल की पिचें सपाट होती हैं और बाउंड्री छोटी. इससे बल्लेबाज़ी आसान हो जाती है.

जबकि इंग्लैंड में क्रिकेट अपने पुराने रंग में होती है. यहां बॉलर को ज़्यादा मदद मिलती है बल्लेबाज़ों को ज़्यादा अनुशासित होकर खेलना पड़ता है.

भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने कहा, "इंग्लैंड में खेलना बिल्कुल अलग है. यह आईपीएल में खेलने जैसा नहीं है और भारतीय टीम जितनी जल्दी इस बात को समझे, उतना अच्छा होगा."

उन्होंने कहा, "आईपीएल में आप लगभग हर गेंद को मैदान के बाहर मारने की कोशिश करते हैं. लेकिन यहां ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि गेंद स्विंग करती है, परिस्थितियां अलग हैं और विकेट में उछाल है. इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने अच्छी तरह समझ लिया है कि किस बल्लेबाज़ के ख़िलाफ़ कैसी गेंदबाज़ी करनी है."

क्रिकेट फ़ैन्स कप्तान के तौर पर श्रेयस अय्यर पर भी सवाल उठा रहे हैं. हालांकि पूर्व क्रिकेटर मदनलाल ने उनका बचाव किया है.

पूर्व क्रिकेटर मदन लाल ने कहा "मैं निश्चित रूप से हैरान हूं. हमने बेहद ख़राब क्रिकेट खेली और पांच मैच गंवाए. हमें आयरलैंड के ख़िलाफ़ जीतना चाहिए था."

उन्होंने कहा, "कप्तान उतना ही अच्छा होता है, जितनी अच्छी उसकी टीम होती है. आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बहुत बड़ा अंतर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने में समय लगता है. शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों ने विदेशों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन वे इस टीम का हिस्सा नहीं हैं."

"एक टीम बनाना बहुत मुश्किल होता है, जबकि उसे बर्बाद करना बेहद आसान है."

वैभव सूर्यवंशी पर उन्होंने कहा, "उस स्तर पर आप हर गेंद को मारने की कोशिश नहीं कर सकते. क्लब क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंतर होता है. यह छह ओवर का मैच नहीं, बल्कि 20 ओवर का खेल है. आपको अपनी पारी को अच्छी तरह संभालना होता है.''

पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन ने कहा, "जिस तरह से हम हारे हैं, वह चौंकाने वाला और बेहद परेशान करने वाला है. हमने एक मैच 125 रन से गंवाया और फिर नौ विकेट से हार गए. हम कहीं भी मुक़ाबले में नज़र नहीं आए. यह और भी हैरान करने वाला है क्योंकि लगभग इन्हीं खिलाड़ियों के साथ हमने विश्व कप जीता था."

15 साल के वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के बाद लगातार तीन मैचों में कम स्कोर पर वासन ने उन्हें इंग्लैंड की परिस्थितियों के मुताबिक़ खुद को ढालने की सलाह दी.

उन्होंने कहा, "गेंद आप पर बहुत तेज़ी से और ज़्यादा उछाल के साथ आ रही है और यही जोफ़्रा आर्चर की ख़ासियत है. जॉश टंग भी तेज़ गेंदबाज़ी कर रहे हैं. वह ऐसी गुड लेंग्थ पर गेंद डालते हैं, जहां से गेंद आपकी आदत के मुक़ाबले शायद चार इंच ज़्यादा उछलती है."

वासन ने कहा, "इसलिए थोड़ा समय लीजिए. कम से कम पहले विकेट और गेंद की रफ़्तार को समझिए. लेकिन अगर आप इस दबाव में खेलेंगे कि 'मैं बड़ा खिलाड़ी हूं और गेंद को मैदान के बाहर मार दूंगा', तो यह कभी-कभार काम कर सकता है, लेकिन इंग्लैंड में लगातार काम नहीं करेगा."

जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कहा, ''असल में इंग्लैंड ने भारत को उसी अंदाज़ में खेलकर हराया है, जिसे भारतीय टीम अपनी ख़ासियत मानती थी.''

''अगर भारतीय टीम इस नतीजे को अपनी कमज़ोरियों को उजागर करने वाले मौक़े के तौर पर देखने को तैयार है, तो इससे आगे बहुत कुछ अच्छा निकल सकता है.''

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीके नाम के यूजर ने लिखा, ''अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाज़ी में समझदारी की कमी दिखी और दोनों लगभग हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश करते नज़र आए. ईशान किशन उछाल वाली पिचों पर नाकाम रहे, जबकि तिलक वर्मा भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे.''

''भारत का टॉप ऑर्डर लगातार लड़खड़ाया और मिडिल ऑर्डर भी टीम को संभाल नहीं सका. शिवम दुबे और अक्षर पटेल बल्ले से प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर भी ऑलराउंडर की भूमिका में नाकाम रहे.

''कप्तान श्रेयस अय्यर ने अकेले जिम्मेदारी भरी पारी खेली और रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे बल्लेबाज़ों का साथ नहीं मिला. टीम के बाकी खिलाड़ी प्रदर्शन नहीं कर सके और यही भारत की हार की बड़ी वजह बनी.''

टीम सेलेक्शन पर सवाल

आयरलैंड और इंग्लैंड में हार के बाद भारत का टीम मैनेजमेंट सवालों के घेरे में है.

टीम सेलेक्शन पर भी सवाल उठ रहे हैं.

आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से पहले क्रिकेट फैन्स टीम के चयन को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर रहे थे. कई अहम खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं दी गई थी.

इस टीम में भारत को पिछले टी-20 वर्ल्ड कप में जीत दिलाने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव को जगह नहीं दी गई थी.

इंग्लैंड में वैभव सूर्यवंशी को पहले दो मैचों में नहीं खेलाया गया. हालांकि उन्हें बाद में खेलाया गया लेकिन उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज़ हरभजन सिंह ने टीम सेलेक्शन से पहले सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा था, "भारतीय टीम में रजत पाटीदार का न होना दुखद है. उन्हें और क्या करने की ज़रूरत है? उन्होंने 501 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट लगभग 200 है. यह नाइंसाफ़ी है."

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और क्रिकेट की अच्छी समझ रखने वाले शशि थरूर ने एक्स पर लिखा था, ''मैं सचमुच नि:शब्द हूँ. समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ. पूरी तरह स्तब्ध हूँ. यह एक और ऐसी शर्मनाक हार है, जिसे बयां करना मुश्किल है. सच कहूं तो अब कहने के लिए कुछ भी नहीं बचा है.''

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा था, ''फ़रवरी में टी-20 विश्व कप जीतने वाली यही भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड के सामने पूरी तरह बेबस नज़र आ रही है. बहुत कम मौक़ों पर भारतीय टीम इतनी फीकी और रणनीति के मामले में इतनी लाचार दिखाई दी है. यह एक बात भी साफ़ कर देता है कि इस टीम के लिए जसप्रीत बुमराह से ज़्यादा अपरिहार्य कोई खिलाड़ी नहीं है. वह भारत के असली मैच विनर हैं. अक्सर कहा जाता है कि एक खिलाड़ी अकेले टीम नहीं बनाता. लेकिन बुमराह इस नियम के अपवाद हैं.''

गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर घिरे

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने सिरीज़ की हार पर अपने एक शो में कहा, '' कोच के तौर पर गौतम गंभीर का समय काफ़ी पहले ख़त्म हो गया था. लेकिन घरेलू मैच में वर्ल्ड कप जीतने और यूएई में भारत जैसी पिचों पर भारतीय टीम की जीत से वो बच जाते हैं.''

''इंग्लैंड गई भारतीय टीम में संतुलन बिल्कुल नहीं था. इसमें अटैक ही नहीं था. बगैर पेस अटैक के इंग्लैंड के दौरे पर कैसे जाया जा सकता था. हर्षिता राण को लगातार बनाए रखना समझ में नहीं आया."

''भारत ऐसे खिलाड़ियों को ले गया था जो न पूरी तरह बल्लेबाज़ थे और न पूरी तरह गेंदबाज़. पार्ट टाइम स्पिनर, बगैर पेस अटैक और पार्ट टाइम बल्लेबाज़ों से काम नहीं चलेगा. आप रवि विश्नोई जैसे खिलाड़ी को 'टीम में रखते हैं जो अहम मौके पर एक साथ तीन नो बॉल कर देते हैं.''

सिरीज़ से लौटने के बाद भारतीय टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों के चयन को लेकर बड़ा बदलाव दिख सकता है. बीसीसीआई ने भी समीक्षा की बात कही है.

दो दिन पहले बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "बीसीसीआई फ़िलहाल भारतीय टी20 टीम के प्रदर्शन पर नज़र रख रहा है. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मौजूदा सिरीज़ में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा होना असामान्य नहीं है. हम इसे सिर्फ़ एक ख़राब दौर के तौर पर देख रहे हैं."

उन्होंने कहा, "19 जुलाई को वनडे सिरीज़ ख़त्म होने और टीम के वापस लौटने के बाद हम टीम के प्रमुख सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे. इसमें इस बात पर चर्चा होगी कि इंग्लैंड में क्या ग़लत हुआ. अभी वनडे सिरीज़ खेली जानी है और हमें उम्मीद है कि टीम फिर से अच्छी फ़ॉर्म में लौटेगी."

सैकिया ने यह भी कहा कि समीक्षा बैठक "सिर्फ़ टीम के प्रदर्शन और कमियों को दूर करने के लिए ज़रूरी सुधारों पर केंद्रित होगी. इसके अलावा किसी और मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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