महिला टी-20 विश्व कप: हरमनप्रीत की तूफ़ानी बैटिंग के बावजूद ऑस्ट्रेलिया से कैसे हारी भारतीय टीम

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
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कप्तान हरमनप्रीत कौर की बेहतरीन पारी भी आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप में भारतीय अभियान को सेमीफ़ाइनल तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो सकी.

भारतीय अभियान को रोकने में एलिस पेरी ने अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की. उनकी पारी ने ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से जीत दिलाई. इसके साथ ही वह 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' भी बनीं. 170 रन का लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया ने 19 ओवर में सिर्फ़ चार विकेट खोकर हासिल कर लिया जबकि एक वक़्त टीम 68 रन पर तीन विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी.

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल आईसीसी वनडे विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में बड़ा स्कोर बनाने के बावजूद हार झेली थी.

इस बार उसने भारत के ख़िलाफ़ टी-20 विश्व कप में अपना सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल किया. इसके साथ ही उसने उस हार का हिसाब भी बराबर कर दिया.

ऑस्ट्रेलिया ने ग्रुप ए के सभी पांच मैच जीते. टीम 10 अंकों के साथ पहले स्थान पर रही और सेमीफ़ाइनल में पहुंची. दक्षिण अफ़्रीका इस ग्रुप से सेमीफ़ाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम रही.

एलिस पेरी सही समय पर चमकी

एलिस पेरी लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया के लिए खेल रही हैं. लेकिन इस विश्व कप से पहले तक उनके नाम टी-20 विश्व कप में एक भी अर्धशतक नहीं था. उन्होंने इस विश्व कप में लगातार दो अर्धशतक लगाकर अपनी काबिलियत साबित कर दी.

जॉर्जिया वॉल, बेथ मूनी और लिचफ़ील्ड के विकेट जल्दी गिरने के बाद ऑस्ट्रेलिया दबाव में नज़र आ रही थी. ऐसे मुश्किल समय में एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने पारी को संभाला. इसके बाद उन्होंने 13वें ओवर से रन गति बढ़ानी शुरू की. दोनों ने तीन ओवर में 40 रन बनाकर मैच का मोमेंटम अपने पक्ष में कर लिया.

एलिस पेरी और गार्डनर ने चौथे विकेट के लिए 100 रन जोड़े. इस साझेदारी ने भारत की सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदें ख़त्म कर दीं.

भारत के ख़िलाफ़ जीत है ख़ास

'प्लेयर ऑफ़ द मैच' बनीं एलिस पेरी ने कहा, "हमारा दिन अच्छा रहा. भारत के ख़िलाफ़ हमेशा ही कड़ा कॉम्पिटिशन रहता है. इसलिए यह जीत बहुत ख़ास लग रही है. भारतीय पारी देखने के बाद हमें समझ आ गया था कि विकेट अच्छा है. हमें सिर्फ़ अच्छी साझेदारियां बनानी थीं. गार्डनर से मुझे शानदार सहयोग मिला. हमने हर ओवर की पहली दो गेंदों को निशाना बनाने की रणनीति बनाई थी. हम नियमित अंतराल पर चौके लगाते रहे. हमारा टूर्नामेंट अब तक अच्छा रहा है. उम्मीद है कि अगले दो मैच भी अच्छे जाएंगे और हम विजेता बनकर घर लौटेंगे."

पेरी और गार्डनर ने 59 गेंदों में शतकीय साझेदारी की. इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को न सिर्फ़ दबाव से निकाला बल्कि उसे ड्राइवर सीट पर भी बैठा दिया.

जेमिमा की स्लो बैटिंग से नुक़सान

जेमिमा रोड्रिग्ज ने भारत के लिए कई मैच जिताने वाली पारियां खेली हैं. लेकिन शायद यह दिन उनका नहीं था. वह चाहकर भी तेज़ी से रन नहीं बना पा रही थीं. हालांकि क़िस्मत उनका साथ दे रही थी और वह विकेट पर टिकी रहीं.

पहले उन्हें अंपायर ने एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया था, लेकिन रिव्यू उनके पक्ष में गया. इसके बाद उनका एक कैच भी छूट गया. इसके बावजूद जिस रफ़्तार से वह रन बना रही थीं, उससे नहीं लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया को उनके जीवनदान से कोई परेशानी हो रही थी.

जेमिमा ने 18वें ओवर तक 28 गेंदों में 34 रन बनाए थे. इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत ने उन्हें वापस बुलाकर रिचा घोष को बल्लेबाज़ी के लिए भेजा. लेकिन यह फ़ैसला देर से लिया गया. इसी वजह से भारत इसका पूरा फ़ायदा नहीं उठा सका. बेहतर होता कि रिचा को 16 ओवर पूरे होने के बाद भेजा जाता. इससे टीम को फ़ायदा मिल सकता था.

जेमिमा बेहतरीन खिलाड़ी हैं. लेकिन इस प्रारूप में उन्हें तीसरे नंबर पर खिलाना सही नहीं लगता. इस स्थान पर तेज़ बल्लेबाज़ी करने वाली किसी खिलाड़ी को मौक़ा देना बेहतर साबित हो सकता था.

हरमनप्रीत का जलवा भी नहीं बदल सका क़िस्मत

हर खिलाड़ी किसी ख़ास टीम के ख़िलाफ़ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता है. विराट कोहली पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अक्सर अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते रहे हैं. इसी तरह हरमनप्रीत कौर भी ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रही हैं.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 2017 के आईसीसी वनडे विश्व कप में उनकी नाबाद 171 रन की पारी को कोई नहीं भूल सकता. इसी तरह पिछले साल आईसीसी वनडे विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में उन्होंने 88 गेंदों में 89 रन बनाए थे. उस पारी ने भारत को जीत दिलाई थी.

जब जेमिमा की धीमी बल्लेबाज़ी के कारण भारतीय टीम 150 से 155 रन तक पहुंचती नज़र आ रही थी, तब हरमनप्रीत ने आख़िरी ओवर में लगातार तीन छक्के लगाए. उनकी इस बल्लेबाज़ी से भारत का स्कोर 170 रन तक पहुंच गया. लेकिन इस बार उनकी 27 गेंदों पर खेली गई 56 रन की तूफ़ानी पारी भारत को जीत नहीं दिला सकी.

'कमज़ोर गेंदबाज़ी'

स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के लिए इस विश्व कप में कमेंट्री कर रहे किरण मोरे ने मैच के बाद कहा, "बल्लेबाज़ों ने ठीक-ठाक स्कोर बना दिया था, लेकिन हमारे गेंदबाज़ न तो विकेट निकाल सके और न ही रन गति पर रोक लगा सके. इसकी एक वजह टीम में लगातार बदलाव करना भी है. इससे गेंदबाज़ों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है."

उन्होंने कहा, "भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों का कम विकेट लेना भी टीम के लिए मुश्किल बना है. भारत ने लड़ने लायक स्कोर बना लिया था. लेकिन स्मृति मंधाना का 37 गेंदों में 38 रन बनाना इस प्रारूप के हिसाब से सही बल्लेबाज़ी नहीं थी. शेफ़ाली वर्मा पर अकेले रन बनाने की ज़िम्मेदारी डालना सही नहीं था. अगर दोनों तरफ़ से रन बनते तो भारत 15 से 20 रन और बना सकता था. यही रन टीम की क़िस्मत बदल सकते थे."

दीप्ति बनीं सर्वाधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज़

दीप्ति शर्मा भारत को जीत नहीं दिला सकीं, लेकिन उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. वह तीनों फॉर्मेट मिलाकर 356 विकेट लेने वाली भारत की सबसे सफल गेंदबाज़ बन गई हैं. उन्होंने बेथ मूनी को लॉन्ग ऑफ़ पर राधा यादव के हाथों कैच आउट कराया. इसके साथ ही उन्होंने झूलन गोस्वामी के 355 विकेट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.

दीप्ति शर्मा ने छह टेस्ट मैचों में 22 विकेट लिए हैं. उन्होंने 124 वनडे मैचों में 166 विकेट और 149 टी-20 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं. वह विश्व कप में 200 रन और 20 विकेट लेने वाली इकलौती खिलाड़ी हैं. उन्होंने यह उपलब्धि पिछले साल आईसीसी वनडे विश्व कप में हासिल की थी.

अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वालों की सूची में दीप्ति और झूलन के बाद एलिस पेरी 336 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं. इसके बाद श्राइवर ब्रंट 335 विकेट, सोफ़ी एकलिस्टोन 333 विकेट और शबनिम इस्माइल 323 विकेट के साथ मौजूद हैं.

अपना रिकॉर्ड टूटने पर झूलन गोस्वामी ने मैच के दौरान कमेंट्री करते हुए कहा, "मैं दीप्ति को बहुत छोटी उम्र से खेलते हुए देख रही हूं. उसके द्वारा मेरा रिकॉर्ड तोड़ने पर मुझे बेहद ख़ुशी हुई है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.