कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- सरकारी अधिकारियों में ख़ुद को आरएसएस का बताने की होड़ लगी है

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मध्य प्रदेश सरकार में शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को भोपाल में कहा था कि बीजेपी सरकार बनने के बाद हर सरकारी अधिकारी ख़ुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बताने लगता है.

विजयवर्गीय ने कहा कि तेज़ी से बढ़ते इस संगठन में आज 'अच्छे लोगों' की कमी हो रही है.

विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आया है.

यह पहला मौक़ा नहीं है, जब सूबे में अधिकारियों और आरएसएस के जुड़ाव पर विवाद हुआ है.

कांग्रेस ने पहली बार 1981 में सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस शाखाओं में शामिल होने पर रोक लगाई थी.

ठीक ऐसा ही आदेश 2000 में फिर लागू किया गया, जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे. हालांकि, बाद में बीजेपी की सरकार बनने पर इस रोक को हटा दिया गया था.

नौ जुलाई 2024 को भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था, जिसके ज़रिए सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने पर लगे 58 साल पुराने प्रतिबंध को हटा दिया गया था.

अब विजयवर्गीय के बयान पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए सरकार और आरएसएस को घेरना शुरू कर दिया है.

कैलाश विजयवर्गीय ने क्या कहा?

कैलाश विजयवर्गीय ने 26 जून 2026 (शुक्रवार) को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'शालिग्राम तोमर स्मृति कार्यक्रम' में हिस्सा लिया था.

उन्होंने इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस और अधिकारियों से जुड़ा हुआ बयान दिया.

विजयवर्गीय ने कहा, "हम सरकार में हैं तो कोई अधिकारी आता है और कहता है कि सर मैं शाखा में जाता था. अरे भाई तुम अभी जाते हो, हमारी सरकार बनी उसके पहले तो कभी तुमने बताया नहीं."

"हर अधिकारी के मन में कुछ न कुछ रहता है कि मैं भी दिखाऊं कि मैंने भी बेल्ट पहनी है. हर अधिकारी और कर्मचारी यही सोचता है. सरकार आने के बाद सब संघ के हो गए. हर अधिकारी संघ का हो गया. मेरे पिताजी शाखा में जाते थे."

उन्होंने कहा, "एक अधिकारी ने मेरे से यह भी कहा कि मेरे पिता जी शाखा में अध्यक्ष थे, अब मैं उससे क्या बोलूं. जबकि ऐसी तो कोई पोस्ट होती ही नहीं है. अब अपने-अपने तरीक़े से बहुत भीड़ हो गई है. इस भीड़ में अच्छे इंसानों की कमी है."

विजेवर्गीय ने कहा, "शालिग्राम जी अच्छे इंसान थे, देवधर जी अच्छे इंसान थे और सदाशिव जी अच्छे इंसान थे. ऐसे लोग कम ही मिलते हैं. संगठन बढ़ रहा है और कहने के लिए विचारधारा भी बढ़ रही है. लेकिन अगर अच्छे इंसान ही न हों, तो उस विचारधारा के महत्व पर हमें चिंतन और मनन करना चाहिए."

कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर के किसी बीजेपी नेता ने प्रतिक्रिया नहीं दी है.

कांग्रेस ने वियवर्गीय के बयान पर दी ये प्रतिक्रिया

राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे सहमति जताई, लेकिन संघ पर हमलावर रहे.

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने कैलाश विजयवर्गीय का वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है, ''कैलाश जी ने बहुत सही कहा. आज की बीजेपी और अफसरों की कलई खोल दी.''

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विजयवर्गीय के बयान से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "जब ख़ुद मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि अधिकारी-कर्मचारियों में ख़ुद को आरएसएस से जुड़ा बताने की होड़ बढ़ गई है, तो यह साफ़ संकेत है कि सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसा माहौल बना दिया है, जहाँ निष्पक्षता नहीं, बल्कि वैचारिक पहचान को सुरक्षा कवच समझा जा रहा है."

"इससे भी गंभीर बात यह है कि मंत्री जी स्वयं कह रहे हैं कि विचारधारा और संगठन तो मज़बूत हो रहा है, लेकिन अच्छे लोग नहीं आ रहे, बुरे लोग आ गए हैं. अगर बीजेपी के वरिष्ठ मंत्री ही संगठन की गिरती गुणवत्ता और बढ़ते अवसरवाद को स्वीकार कर रहे हैं, तो यह सिर्फ़ एक बयान नहीं, बल्कि बीजेपी सरकार और उसके संगठनात्मक चरित्र का आत्मस्वीकार है."

जून 2023 में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई थी, जब एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें सतना के ज़िला कलेक्टर अनुराग वर्मा और नगर निगम आयुक्त राजेश शाही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में प्रार्थना में भाग लेते दिखाई दिए थे.

शाखा में शामिल होने पर लगी पाबंदी जब हटी

मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस ने साल 2000 में एक आदेश जारी किया था.

इस आदेश में कहा गया था कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी आरएसएस शाखाओं या संगठन की गतिविधियों में शामिल पाया गया तो उस पर एमपी सिविल सर्विस (क्लासिफ़िकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.

हालांकि, इसके बाद सितंबर 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह रोक हटा दी थी. उस समय इस फ़ैसले के पीछे का कारण बताते हुए हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि 2016 में लागू नए कंडक्ट रूल्स ने पहले जारी सभी कार्यकारी निर्देशों को अप्रभावी कर दिया.

अधिकारी ने कहा था, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या जमात-ए-इस्लामी ऐसे राजनीतिक संगठन नहीं हैं जो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हों. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक सांस्कृतिक संगठन है. इसलिए हरियाणा सरकार ने केवल गृह मंत्रालय के निर्देशों को दोहराया है. किसी भी सरकारी कर्मचारी को इन संगठनों से जुड़े रहने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है."

उनका कहना था कि आरएसएस एक 'सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, राजनीतिक इकाई नहीं है. ऐसा प्रतिबंध पूर्वाग्रह के कारण लगाया गया था."

1990 के दशक के मध्य में गुजरात सरकार ने आरएसएस के कार्यक्रमों में कर्मचारियों की भागीदारी पर लगी रोक हटा दी थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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