सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल तोड़ने से इनकार, ड्रिप या मुंह से तरल पदार्थ लेने से किया मना

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सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के जंतर-मंतर से हटाकर सफ़दरजंग अस्पताल ले जाया गया था.

दोपहर 3.30 बजे सफ़दरजंग अस्पताल ने 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम का हेल्थ बुलेटिन जारी किया है.

अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट की ओर से जारी बुलेटिन में बताया गया है कि सोनम वांगचुक ने ड्रिप और मुंह से किसी भी तरह का तरल पदार्थ लेने से मना कर दिया है.

सफ़दरजंग अस्पताल ने बताया है कि सोनम वांगचुक की पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सेचुरेशन स्थिर है और शरीर में पानी की कमी के लक्षण देखे गए हैं.

अस्पताल ने कहा है कि उनके स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में इलाज के लिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उन्हें उचित सलाह (काउंसलिंग) दी जा रही है.

नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर गई है.

पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था और जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

सोनम वांगचुक की पत्नी की मांग क्या है?

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके मुँह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए.

गीतांजलि ने एक्स पर लिखा, ''मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूँ, जहाँ सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है. कृपया उन्हें मुँह के ज़रिए या नसों के माध्यम से कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए.''

गीतांजलि ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ''हमें बताया जा रहा है कि सोनम के शरीर में पोटैशियम का लेवल कम हो गया है और उनकी जान को ख़तरा है. कल पोटैशियम 4.3 था, जो अब 2.9 हो गया है. यहां के डॉक्टर्स का कहना है इससे उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.''

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से यहां (सफ़दरजंग अस्पताल) लाया गया. इसके बारे में न तो उन्हें बताया गया और न ही मुझे. कल शाम ही सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी जांच की थी और उनके सभी स्वास्थ्य संकेत सामान्य थे."

गीतांजलि ने कहा, "अगर सोनम मार्च में शामिल नहीं हो पाएंगे, तो मैं उनकी जगह मार्च का नेतृत्व करूंगी. यह मार्च सोमवार को पहले से तय योजना के मुताबिक़ होगा. सिर्फ़ इसलिए कि सोनम को ज़बरदस्ती यहां लाया गया है, इसका मतलब यह नहीं कि मार्च को रोका जा सकता है."

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे समय तक उपवास करने के कारण उन्हें हल्की कमज़ोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है. फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर है और सभी अन्य स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं.

डॉ चारु बंबा ने कहा, "सोनम वांगचुक शनिवार सुबह क़रीब 7:40 बजे अस्पताल पहुँचे. लंबे समय से उपवास करने की वजह से उन्हें थोड़ी कमज़ोरी है और शरीर में पानी की हल्की कमी है."

डॉ चारु के मुताबिक़, "वांगचुक के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं. उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उनका इलाज जारी है. वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल पहुँचने पर सबसे पहले इमर्जेंसी मेडिसिन विभाग ने उनका इलाज किया. इसके बाद उन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया."

अस्पताल प्रशासन ने बताया, "वांगचुक पूरी तरह होश में हैं. शरीर में पानी की कमी के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर असर के संकेत मिले हैं. इसी वजह से उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा. पहले इसे ठीक किया जाएगा और फिर उनकी हालत की दोबारा जांच की जाएगी."

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट से घोषणा की गई है कि अभिजीत दीपके बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठेंगे.

सीजेपी ने कहा है, ''20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा.

पूरे वाक़ये पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि वह थोड़ी देर के लिए धरना स्थल से बाहर गए थे.

उन्होंने बताया, ''जब मैं यहाँ से सुबह सात बजे फ़्रेश होने के लिए निकला तभी पुलिस के लोग आए और सोनम सर को घसीटकर ले गए. भूख हड़ताल पर बैठे 60 साल के शख़्स को पुलिस ज़बरदस्ती ले गई. जब मैं अपने दोस्त के घर से जंतर-मंतर की ओर आ रहा था, तभी मुझे ख़बर मिली कि सोनम सर को पुलिस ले गई.''

उन्होंने कहा, ''पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की. मैं विदेश से अपने देश लौटा हूँ तो क्या मैं अपराधी हूँ?''

डीसीपी नई दिल्ली ने इस मामले की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा है, ''दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया है.''

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

डीसीपी नई दिल्ली के एक्स अकाउंट से कहा गया है, ''हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की, जिससे हल्की अफ़रातफ़री की स्थिति बनी.''

''हालांकि पुलिस ने अधिकतम संयम बरती और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित ढंग से पूरा किया. हम जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अनुरोध करते हैं कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्वक तरीक़े से ख़ाली कर दें.''

दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को सोनम वांगचुक की सेहत पर नज़र रखने के लिए निर्देश दिया था.

यह पहली बार था, जब किसी अदालत ने इस प्रदर्शन में दख़ल दिया था.

अदालत के निर्देश का मतलब था कि अगर उनकी हालत ख़राब होती है तो उन्हें अस्पताल ले जाया जा सकता है.'

दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए, जिसमें वांगचुक की हालत गंभीर होने से पहले उन्हें जबरन भोजन दिए जाने की मांग की गई थी, अधिकारियों से कहा कि वे डॉक्टरों की राय के आधार पर ज़रूरी क़दम उठाएं.

शॉर्ट वीडियो देखिए

अदालत का यह आदेश 20 जुलाई को प्रस्तावित उस मार्च से कुछ दिन पहले आया था, जिसे सीजेपी ने भूख हड़ताल स्थल से संसद तक निकालने का आह्वान किया है. इस मार्च का उद्देश्य धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को तेज़ करना था.

बेमियादी भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से सोनम वांगचुक का वज़न 9 किलोग्राम से ज़्यादा घट चुका है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वह जल्द ही ऐसी चिंताजनक स्थिति में पहुँच सकते हैं, जहाँ उनके अंगों को नुक़सान होने का ख़तरा है.

भूख हड़ताल के 19वें दिन डॉक्टर सतीश लांबा ने वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए कहा था कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं और उनकी मेडिकल स्थिति फ़िलहाल स्थिर है. हालांकि उन्होंने कहा कि डॉक्टर उनकी हालत पर लगातार नज़र रखे हुए हैं ताकि किसी भी तरह की गिरावट की स्थिति में तुरंत क़दम उठाया जा सके.

सोनम वांगचुक को हटाए जाने पर लोग क्या कह रहे हैं?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद ने संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस के इस क़दम की आलोचना की है. संजय सिंह ने एक्स पर लिखा है, ''ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नही चलता. जिस युवा पर लठ्ठ चला रहे हो, यही आपका तख़्त उखाड़ेगा. सोनम वांगचुक जो पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर हैं, उनकी मांगें सुनने के बजाय जबरन गिरफ़्तार करके हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया.''

समाजवादी पार्टी की सांसद डिपंल यादव ने भी सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने का विरोध किया है.

डिंपल यादव ने कहा, ''सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ़ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है. बीजेपी सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं. यह तानाशाही है.''

जंतर मंतर पर मौजूद एक शख़्स ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''सुबह-सुबह इन लोगों ने डॉक्टर की टीम बोलकर 10 पुलिसवालों को अंदर भेजा. हम समझ गए थे कि शायद पुलिसवाले हैं क्योंकि वे डॉक्टर जैसे दिख नहीं रहे थे.''

''उन्होंने सारे वॉलंटियर्स को कहा कि आप इस जगह से हट जाइए. वॉलंटियर्स ने कहा कि पौने नौ बजे सोनम जी का चेकअप होता है आप उसी समय आइए. अचानक उन्होंने ये कहना शुरू कर दिया कि हाई कोर्ट का ऑर्डर है. सोनम जी को ले जाना होगा.''

उन्होंने कहा, ''अभिजीत दीपके टॉयलेट की तरफ़ गए थे और उन्हें भी इन लोगों ने गिरफ़्तार कर लिया है. इस वजह से वो यहां आ नहीं पा रहे हैं और न उनका फ़ोन लग पा रहा है. पुलिसवालों ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट भी की. पुलिस वाले सिविल ड्रेस में थे और कह रहे थे आप लोग हट जाइए. मारपीट में कुछ लोगों को चोट आई हैं.''

वांगचुक ने जंतर मंतर से हटाए जाने से पहले क्या कहा था?

शुक्रवार को भूख हड़ताल के 20वें दिन के अंत में जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने लोगों से 20 जुलाई को होने वाले सीजेपी की संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि जनता की भागीदारी ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताक़त है.

वांगचुक ने कहा था, "हाँ, मैं अभी भी ज़िंदा हूँ. मेरे शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा ख़त्म हो चुका है. पहले चर्बी ख़त्म हुई, फिर मांसपेशियां. उसके बाद अंग प्रभावित होंगे. आख़िर में दिमाग़. अभी वह समय नहीं आया है."

अपने समर्थकों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा था, "20वां दिन ख़त्म होने वाला है. मैं यह साबित करना चाहता हूँ कि मेरा दिमाग़ अभी भी ठीक तरह से काम कर रहा है."

यह पूछे जाने पर कि क्या इस आंदोलन से जवाबदेही तय होगी या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा, वांगचुक ने कहा कि लोग अक्सर जन आंदोलनों की ताक़त को कम आंकते हैं.

उन्होंने कहा, "मैं आपसे पूछता हूँ, भारत के लोग अपने बच्चों की ज़िंदगी और शिक्षा से ज़्यादा प्यार करते हैं या प्याज से?"

इसके बाद उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में प्याज की बढ़ती क़ीमतों के ख़िलाफ़ जनता के ग़ुस्से से सरकारें तक गिर चुकी हैं.

उन्होंने कहा था, "भारत में तीन बार जन आंदोलन के कारण सरकारें गिरीं. एक बार 1980 में केंद्र सरकार गिरी. 1998 में दिल्ली सरकार गिरी. उसी साल राजस्थान सरकार भी गिरी. और वह आंदोलन किस बात पर था? प्याज की क़ीमतों पर."

सीजेपी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. उसकी मांग है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें, कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच कराई जाए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं.

सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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