झारखंड में स्टूडेंट आंदोलन रहेगा जारी, सरकार के साथ इन शर्तों पर बनी सहमति

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ चल रहे स्टूडेंट आंदोलन का रविवार को 16वां दिन है.

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में बातचीत हुई जिसमें 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और एक उच्च स्तरीय जांच कमिटी बैठाने की मांग पर सहमति बनी है .

बीबीसी संवाददाता सीटू तिवारी के मुताबिक़, देवेंद्रनाथ महतो गुट के प्रवक्ता रविंद्र रवि ने बताया, "सरकार के साथ 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने पर सहमति बनी है. जेपीएससी की दोनों बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025 रद्द किए जाने और परीक्षाओं की सीआईडी, ईडी, रिटायर जज से जांच कराए जाने पर सहमति बनी है."

रविंद्र रवि ने कहा कि स्टूडेंट्स परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने की माँग पर अड़े हुए हैं और सोमवार को विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव करने का एलान किया है.

इससे पहले शनिवार को भी सरकार और स्टूडेंट संगठनों के बीच दिनभर बैठकों का दौर चला.

हालांकि, समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, आंदोलन से जुड़े एक गुट ने सरकार के इस क़दम को 'राजनीतिक पैंतरेबाज़ी' क़रार दिया.

दरअसल, राज्य सरकार ने शनिवार को प्रदर्शनकारी स्टूडेंट संगठनों के अलग-अलग गुटों के साथ बातचीत की. आंदोलनकारियों ने साफ़ किया कि उनकी सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

सरकार की ओर से शनिवार को अलग-अलग स्टूडेंट संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की गई. राज्य सरकार की पांच सदस्यीय समिति ने सबसे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेकेएलएम) नेता देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व वाले गुट से मुलाक़ात की.

महतो पिछले आठ दिनों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनशन पर हैं.

इसके बाद सरकार ने कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधिमंडलों से भी बातचीत की.

बैठक के बाद राज्य मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने रखा जाएगा.

रविवार की वार्ता में किन बातों पर बनी सहमति

देवेंद्रनाथ महतो गुट के एक छात्र नेता रवींद्र पासवान ने पत्रकारों को बताया कि रविवार को हुई वार्ता में सरकार ने स्टूडेंट्स की लगभग सभी मांगों पर सहमति जताई है लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी नहीं सुलझे हैं.

उन्होंने कहा, "यह सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का दूसरा दौर था. ख़ास तौर पर 14वीं जेपीएससी, जेपीएससी बैकलॉग 2023 और जेपीएससी बैकलॉग 2025 परीक्षाओं को लेकर सरकार ने इन तीनों को रद्द करने पर विचार करने का फैसला किया है."

"इसके अलावा, सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी की तरफ़ से आयोजित सभी परीक्षाओं की सीआईडी और ईडी जांच कराने का प्रस्ताव दिया है. सुधारों से जुड़ी हमारी लगभग सभी मांगों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है, सिर्फ एक-दो मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जैसे उम्र सीमा में छूट."

"सीजीएल परीक्षा को लेकर छात्रों ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई. सरकार ने कहा है कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाएगी और यदि वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो ईडी को भी जांच में शामिल किया जाएगा. इसके बावजूद हम छात्र अब भी सीबीआई जांच की मांग पर कायम हैं."

उन्होंने कहा, "प्रदर्शन जारी रहेगा और धरना अभी भी जारी है."

98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बनी- मंत्री सुदिव्य कुमार

सरकार के साथ बातचीत के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, "तीन दिन की बातचीत और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने 14वीं जीपीएससी और 2023-25 बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी अनियमितताओं से निपटने के लिए दो स्तरों पर कार्रवाई करने का फैसला किया."

"आपराधिक पहलुओं की जांच सीआईडी करेगी. जबकि वित्तीय गड़बड़ियों और अवैध लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ईडी जांच की भी सिफ़ारिश की जाएगी. इसके बाद एक फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा और अभियुक्तों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाएगी."

उन्होंने बताया कि ज़रूरी सुधारों को लेकर सरकार विशेषज्ञों की एक समिति बनाएगी.

मंत्री सुदिव्य ने कहा, "सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार ने स्पष्ट कहा कि यह परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कराई गई थी और फ़िलहाल उनकी निगरानी में है, इसलिए सरकार के पास इसे रद्द करने का अधिकार नहीं है."

उन्होंने कहा कि सरकार ने जांच की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन स्टूडेंट्स ने इसे स्वीकार नहीं किया.

मंत्री ने कहा, "छात्रों की उठाई गई 98 प्रतिशत मांगों पर सरकार सहमत हो गई है. बाकी दो प्रतिशत, यानी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग, इसलिए पूरी नहीं हो सकी क्योंकि अदालत के आदेश पर हुई परीक्षा, जिसका परिणाम जारी हो चुका है और जिसमें सफल अभ्यर्थी नौकरी कर रहे हैं, उसे सरकार एकतरफा रद्द नहीं कर सकती."

उन्होंने कहा, "छात्रों में भरोसा पैदा करने के लिए सरकार सीआईडी जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने को तैयार थी, ताकि अगर छात्रों को लगे कि सीआईडी उनकी बात नहीं सुन रही है, तो उनके पास अपनी चिंता रखने का एक माध्यम हो."

इसे पहले मंत्री सुदिव्य ने कहा था कि राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल आईडी (JPSSC.feedback@gmail.com) जारी की है.

उन्होंने कहा कि सरकार सभी स्टूडेंट संगठनों के साथ संवाद कर रही है और सामूहिक निर्णय तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है.

सुदिव्य कुमार ने कहा, "कोई भी स्टूडेंट, व्यक्ति या संबंधित पक्ष इस ई-मेल आईडी पर अपने सुझाव भेज सकता है."

"इन सुझावों के आधार पर सरकार सुधार नीति तैयार करने और सभी की राय के आधार पर सामूहिक निर्णय लेने का प्रयास करेगी."

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आंदोलन स्थल पर आइसा ने बनाया अलग मंच

इसी बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने शनिवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अलग मंच बनाकर आंदोलन को तेज़ करने का एलान किया.

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी प्रदर्शन में शामिल हुईं, उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए.

आइसा के आंदोलन में शामिल होने के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट संगठनों के अलग-अलग मंचों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है.

जेएसएससी-जेएसएससी रिफ़ॉर्म्स मंच और जेपीएससी-जेएसएससी कैंडिडेट्स फ़ोरम 25 जुलाई से इसी स्थान पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

पीयूष मिश्रा ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से की मुलाक़ात

इस बीच, अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने भी शनिवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से मुलाक़ात की. उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया.

धरना स्थल पहुंचकर उन्होंने आंदोलन कर रहे विद्यार्थयों का समर्थन किया और उनकी मांगों के प्रति एकजुटता जताई.

पत्रकारों से बातचीत में पीयूष मिश्रा ने कहा, "मैंने इनमें से कुछ आंदोलनकारियों के इंटरव्यू देखे और उनकी आंखों में दर्द देखा. मैंने उनकी मुश्किलें और उनके आंसू देखे. मेरे यहां आने के लिए बस इतना ही प्रेरणादयक था."

उन्होंने कहा, "मैं युवाओं से बहुत प्यार करता हूं और उनके साथ खड़े होने आया हूं."

पीयूष मिश्रा ने बताया कि वह पिछले तीन-चार दिनों से अपनी क्षमता के हिसाब से अभ्यार्थियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और आंदोलन में साथ खड़े हैं.

उन्होंने कहा कि आर्थिक मदद के साथ-साथ उनके लिए खाना, चटाई और तिरपाल जैसी ज़रूरी चीजें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.

सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा रांची

इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक प्रतिनिधि मंडल भी शुक्रवार को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा और आंदोलन को समर्थन दिया.

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर बताया, "सीजेपी की एक टीम रांची पहुंच गई है. टीम जंतर-मंतर पर आंदोलन के अपने अनुभव का इस्तेमाल झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं की मदद के लिए करेगी. संगठन का नेतृत्व भी जल्द रांची पहुंचेगा."

उन्होंने झारखंड के स्टूडेंट आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें छात्र-छात्राओं पर गर्व है और वे मज़बूती से उनके साथ खड़े हैं.

उन्होंने छात्र-छात्राओं से एकजुट रहकर अपनी लड़ाई जारी रखने की अपील की और कहा कि आंदोलन की सफलता जल्द मिलने वाली है.

एबीवीपी और पुलिस के बीच झड़प

इससे पहले शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इस आंदोलन के समर्थन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास की ओर मार्च किया.

मार्च डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से शुरू हुआ.

मुख्यमंत्री आवास के पास पुलिस बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई.

पुलिस ने क़रीब 8 से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. एबीवीपी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के समर्थन में यह मार्च निकाला था.

नेहा बोरा पर शुक्रवार को स्याही फेंकी गई

शुक्रवार को ही झारखंड विधानसभा की ओर मार्च के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेता नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया.

इस घटना के बाद नेहा बोरा ने बीजेपी और आरएसएस पर आरोप लगाए.

नेहा बोरा ने कहा, "जो बीजेपी और आरएसएस के लोग छात्र-छात्राओं के साथ होने का दावा करते हैं, वही स्टूडेंट मार्च के दौरान मुझ पर स्याही फेंक रहे हैं. अभ्यार्थी जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे."

उन्होंने कहा, "क्या उन्हें लगता है कि स्याही फेंकने से अभ्या और युवाओं का गुस्सा दब जाएगा? हम खुली चुनौती देते हैं कि अगर उभरता हुआ स्टूडेंट आंदोलन उनकी नफ़रत की राजनीति की नींव नहीं हिला पाया, तो यह स्टूडेंट राजनीति के लिए शर्म की बात होगी."

आइसा नेता ने आरोप लगाया कि जिन लोगों का अभ्यार्थियों के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है, वे अपने राजनीतिक हितों के इन मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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