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झारखंड में आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो कौन हैं, स्टूडेंट्स की क्या है मांग
- Author, आनंद दत्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए रांची से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
बीती दो जुलाई को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आए.
कुल 2,204 अभ्यर्थियों ने मेंस यानी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया. मुख्य परीक्षा की तारीख़ 18 से 20 जुलाई तय की गई.
रिज़ल्ट आते ही सवालों का सिलसिला शुरू हो गया. कैटेगरी-वाइज़ कट ऑफ़ जारी नहीं हुई. इसी बीच एक अभ्यर्थी की कथित ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई.
कथित तौर पर इसमें उसने सिर्फ़ 48 सवाल भरे थे, फिर भी उसका चयन मुख्य परीक्षा के लिए हो गया था.
साथ ही जो परिणाम जारी किए गए, उस पर जेपीएससी के अध्यक्ष, सचिव या सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. जो कि नियमानुसार होने चाहिए थे. इसके बाद मुख्य परीक्षा को कैंसल कर दिया गया.
अब इन कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य के स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं.
स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.
आंदोलन की शुरुआत स्टूडेंट लीडर और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो ने 25 जुलाई को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने के साथ की.
शुरुआत में महज़ कुछ सौ लोग जुटे, लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थन और भीड़ बढ़ने लगी.
मोरहाबादी स्थित फुटबॉल स्टेडियम में चल रहे डूरंड कप मैच के चलते ज़िला प्रशासन ने 26 जुलाई को धरनास्थल बदल दिया.
अब यह अटल स्मृति वेंडर मार्केट के नज़दीक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के भीतर चल रहा है. यहां तब से रोज़ाना सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं आ जा रहे हैं.
आगामी 6 अगस्त को स्टूडेंट्स ने विधानसभा घेराव की घोषणा की थी क्योंकि इसी दिन से झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा था. लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है.
इस बीच देवेंद्र महतो ने बीती दो अगस्त से आमरण अनशन की घोषणा कर दी है.
कौन हैं देवेंद्रनाथ महतो?
देवेंद्र रांची ज़िले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहनेवाले हैं. साल 2006 में प्रथम श्रेणी से दसवीं की परीक्षा पास की. इसके बाद साल 2008 में विज्ञान से इंटर और साल 2017 में रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय संस्कृत से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद कुरमाली भाषा से पीजी किया और फिर बीएड भी.
रिटायर्ड सरकारी शिक्षक विशंभर महतो के बेटे देवेंद्र कॉलेज के दिनों से ही स्टूडेंट्स के हितों के मुद्दों को लेकर आंदोलन करने लगे थे.
सबसे पहले साल 2015 में रघुवर दास की सरकार के समय लागू की गई नियोजन नीति के विरोध में उन्होंने आंदोलन शुरू किया. इसके बाद साल 2016 में छात्रवृत्ति घटने के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे.
साल 2019 में उनके जीवन में अहम मोड़ तब आया जब छठे जेपीएससी में कथित गड़बड़ियों को लेकर उन्होंने एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया. इस दौरान उनकी मां दमयंती देवी का निधन हो गया.
देवेंद्र बताते हैं कि इन्हीं आंदोलनों की वजह से साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेल भेज दिया गया. जबकि वो बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे.
जेल से चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें कुल 1.48 लाख वोट आए और वो तीसरे स्थान पर रहे थे. यहां से संजय सेठ सांसद हैं, जो कि वर्तमान में रक्षा राज्यमंत्री भी हैं.
फिर उसी साल नवंबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव में सिल्ली विधानसभा से किस्मत आज़माई.
इस चुनाव में उन्हें जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम ने अपना प्रत्याशी बनाया और उन्हें कुल 44 हज़ार वोट मिले. वो फिर तीसरे स्थान पर रहे.
देवेंद्र के मुताबिक़, स्टूडेंट्स के मुद्दों को लगातार उठाने और आंदोलन करने की वजह से उनके ऊपर इस वक्त 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं.
बीते 12 सालों से देवेंद्र के साथी रहे चंदन महतो उनके बारे में कहते हैं, ''उनके नेतृत्व में हुए स्टूडेंट्स मूवमेंट के दौरान झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (जेएसएससी)-सीजीएल परीक्षा को रद्द किया गया."
"इसी तरह झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा भी पेपर लीक की आशंका के बाद उसे भी रद्द करना पड़ा. स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा और पारदर्शी भर्ती एवं परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर उनका संघर्ष हमेशा जारी रहा है.''
आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्र की तबीयत पर रांची सदर अस्पताल के चिकित्सक लगातार नज़र बनाए हुए हैं.
उनके मुताबिक़, ब्लड प्रेशर लो है, शुगर घट रहा है. साथ ही थकान के अलावा डिहाइड्रेशन की बात उन्होंने कही है.
क्या हैं मांगें?
आखिर ये सब क्यों करना पड़ रहा है? किन मांगों को लेकर वो पहले धरना और फिर आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हुए? देवेंद्र कहते हैं, ''पहली जेपीएससी से लेकर 14वीं तक, सभी परीक्षा विवादों में है. साल 2005-06 में आयोजित हुई दूसरी जेपीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच होने के बावजूद कोर्ट से आज तक उसका अंतिम फैसला नहीं आ सका है.''
अनशन को लेकर जो मुख्य मांगें हैं, वो निम्नांकित हैं:-
- मुख्य मांगों में इस बार, यानी 14वीं जेपीएससी परीक्षा को आयोजित करने वाली कंपनी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के द्वारा पूर्व में आयोजित किए गए सभी परीक्षाओं को रद्द किया जाए. क्योंकि मामले में मुख्य आरोपी और टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (सीजीएल) के ज़रिए खुद नौकरी हासिल की. इसके अलावा अपने भाई और भाई की पत्नी की भी नौकरी लगवाई. यहां तक कि, अभय ने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की पीटी भी पास की थी.
- इसके अलावा पूरे मामले की सीआईडी के अलावा सीबीआई और ईडी के द्वारा भी जांच कराई जाए. फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए, ताकि त्वरित न्याय मिल सके. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि न्याय आगामी तीन महीनों में मिले.
- जेपीएससी और जेएसएससी के सभी भ्रष्ट पदाधिकारियों को हटाया जाए. आगामी होने वाली परीक्षाओं के लिए जेपीएससी और जेएसएससी में वैसे पदाधिकारियों को बहाल किया जाए, जिनका बीते 10 सालों का ट्रैक रिकॉर्ड साफ-सुथरा हो.
- वर्तमान में जो कंपनी परीक्षा आयोजित कर रही है, यानी टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट किया जाए. उसके बाद टीसीएस जैसी कंपनियों को परीक्षा आयोजित कराने का ज़िम्मा सौंपा जाए. ताकि स्टूडेंट्स का विश्वास बहाल किया जा सके.
अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?
बीती 19 अप्रैल को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा राज्यभर में आयोजित हुई.
इसके बाद 2 जुलाई को इसका परिणाम घोषित किया गया. कुल 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों का मुख्य परीक्षा के लिए चयन हुआ. मुख्य परीक्षा की तारीख 18 से 20 जुलाई तय की गई.
परिणाम आने के बाद कथित तौर पर पेपर लीक होने की बात सामने आने लगी. बीती 20 जुलाई को पहले जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी ने छापेमापी कर तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया.
उसी दिन देर शाम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके और जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया.
इसे अगले दिन यानी 21 जुलाई को राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया. इसी तारीख को एफ़आईआर भी दर्ज की गई.
बढ़ते दबाव के बाद, सीएम हेमंत सोरेन ने 23 जुलाई को पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी. सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय सहित कुल आठ जगहों पर छापेमारी की.
इसमें परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
साथ ही जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते से बीते चार दिनों में कुल 32 घंटे से अधिक की पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ अब भी जारी है.
इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की ओर से 25 जुलाई से 29 सितंबर के बीच आयोजित होनेवाली सभी 9 परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं.
इसमें जेपीएससी की मुख्य परीक्षा के अलावा सिविल जज परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक परीक्षा जैसी बेहद अहम भर्तियां शामिल हैं.
इस बीच मुद्दा एक होने के बावजूद स्टूडेंट मूवमेंट दो हिस्सों में बंट चुका है.
आंदोलन की शुरुआत करनेवाले देवेंद्र और उनके दल के नेताओं से यह कह दिया गया कि वो राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं, ऐसे में वो इस आंदोलन से ख़ुद को दूर रखें.
धरनास्थल पर भी दो मंच बन चुके हैं. एक मंच पर वो स्टूडेंट्स हैं, जो खुद को देवेंद्र महतो या उनके समर्थकों से दूरी बनाए रखे हैं. दूसरा मंच देवेंद्र महतो का है, जहां वो अनशन कर रहे हैं.
राज्य सरकार ने भी अब तक स्टूडेंट्स से बात करने के लिए किसी कमेटी का न तो गठन किया है, न ही किसी प्रतिनिधि को बातचीत करने के लिए भेजा है.
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधू तिर्की ने स्टूडेंट्स तक ज़रूर भोजन और पानी पहुंचाया है.
इस बीच, आगामी 6 अगस्त से आयोजित होने वाली झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जेपीएससी मुद्दे पर ज़ोरदार हंगामा होने की पूरी संभावना है.
विपक्षी बीजेपी स्टूडेंट्स के मुद्दों को लगातार समर्थन दे रही है. साथ ही सीबीआई जांच की मांग कर रही है.
देवेंद्रनाथ महतो गुट के मुताबिक़ विधानसभा घेराव पूर्व निर्धारित तारीख़ 6 अगस्त को फ़िलहाल स्थगित किया गया है और नई तारीख़ जल्द घोषित की जाएगी.
वहीं स्टूडेंट्स के दूसरे गुट का नेतृत्व कर रहे पीयूष कुमार का कहना है कि 6 अगस्त को जो घेराव का निर्धारित कार्यक्रम था वो एक राजनीतिक दल का था, इसीलिए वो उससे ख़ुद को अलग रख रहे हैं, ऐसे में उन्होंने 10 अगस्त को घेराव का कार्यक्रम तय किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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