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सीजेपी ने क्या जल्दबाज़ी में प्रोटेस्ट ख़त्म करने का फ़ैसला लिया? - द लेंस
पिछले कुछ हफ़्तों में पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं का बड़ा आंदोलन देखने को मिला, जिसमें छात्रों के साथ अभिभावक, शिक्षक और समाज के दूसरे वर्ग भी जुड़े.
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने.
सरकार ने आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लिया, सुधारों का भरोसा दिया और संसद से एंटी पेपर लीक कानून भी पारित कराया.
हालांकि, बहस अब भी जारी है कि क्या सिर्फ़ कानून कड़ा करने से समस्या ख़त्म होगी या परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करना ज़रूरी है.
विपक्ष और कई आंदोलनकारी यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या आंदोलन समय से पहले ख़त्म कर दिया गया या नहीं.
'द लेंस' के इस एपिसोड में इन्हीं सवालों पर कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा ने सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका, द मोजो स्टोरी की एडिटर बरखा दत्त और द ट्रिब्यून की एसोसिएट एडिटर अदिति टंडन के साथ चर्चा की.
प्रोड्यूसर: मुकुंद झा
वीडियो एडिटर: जमशैद अली ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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