'लाखों बच्चों की बर्बादी का जश्न', धर्मेंद्र प्रधान के ज़ोरदार स्वागत पर छिड़ी बहस

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'धर्मेंद्र प्रधान, ज़िंदाबाद'

'भारत माता की जय'

ये नारे और स्लोगन तब लगे, जब पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मॉनसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए संसद पहुंचे.

जैसे ही अपनी कार से उतरकर वे संसद की ओर बढ़ रहे थे, तभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एनडीए के सांसदों ने उन्हें घेर लिया. उनसे मिलने की, उनसे हाथ मिलाने की होड़-सी लग गई.

ये नज़ारा कुछ ऐसा था, जैसे किसी ऐसे शख़्स का स्वागत किया जा रहा हो, जिसने हाल-फ़िलहाल कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो.

हालांकि, वहीं पर मौजूद विपक्षी सांसदों का धर्मेंद्र प्रधान के प्रति बिल्कुल अलग रुख़ था. उन्होंने उनकी हूटिंग की और उनके विरोध में नारे लगाए.

नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद देश भर में युवाओं ने प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया था, जिसके बाद पिछले सप्ताह उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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लेकिन संसद पहुंचने पर उनका जिस तरह से स्वागत हुआ, वैसा हाल-फ़िलहाल अपने पद से इस्तीफ़ा देने वाले किसी मंत्री का नहीं दिखा. इसे लेकर विपक्ष ने नाराज़गी जताई और सोशल मीडिया यूज़र्स ने हैरानी जताई.

क्या बोले राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे 'लाखों छात्रों के भविष्य की बर्बादी का जश्न' बताया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत के बर्बाद एजुकेशन सिस्टम के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे. उसी सिस्टम ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया. इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं, युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा. और आज उसी व्यक्ति को संसद में बीजेपी माला पहना रही है. यह कोई सम्मान नहीं, लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है. देश का हर छात्र ये देख रहा है. और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा."

वहीं संसद में प्रधान के स्वागत पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा की बीजेपी सरकार के मंत्री बिभूति जेना ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान जैसा मंत्री ओडिशा की शान है. शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई वेलफ़ेयर के काम किए. पेपर लीक जैसी ख़ामियों को दुरुस्त करने के लिए कई क़दम उठाए, दोबारा परीक्षा कराई."

लेकिन विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया यूज़र्स की राय भी बीजेपी के रुख़ से मेल नहीं खा रही है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा, "आज बीजेपी सांसद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत ऐसे कर रहे हैं, मानो उन्होंने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की हो. देश ने पहले भी देखा कि प्रधान ने अपने इस्तीफ़े में पेपर लीक के लिए माफ़ी माँगने की बजाय छात्रों को ही गुमराह होने का आरोप लगाया था और उसके बाद सभी केंद्रीय मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर प्रधान के लिए वाहवाही की. हमारा मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम अत्यंत शर्मनाक है और देश के युवाओं का घोर अपमान है."

जयराम रमेश रमेश ने कहा कि प्रधान का ऐसा स्वागत करके बीजेपी देश के युवाओं और छात्रों को क्या यही संदेश देना चाहती है कि बच्चों पर लाठीचार्ज कराने और पैलेट गन चलवाने के बावजूद प्रधान का काम सराहनीय था?

कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर शमा मोहम्मद ने लिखा, "बीजेपी सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान का 'ज़िंदाबाद' के नारों के साथ स्वागत किया, मानो वही इस पूरे मामले के पीड़ित हों. असल पीड़ित वे 20 से ज़्यादा छात्रों के परिवार हैं, जिन्होंने नीट पेपर लीक के बाद अपने बच्चों को खो दिया, और वे छात्र हैं जिन पर पैलेट गन चलाई गई. बीजेपी का यह रवैया बेहद असंवेदनशील और शर्मनाक है. देश का युवा यह सब देख रहा है."

पत्रकार पीयूष राय ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि प्रधान का स्वागत ऐसे हो रहा था, जैसे वे ख़ुद पेपर लीक के विक्टिम हों.

पत्रकार दिनेश पुरोहित ने लिखा, "इस्तीफ़ा देने के बाद आज पहली बार संसद पहुंचे. बीजेपी नेताओं ने 'धर्मेंद्र प्रधान ज़िंदाबाद' के नारे लगाए. साथ ही शॉल और टोपी पहनाकर स्वागत किया. स्वागत तो ऐसे किया, जैसे ये महाशय कोई जंग जीतकर आए हों."

प्रधान के इस्तीफ़े पर क्या बोले थे बीजेपी नेता

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जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुआई में आयोजित क़रीब एक महीने के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था, तब भी मोदी कैबिनेट के कई मंत्रियों ने उनके काम और शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान की जमकर तारीफ़ की थी.

गृह मंत्री अमित शाह ने तब लिखा था, "धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है."

संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने भी उनकी तारीफ़ करते हुए कहा था, "धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दिया और उनका सार्वजनिक जीवन समर्पण का उदाहरण है."

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेताओं ने प्रधान के इस्तीफ़े के बाद उनकी सराहना की थी.

दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राएं एक महीने से उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे. दिल्ली के अलावा मुंबई, पटना समेत भारत के कई और शहरों में उनके इस्तीफ़े की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन हुए. इसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दिया. लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया में इसे 'प्रधान का बलिदान' क़रार दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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