रूस के ख़िलाफ़ ताइवान भी आया सामने, अमेरिका और ईयू की तरह लगाएगा पाबंदी

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यूक्रेन पर रूस के हमले का ये दूसरा दिन है और दुनियाभर से इसपर प्रतिक्रिया सामने आ रही है. अब ताइवान ने इस हमले की निंदा की है.
साथ ही कहा है कि वो रूस पर प्रतिबंध को लेकर अमेरिका, यूरोपीय संघ और बाक़ी समान विचारधारा वाले देशों के साथ खड़ा है.
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ताइवान के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से किए गए ट्वीट में सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोकने और बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की गई है.
यूक्रेन संकट के बीच ताइवान की बात क्यों हो रही है?
यूक्रेन संकट के बीच पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर भी है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के लिए कितना वफ़ादार है.
ये भी पूछा जा रहा है कि अगर चीन ताइवान पर अपने दावे के लिए ऐसा ही करता है तो अमेरिका का कदम क्या होगा.
दरअसल, ताइवान ख़ुद को आज़ाद राष्ट्र बताता है. ताइवान का अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है. वो अमेरिका को अपना सबसे बड़ा सहयोगी देश मानता है.
वहीं चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है, जो फिर से चीन का हिस्सा बन जाएगा.
फ़िलहाल दुनिया के केवल 13 देश ताइवान को एक अलग और संप्रभु देश मानते हैं. चीन का दूसरे देशों पर ताइवान को मान्यता न देने के लिए कूटनीतिक दबाव रहता है.
हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि "ताइवान के साथ चीन का फिर से एकीकरण ज़रूर होगा." और पिछले कुछ महीनों में चीन के लड़ाकू विमानों ने ताइवान की हवाई सीमा में कई बार घुसपैठ कर ली है.













