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मुश्किल में ब्रिटेन की पीएम लिज़ ट्रस, वित्त मंत्री को किया बर्खास्त

ब्रिटेन में ये चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस जल्द ही अपनी आर्थिक योजना में बड़ा बदलाव कर सकती हैं. इन्हीं अटकलों के बीच उन्होंने वित्त मंत्री क्वाज़ी क्वार्टेंग को बर्खास्त कर दिया है.

लाइव कवरेज

दिनेश उप्रेती, कमलेश मठेनी and अभिनव गोयल

  1. तुर्की में इस नए क़ानून से बढ़ेगी सोशल मीडिया यूजर्स की मुश्किलें

    तुर्की की संसद में नए मीडिया क़ानून को मंज़ूरी दी गई है जो पहले से ज़्यादा सख़्त है. इसके तहत फ़ेक न्यूज़ फ़ैलाने वाले रिपोर्टर्स और सोशल मीडिया यूजर्स को तीन साल तक की सज़ा हो सकती है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक तुर्की में आठ महीने बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले ये नया क़ानून लाया गया है.

    इस क़ानून में 40 संशोधन किए गए और हर संशोधन पर अलग-अलग वोट लिया गया. ये प्रस्ताव राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन की एकेपी पार्टी ने पेश किया था जिसका मुख्य विपक्षी समूहों ने विरोध किया.

    इस क़ानून के तहत सोशल नेटवर्क्स और इंटरनेट साइट्स को फ़र्जी जानकारी देने वाले यूजर्स की निजी जानकारियां देना ज़रूरी होगा.

    कोर्ट फ़ेक न्यूज़ के लिए दोषी पाए गए प्रमाणित रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स को भी एक से तीन साल की सज़ा सुना सकता है.

    सरकार ने एक साप्ताहिक ''डिसइन्फॉर्मेशन बुलेटिन'' प्रकाशित करना भी शुरू किया है जिसमें फर्जी ख़बरों की जानकारी दी जाएगी.

    इस बदलाव को लेकर यूरोप राइट्स ग्रुप की काउंसिल ने कहा है कि 'डिसइन्फॉर्मेशन' की अस्पष्ट परिभाषा और जेल की धमकी सेल्फ-सेंसरशिप को बढ़ावा देगा, खासतौर पर जून 2023 में आने वाले चुनावों को देखते हुए.

  2. नक्सलियों से संबंधों के मामले में प्रोफेसर साईबाबा हाईकोर्ट से बरी

    नक्सलियों के साथ कथित संबंधों के मामले में अभियुक्त जीएन साईबाबा को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने रिहा कर दिया है.

    न्यायाधीश जस्टिस रोहित देव और जस्टिस अनिल पंसारे की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को पलटते हुए ये निर्णय सुनाया है.

    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जीएन साईबाबा को ट्रायल कोर्ट ने साल 2017 में नक्सलियों से संबंधों का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

    प्रोफ़ेसर साईबाबा ने इस फ़ैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में चुनौती देते हुए अपील दर्ज की थी.

    दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर जीएन साईंबाबा को माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस ने मई 2014 में गिरफ्तार किया था.

    प्रोफ़ेसर जीएन साईबाबा बतौर सामाजिक कार्यकर्ता, रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम की भी एक संस्था से जुड़े रहे हैं. वे 'रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट' के उपसचिव रहे हैं.

    'रेवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट' माओवादियों से संबंधों के लिए खुफिया एजेंसियों के निशाने पर रहा था.

  3. मस्जिद के पास जलाई गई कुरान, इस्लामिक संगठनों ने किया कड़ा विरोध

    इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने वेस्ट बैंक के शहर हेब्रोन में पवित्र कुरान जलाने की कड़ी निंदा की है.

    शहर में एक मस्जिद के पास सोमवार को इसराइली बस्ती में रहने वाले लोगों ने मुसलमानों के पवित्र ग्रंथ क़ुरान की प्रतियाँ फाड़ी और जलाई थीं.

    मिस्र की सबसे बड़े धार्मिक संस्थान अल-अजहर अल-शरीफ़ ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी ज़िम्मेदार बताया. वहीं, इस्लामिक देशों के संगठन (आईआईसी) ने भी कुरान जलाने के ख़िलाफ़ कड़ा बयान जारी किया.

    अल-अजहर अल-शरीफ़ ने कहा, ''पवित्र क़ुरान को जलाना ज़ायोनीवाद की बर्बरता, आतंकवाद और घृणित नस्लवाद को दिखाता है. ये अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अस्वीकार्य चुप्पी के तहत हो रहा है.''

    ओआईसी ने कहा, "ओआईसी का महासचिवालय कट्टरपंथियों के इब्राहिमी मस्जिद में पवित्र क़ुरान की कॉपियों को फाड़ने और जलाने की कड़ी निंदा करता है.''

    द सियासत डेली के मुताबिक फ़लस्तीनी समाचार एजेंसी वाफ़ा को हेब्रोन एंडोमेंट के निदेशक निदल अल-जाबरी ने बताया कि इसराइल की बस्ती में रहने वाले लोगों ने कुरान की कई कॉपियां जलाईं और उन्हें इब्राहिमी मस्जिद के पास कचरे में फेंक दिया.

    उन्होंने बताया कि कुरान की सात कॉपियां कचरे में फटी हुई मिलीं, उनमें से एक जलाई गई थी. इससे पहले बस्ती के लोगों ने इब्राहिमी मस्जिद और उसके आसपास के घरों पर हमला किया था.

    यरुशलम के ग्रैंड मुफ़्ती और अल-अक्सा मस्जिद के मौलवी शेख मोहम्मद हुसैन ने भी क़ुरान जलाने का विरोध किया है.

    उन्होंने जोर देकर कहा कि ये घृणित कार्य इस्लाम के ख़िलाफ़ नस्लवादी व्यवहार को दिखाता है. ये लोगों में नफ़रत और हिंसा को भड़काएगा और तनाव को बढ़ावा देगा. उन्होंने ऐसे हमलों पर रोक लगाने की अपील की.

    फ़लस्तीन के न्यायाधीश महमूद अल-हब्बाश ने कहा कि ये क्रूर कदम और इस्लाम के ख़िलाफ़ लड़ाई दुनियाभर में दो अरब मुसलमानों की भावनाओं पर जबरदस्त हमला है और उन्हें अपमानित करना है.

    कुरान जलाने की घटना के जवाब में हेब्रों की केतुन मस्जिद में सोमवार को प्रार्थना के लिए लोगों को बुलाया गया. इसके लिए ट्वीटर पर सार्वजनिक न्योता दिया गया.

  4. रूस-यूक्रेन युद्ध: वो मुद्दा जिस पर भारत, पाकिस्तान और चीन एक साथ हैं

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पर भारत ने एक बार फिर मतदान में हिस्सा नहीं लिया. नए प्रस्ताव में पूर्वी यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में रूस द्वारा आयोजित जनमत संग्रह को अवैध घोषित किया गया है. यह याद रखना चाहिए कि हाल ही में रूस ने जनमत संग्रह के बाद इन क्षेत्रों का अधिग्रहण करने की घोषणा की थी.

    यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने रूस की इस घोषणा को खारिज कर दिया है और इसे एक अवैध कदम बताया है. भारत ने प्रस्ताव पर मतदान न करने को 'सोची-समझी राष्ट्रीय नीति' बताते हुए कहा है कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े विवाद को ख़त्म करने के लिए उठाए जाने वाले सभी क़दमों का समर्थन करने के लिए तैयार है.

    भारत ने कहा है कि समस्या का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए होना चाहिए.

    ग़ैर-हाज़िर रहने पर भारत का तर्क

    प्रस्ताव पर मतदान की प्रक्रिया ख़त्म होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रूचिरा कंबोज ने देश के पक्ष पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत तुरंत युद्ध की समाप्ति और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का हिमायती है.

    रूचिरा कंबोज ने कहा, "शांति का मार्ग अपनाने के लिए कूटनीति के रास्ते खुले रखने होंगे. इसलिए हम गंभीरता से ये उम्मीद करते हैं कि जल्द ही शांति वार्ताएँ बहाल हों ताकि तुरंत युद्ध विराम के ज़रिए संघर्ष का अंत हो. भारत इस दिशा में उठाए जाने वाले हर क़दम का समर्थन करेगा."

    उन्होंने कहा, "इस विषय में और कई ज़रूरी मुद्दे हैं, जिन पर पारित किए गए प्रस्ताव में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है. हमारा मतदान न करने का फ़ैसला एक सोची-समझी राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है." संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रूचिरा कंबोज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को भी दोहराया, जो उन्होंने समरकंद में पुतिन के सामने दिया था. पीएम मोदी ने कहा था कि अब युद्ध का ज़माना नहीं है.

    चीन और पाकिस्तान भी भारत के साथ

    भारत के अलावा चीन, क्यूबा, पाकिस्तान, दक्षिण अफ़्रीका, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम ने भी संयुक्त राष्ट्र में लाए गए प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया. प्रस्ताव में घोषणा की गई है कि रूस ने पूर्वी यूक्रेन के जिन इलाक़ों में सितंबर 23 से 27 के बीच जो कथित जनमत संग्रह करवाया है, वो ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई है.

    जनमत संग्रह के बाद इन इलाकों के अधिग्रहण को अवैध घोषित करते हुए प्रस्ताव कहता है कि इस क़दम की अंतरराष्ट्रीय क़ानून में कोई मान्यता नहीं है और इनसे यूक्रेन के किसी भी हिस्से के मानचित्र को नहीं बदला जा सकता.

    प्रस्ताव में सभी सदस्य देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र की स्पेशल एजेंसियों ने गुज़ारिश की गई है कि वे रूस के अधिग्रहण को मान्यता न दे. प्रस्ताव में ये भी मांग की गई है कि रूस तुरंत यूक्रेन से अपनी सारी फ़ौज वापस बुलाए और उसे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के भीतर ही सीमित रखे.

    भारत ने फिर दोहराया है कि वो यूक्रेन के संघर्ष के फैलने से बेहद चिंतित है, विशेषकर ग़ैर-सैनिक बुनियादी ढाँचे और आम लोगों की मौत चिंता का विषय है.

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रूचिरा कंबोज, "हमने हमेशा कहा है कि इंसानी जान की क़ीमत पर कोई भी समस्या नहीं सुलझाई जा सकती है. जिस ग्लोबल ऑर्डर को हम मानते हैं वो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और यूएन चार्टर पर आधारित है, जिसमें सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान है. इसलिए तुरंत वार्ताओं और कूटनीति के ज़रिए इसका हल निकाला जाना चाहिए."

  5. आईएमएफ़ ने की भारत की तारीफ़, डिजिटल इंडिया को लेकर कही ये बड़ी बात

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने भारत की आर्थिक वृद्धि की तारीफ़ करते हुए कहा कि भारत अंधरे में उजाले की किरण की तरह है.

    आईएमएफ़ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना गियोरग्येवा ने कहा कि भारत इस अंधेरे में एक उजली किरण कहलाने लायक है क्योंकि ये मुश्किल समय में भी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रहा है. सबसे महत्वपूर्ण ये है कि ये वृद्धि संरचनात्मक सुधारों की नीव पर हुई है.

    क्रिस्टलिना गियोरग्येवा से एक प्रेस ब्रीफ़िंग में जी20 अध्यक्षता को लेकर भारत से उम्मीदों को लेकर सवाल पूछा गया था.

    क्रिस्टलिना ने भारत की इस सफलता के लिए डिजिटलीकरण को वजह बताया है.

    उन्होंने कहा कि भारत को डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय सफ़लता मिली है चाहे वो डिजिटल आईडी हो या डिजिटल पहुंच के आधार पर सभी सेवाएं और सहयोग देना. ये भारत की सफ़लता में एक बड़ा कारण बना है.

    उन्होंने कहा, ''देश जी20 में नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है. मुझे पूरी तरह भरोसा है कि भारत अगले साल अपनी अध्यक्षता में आने वाले सालों के लिए दुनिया पर अपनी छाप छोड़ेगा.''

    अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में आईएमएफ़ और विश्व बैंक की बैठक चल रही है.

    इससे पहले, आईएमएफ़ ने विभिन्न देशों की विकास दर का अनुमान जारी किया था जिसमें भारत के लिए वर्ष 2022-23 में 6.8 प्रतिशत और वर्ष 2023-24 में 6.1 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था.

    भारत अगले साल एक दिसंबर, 2022 से एक साल के लिए जी20 की अध्यक्षता करने वाला है.

  6. गुजरात, हिमाचल में चुनावी तारीखों का आज हो सकता है एलान

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक चुनाव आयोग शुक्रवार को दिल्ली में 3 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा.

    इसमें गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो सकता है. अगर निर्वाचन आयोग इन दोनों राज्यों में चुनावी कार्यक्रम की घोषणा करता है तो चुनाव आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी.

    वैसे दोनों राज्यों में पिछले कुछ महीनों से चुनावी हलचल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई नेता हिमाचल और गुजरात के दौरे कर चुके हैं.

    विपक्षी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में कूद चुकी हैं. गुजरात में विधानसभा की 182 सीटें हैं और बीजेपी शासन में है. हिमाचल में भी बीजेपी का शासन है और यहाँ विधानसभा की 68 सीटें हैं.

  7. ज्ञानवापी मामले में कार्बन डेटिंग पर आज आ सकता है फ़ैसला, अब तक क्या हुआ

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

    ज्ञानवापी मस्जिद में कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग करवाए जाने पर फ़ैसला शुक्रवार 14 अक्टूबर को आ सकता है

    वाराणसी की अदालत ने इस मामले की 11 अक्टूबर को सुनवाई की थी और अगली सुनवाई की तारीख़ 14 अक्टूबर मुक़र्रर की गई थी.

    क्या है मामला?

    चार महिला याचिकाकर्ताओं ने बनारस के ज़िला जज की अदालत में सील किए गए वज़ूखाने की कार्बन डेटिंग करने की मांग की थी.

    वैज्ञानिक जांच के ज़रिए याचिकाकर्ता ये पता करना चाहते हैं कि कथित शिवलिंग कितना लंबा, कितना चौड़ा और कितने अंदर तक है. उनका कहना है कि इस जांच के बाद ये साफ हो जाएगा कि ये फव्वारा है या शिवलिंग.

    11 अक्टूबर की सुनवाई में क्या हुआ?

    हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने 11 अक्टूबर को सुनवाई के बारे में बताया था, “विपक्षी (मस्जिद पक्ष) अंजुमन इंतजामिया ने अपनी बात अदालत के सामने रखी. उन्होंने वैज्ञानिक जांच के ख़िलाफ़ अपने प्रार्थना पत्र और एफिडेविट दिए थे. अदालत में उस पर बहस हुई. इसी के आधार पर कोर्ट ने आदेश को सुरक्षित रखते हुए 14 अक्टूबर की तारीख़ फ़ैसले के लिए दी है. उसे कार्बन डेटिंग नहीं कहें, उसे वैज्ञानिक जांच कहें, वो भी बिना शिवलिंग को क्षति पहुंचाए.”

    मुस्लिम पक्ष का क्या है कहना?

    मुस्लिम पक्ष के वकील रईस अहमद कार्बन डेटिंग की अर्ज़ी पर सुनवाई और फैसले को लेकर कहते हैं, “उनका (हिंदू पक्ष का) भी मानना है कि जो फव्वारा है, जिसे वो कथित रूप से शिवलिंग कह रहे हैं, उसकी कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती है. ये वह भी मानते हैं. तो उनका (हिंदू पक्ष ) कहना है कि जो दूसरे तरीक़े हैं उनसे यह जाना जाए कि ये क्या चीज़ है, कैसे है, और कब से है. उसकी टाइमिंग मालूम की जाए."

    "दूसरे तरीक़े का रूप वह बता नहीं पा रहे. वो चाहते हैं कि उसे खोदकर पता किया जाए, कि फव्वारा कितना गहरा है, और क्या है. जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसको संरक्षित और सुरक्षित किया जाए तो हमने यहां कोर्ट में साफ़ कहा कि जब तक मुक़दमा चल रहा है इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है. यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगी. इसकी कार्बन डेटिंग तो हो नहीं सकती क्योंकि ये कोई जीव जंतु है नहीं.”

    सितंबर में बनारस के ज़िला जज की अदालत ने ज्ञानवापी से जुड़े मुक़दमे को चलाने की अनुमति दी थी.

    क्या है कार्बन डेटिंग की जांच?

    कार्बन डेटिंग एक व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है, जिसका उपयोग कार्बनिक पदार्थों की आयु को जानने के लिए किया जाता है, जो चीज़ें कभी जीवित थीं.

    हालांकि अत्यंत प्रभावी, कार्बन डेटिंग को सभी परिस्थितियों में लागू नहीं किया जा सकता है. विशेष रूप से, इसका उपयोग निर्जीव चीजों की उम्र निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता है, जैसे कि उदाहरण के लिए चट्टानें.

    क्या ऐतिहासिक ढांचे की कार्बन डेटिंग हो सकती है?

    यह समझने और जानने के लिए बीबीसी ने लखनऊ के बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉक्टर राजेश अग्निहोत्री से बात की.

    उन्होंने बीबीसी को बताया कि रेडियो कार्बन डेटिंग एकमात्र तरीक़ा है जिसके माध्यम से सभी जीवित वस्तुओं की उनके मौत के बाद उनकी आयु के बारे में जानकारी मिल सकती है. इस जानकारी को बाद में पुरातात्विक जानकारी से जोड़ कर देखा और समझा जा सकता है.

    डॉक्टर राजेश अग्निहोत्री ने बीबीसी को बताया, "पत्थरों और धातुओं की कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती है क्योंकि उनमें कार्बन नहीं होता है. लेकिन जब निर्जीव वस्तुओं की स्थापना होती है तो उनके साथ दूसरे जैविक सामान जैसे अनाज, कपड़े, लकड़ी, रस्सी जैसी कोई दूसरी चीज़ें भी मिल जाती हैं जिनकी कार्बन डेटिंग हो सकती है."

  8. पाकिस्तान के वित्त मंत्री का अमेरिका में विरोध, कहा- ''तुम चोर हो, झूठे हो''

    पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार को अमेरिका के वॉशिंगटन में एयरपोर्ट पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा. उन्हें एयरपोर्ट पर एक शख़्स ने 'झूठा' और ''चोर'' कहकर संबोधित किया.

    इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

    वीडियो में सुनाई दे रहा है कि एक शख़्स मंत्री इशाक डार को 'झूठा' कहकर पुकार रहा है. अपने साथियों के साथ वहां से निकल रहे इशाक डार पलटकर उस शख़्स को कह रहे हैं, ''तुम झूठे हो.''

    तब वो शख़्स पलटकर कहता है कि 'तुम चोर हो'. इससे डार के साथ मौजूद एक अधिकारी भड़क जाता है और अपशब्द कह रहे शख़्स को गालियां देने लगता है. इस बीच दूसरे लोग इशाक डार को वहां से ले जाते हैं.

    इस पूरी घटना को रिकॉर्ड करने वाला शख़्स भी कैमरे पर नज़र आता है.

    इससे पहले सितंबर में पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगज़ेब को लंदन में एक कॉफ़ी शॉप में कुछ लोगों ने घेर लिया था और उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की थी. इसका भी एक वीडियो सामने आया था जिसमें कुछ लोगों ने मरियम औरंगज़ेब को 'चोरनी' कहकर भी संबोधित किया था.

    दावा किया गया था कि मरियम औरंगज़ेब को घेरने वाले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई के समर्थक थे.

    हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इशाक डार को अपशब्द कहने वाले शख़्स का पीटीआई से संबंध है या नहीं.

    इशाक डार वॉशिंगटन में चल रहीं आईएमएफ़ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में हिस्सा लेने पहुंचे थे. पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट ले जूझ रहा है और उसे आईएमएफ़ से मदद मिलने की उम्मीद है.

  9. ब्रेट ली ने चयनकर्ताओं के इस फ़ैसले पर जताई हैरानी, कहा- भारत ने की बड़ी ग़लती

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ ब्रेट ली ने हैरानी जताई है कि भारतीय चयनकर्ताओं ने उमरान मलिक को क्यों टी20 वर्ल्ड कप के लिए नहीं चुना.

    भारत का तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने से कमज़ोर दिख रहा है.

    टीम में बुमराह की जगह लेने के लिए मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और शार्दुल ठाकुर को ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है, हालाँकि 15 खिलाड़ियों में किसे जगह मिलनी चाहिए, इस बारे में टीम प्रबंधन ने अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है.

    ब्रेट ली के अनुसार उमरान को टीम में नहीं रखना भारतीय टीम की सबसे बड़ी ग़लती है. ब्रेट ली ने ख़लीज टाइम्स से बात करते हुए कहा, "उमरान 150 किमी. प्रति घंटा से ज़्यादा की रफ़्तार से गेंद डाल रहे हैं. जब आपके पास दुनिया की सबसे अच्छी कार है तो आपने उसे गैराज में क्यों रखा है. ऐसे में उस कार के होने का क्या मतलब है? मलिक को टी20 विश्व कप के लिए टीम में ज़रूर रखना चाहिए था."

    टी 20 वर्ल्ड कप की मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया कर रहा है, यह टूर्नामेंट 16 अक्टूबर से शुरू होगा. भारत का पहला मुक़ाबला 23 अक्टूबर को परंपरागत प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से है. ऑस्ट्रेलिया के हालात में तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका अहम बताई जा रही है.

    ब्रेट ली ने कहा, "ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में बल्लेबाजों को 140 किमी. प्रति घंटे की गेंद खेलना मुश्किल हो जाता है और उमरान तो 150 से ज्यादा की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करते हैं. फिर भी वह टीम का हिस्सा नहीं हैं. हां वो अभी नए हैं और थोड़े कच्चे भी, लेकिन वह 150 से ज्यादा की रफ्तार से गेंद फेंकते हैं. उन्हें ऑस्ट्रेलिया ज़रूर ले जाना चाहिए था."

    उमरान ने 2022 के इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी गेंदबाज़ी से प्रभावित किया था. 22 साल के उमरान ने सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से खेलते हुए 14 मैचों में 22 विकेट चटकाए थे. ख़ास बात ये रही थी कि वह अपने गेंदबाज़ी स्पैल में अक्सर 150 किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा की रफ़्तार से गेंद फेंकते नज़र आए थे.

  10. ज़ूम को लेकर सरकार ने दी चेतावनी, इस्तेमाल करने वालों को है ये ख़तरा

    केंद्र की मोदी सरकार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म ज़ूम को लेकर गंभीर ख़तरे की चेतावनी जारी की है. चेतावनी में कहा गया है कि सिस्टम पर हमला करने वाले उसमें घुसकर नुक़सान पहुंचाने वाली गतिविधियां कर रहे हैं.

    सरकारी संस्थान इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) ने गुरुवार को एक सलाह जारी करते हुए ज़ूम उत्पादों की कई खामियों को लेकर आगाह किया है. ज़ूम के दो वर्जन (सॉफ्टवेयर) में ये खामियां पाई गई हैं.

    सर्ट-इन ने ज़ूम में मौजूद खामियों को काफ़ी गंभीर बताया है. इनके ज़रिए एक प्रमाणित हमलावर सुरक्षा पाबंदियों को पार कर सिस्टम में मनमाने कोड का इस्तेमाल या सेवा शर्तों से इनकार कर सकता है.

    हमलावर ज़ूम क्लाइंट में चल रहे ज़ूम एप्स से जुड़ सकता है और उन्हें नियंत्रित कर सकता है. वह ज़ूम मीटिंग में हिस्सा लेने वालों तक ऑडियो और वीडियो पहुंचने से रोक सकता है या बीच में रुकावटें पैदा कर सकता है.

    सर्ट-इन को सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधित) क़ानून, 2008 में शक्तियां दी गई हैं जो इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करता है.

    इसका काम कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं पर नज़र रखना, संवेदनशीलता का पता लगाना और आईटी सुरक्षा को मजबूत करना है. यह बग, हैकिंग और फिशिंग हमलों की जानकारी देता है.

  11. अमेरिका: उत्तर कैरोलिना में गोलीबारी, 5 की मौत

    अमेरिका के उत्तर कैरोलिना में गुरुवार को हुई गोलीबारी की घटना में पाँच लोगों की मौत हो गई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल है.

    ख़बरों के मुताबिक घटना स्थानीय समयानुसार शाम करीब 5 बजे हुई.

    नॉर्थ कैरोलिना की मेयर मैरी एन बाल्डविन ने बताया कि गोलीबारी की इस घटना में दो अन्य लोग घायल भी हुए हैं, जिसमें से एक पुलिस अधिकारी है.''

    मेयर ने घटना के बारे में और ज़्यादा जानकारी तो नहीं दी, लेकिन कहा, "हमें अमेरिका में इस पागलपन वाली हिंसा को रोकना होगा."

    माना जा रहा है कि संदिग्ध हमलावर एक गोरा किशोर है और उसने एक लंबी बंदूक से गोलियां चलाईं. इस शख़्स के अलावा अभी किसी और को हिरासत में नहीं लिया गया है.

  12. इलेक्टोरल बॉन्ड के ख़िलाफ़ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

    चुनावी बॉन्ड के ज़रिये राजनीतिक दलों को धन उपलब्ध कराने की अनुमति देने संबंधी क़ानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा.

    केंद्र सरकार ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के प्रयास के तहत राजनीतिक दलों को दी जाने वाली नकद राशि के विकल्प के तौर पर बॉन्ड की शुरुआत की थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है.

    एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कुछ अन्य लोगों ने इस मामले में याचिका दाखिल की है.

    प्रशांत भूषण याचिकाकर्ताओं की ओर से 5 अप्रैल को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना की कोर्ट में पेश हुए थे और कहा था कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी जल्द से जल्द सुनवाई की जानी चाहिए.

  13. नमस्कार,बीबीसी हिंदी के लाइव पेज में आपका स्वागत है.

    बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज में आपको दिनभर ताज़ा और अहम ख़बरें मिलेंगी.

    ये लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. 13 अक्टूबर के अपडेट्स के लिए आप यहां क्लिककर सकते हैं.

    शुरुआत आज की कुछ बड़ी ख़बरों से-

    • चुनावी बॉन्ड स्कीम के ख़िलाफ़ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज.
    • प्रियंका गांधी हिमाचल में कांग्रेस की 'परिवर्तन प्रतिज्ञा रैली' में शामिल होंगी.
    • भारत और मोरक्को के बीच अंडर-17 विमेंस फीफा वर्ल्ड कप का मुक़ाबला.
    • भारत की 5जी टेक्नोलॉजी स्वदेशी है, दूसरे देशों को दी जा सकती है- निर्मला सीतारमण.
    • इंफोसिस ने शेयर बायबैक की घोषणा की, पिछले 5 सालों में चौथी बार बायबैक.
    • ज्ञानवापी मस्जिद मामले में शिवलिंग जैसे ढांचे की कार्बन डेटिंग पर आज फ़ैसला आ सकता है.