भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. संक्रमण पर काबू पाने के लिए पाबंदियों का दौर शुरू हो गया है. अमेरिका और फ्रांस में नए मामलों का नया रिकॉर्ड कायम हो चुका है.
वहीं, एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि ओमिक्रॉन की चुनौती से निपटना आसान नहीं है. भारत में भी ओमिक्रॉन और कोरोना के दूसरे वैरिएंट से जुड़े केस बढ़ने के बाद ये सवाल किया जा रहा है कि क्या ये संक्रमण की तीसरी लहर की दस्तक है?
कई एक्सपर्ट इस सवाल को पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर रहे हैं.
देश के कुछ हिस्सों में भले ही अब भी भीड़ भरी राजनीतिक रैलियां जारी हों लेकिन सरकारों ने पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया है.
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को येलो अलर्ट का एलान किया था और आज राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट कल से दोगुना यानी एक फ़ीसदी पर पहुंच गया है.
देश में फिलहाल कोरोना के कुल एक्टिव केस क़रीब 77 हज़ार हैं. इनमें से 9,195 नए केस 24 घंटे में सामने आए हैं. भारत में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के 781 मामले सामने आए हैं. सबसे ज़्यादा 238 संक्रमित दिल्ली से हैं.
महाराष्ट्र में ये संख्या 167 है. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि मुंबई में पॉजिटिविटी रेट 4 फ़ीसदी है.
वहीं, राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने बताया कि पिछले हफ़्ते जहां 150 नए केस रोज आ रहे थे अब ये संख्या दो हज़ार केस रोजाना तक पहुंच रही है. बुधवार को अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 2510 नए मामले रिपोर्ट हुए हैं.
तमिलनाडु के हेल्थ सेक्रेटरी जे राधाकृष्णन के मुताबिक चेन्नई में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और टेस्ट की संख्या दो गुनी कर दी गई है. सौ फ़ीसदी कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है.
बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के प्रोफ़ेसर श्रीनाथ रेड्डी ने बीबीसी से कहा कि राहत सिर्फ ये है कि अब तक ओमिक्रॉन से जुड़े मामलों में गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं.
श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि हम केस बढ़ते हुए देख रहे हैं. ख़ासकर बड़े शहरों में मामले बढ़ रहे हैं. मुंबई में 70 प्रतिशत का उछाल आया है. दिल्ली में 50 फीसदी मामले बढ़े हैं. हम जानते हैं कि ये बहुत संक्रामक वैरिएंट है. लेकिन अभी अस्पतालों में भीड़ नहीं है. ज़्यादातर केस में मामूली लक्षण दिखे हैं. ये राहत की बात है.
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि मामूली लक्षण होने के बाद भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से जुड़ा जोखिम कम नहीं है.
अमेरिका में जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ डायरेक्टर लॉरेंस गॉस्टिन भी कहते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़ी चुनौती पेश कर रहा है.
प्रोफेसर लॉरेंस ने कहा कि ये धरती का सबसे संक्रामक रोगाणु हो सकता है. हो सकता है कि ये इतिहास का सबसे ज़्यादा संक्रामक वायरस बन जाए. ये धरती पर मौजूद हर इंसान को प्रभावित कर सकता है. अब सवाल ये है कि क्या हम इसके साथ रह सकते हैं.
"अब हमें ये पता लगाना है कि क्या ये गंभीर बीमारी की वजह बन रहा है. क्या इसकी वजह से अस्पताल जाना पड़ रहा है. क्या ये मौत की वजह बन रहा है और उसके मुताबिक बचाव के तरीके आजमाए जाने चाहिए. हमें इसी दिशा में सोचना चाहिए."
प्रोफ़ेसर लॉरेंस ने जैसे आगाह किया, वैसा अमेरिका और यूरोपीय देशों में दिख भी रहा है. अमेरिका में एक दिन में कोरोना के नए मामले सामने आने का नया रिकॉर्ड कायम हुआ.
देश में सोमवार को साढ़े चार लाख नए केस दर्ज हुए. यूरोप के कई देश भी ओमिक्रॉन वौरिएंट पर रोक लगाने में जूझ रहे हैं. फ्रांस में एक दिन में करीब डेढ़ लाख नए केस मिले.
इटली, ग्रीस, पुर्तगाल और इंग्लैंड में भी रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं. ये माना जा रहा है कि क्रिसमस की वजह से मामले दर्ज करने में हुई देरी भी केस की संख्या बढ़ने की एक वजह हो सकती है.