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तुर्की: मंहगाई दर 20 फीसद हुई, करेंसी लीरा में 5 प्रतिशत की और गिरावट

तुर्की की मुद्रा लीरा में दुनिया की प्रमुख करेंसियों के मुकाबले भारी गिरावट दर्ज की गई है.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे, पंकज प्रियदर्शी and विभुराज

  1. हांगकांग चुनाव में चीन समर्थक उम्मीदवारों ने किया जीत का दावा

    चीन समर्थक उम्मीदवारों ने हांगकांग के विधान परिषद (लेगको) चुनाव में भारी जीत का दावा किया है. इस चुनाव में अब तक का सबसे कम मतदान हुआ है.

    चीन के हांगकांग चुनाव प्रणाली में व्यापक बदलाव लागू करने के बाद ये पहला लेगको चुनाव है. इन बदलावों ने हांगकांग का राजनीतिक परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है.

    चीन ने ‘राष्ट्रभक्त’ प्रस्ताव पारित किया जो चीन को प्रत्येक उम्मीदवार की जांच करने का हक़ देता है.

    चीन के अधिकारियों का तर्क है कि स्थिरता के लिए इस बदलाव की ज़रूरत है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे हांगकांग में लोकतंत्र कमजोर किया गया है.

    आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ केवल 30.2% मतदाताओं ने मतदान में भाग लिया.

    इसी साल मार्च में चीन ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत 'देशभक्त ही हांगकांग की सत्ता चलाएंगे.' इस प्रस्ताव ने लेगको के मूल स्वरूप को ही बदल दिया है.

    सबसे बड़ा बदलाव ये था कि चीन ने हांगकांग में सीधे तौर पर जनता द्वारा चुने जाने वाले प्रतिनिधियों की संख्या कम कर दी.

    पहले 50 फ़ीसदी सदस्यों का चुनाव सीधे मतदान से होता था. अब जनता सिर्फ़ 22 फ़ीसदी सदस्य ही चुन सकेगी.

    अब सभी उम्मीदवारों को एक स्क्रीनिंग समिति से अनुमोदन लेना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे चीन के आलोचकों की उम्मीदवारी ख़ारिज करना आसान हो गया है.

    नए नियमों ने चुनाव समिति को भी अधिक शक्तियां दी हैं. इस अलग समूह में भी चीन समर्थित लोग ही हैं.

    साल 2019 में हुए लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद से ही चीन हांगकांग पर अपना नियंत्रण मज़बूत कर रहा है.

    इन नए क़दमों से चीन ये सुनिश्ति कर रहा है कि सत्ता के हर स्तर पर उसके वफ़ादार लोग ही हों.

  2. उत्तर कोरिया ने 11 दिन तक लोगों के हंसने और ख़रीदारी करने पर लगाया बैन

    उत्तर कोरिया के पूर्व नेता और किम जोंग उन के पिता, किम जोंग-इल की 10वीं पुण्यतिथि पर 11 दिन के शोक का एलान किया गया है.

    शुक्रवार को इस शोक का ऐलान करते हुए उत्तर कोरिया ने अपने नागरिकों के हंसने, शराब पीने और ख़रीदारी करने पर 11 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया.

    उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज़ एजेंसी केसीएनए वॉच के मुताबिक़ किम जोंग-इल के सम्मान में पूरा देश उन्हें शांत श्रद्धांजलि देगा. इस दौरान गाड़ियों और ट्रेनों को हॉर्न बजाने की मनाही है.

    टेलीग्राफ़ यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, देश में कोई हंस नहीं सकता, मनोरंजन की गतिविधियां नहीं कर सकता और ख़रीदारी भी नहीं कर सकता.

    नाम ना छापने की शर्त पर एक उत्तर कोरियाई स्त्रोत अख़बार को बताया कि अगर इन 11 दिनों में किसी के घर कोई मौत हो जाती है तो रोने की इजाज़त नहीं है और शव को देश में शोकावधि समाप्त होने यानि 11 दिन बाद ही घर से निकाला जा सकता है.

    अगर इस शोक अवधि में किसी का जन्मदिन भी पड़ता है जो उसे जन्मदिन तक मनाने की इजाज़त नहीं है.

    17 दिसंबर की दोपहर को पूरे देश में एक साथ सायरन बजाया गया और देश के लोगों ने तीन मिनट के लिए सूर्य के कुमसुसान पैलेस की दिशा में खड़े होकर लीडर को मौन श्रद्धांजलि अर्पित की.

    जब किम जोंग-इल की मौत 17 दिसंबर, 2011 को हुई थी तो उनकी मौत के दो दिन तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया था. दो दिन बाद सरकारी मीडिया पर ये बात सार्वजनिक की गई.

  3. बीबीसी पड़ताल: म्यांमार सेना ने की नागरिकों की सामूहिक हत्या

    बीबीसी की एक पड़ताल में सामने आया है कि म्यांमार की सेना ने जुलाई में नागरिकों की सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया, इन नरसंहारों में कम से कम 40 लोग मारे गए.

    चश्मदीदों और इस हादसे से बच निकलने वाले लोगों ने बीबीसी को बताया कि सेना के लोग जिसमें 17 साल की उम्र तक के सैनिक भी शामिल थे, वह पहले गांव वालों को चारों ओर से घेर लेते और फिर मर्दों को परिवार से अलग कर उनकी ह्त्या की जाती.

    हत्याओं के वीडियो और तस्वीरें इस बात की तस्दीक़ करती हैं कि लोगों की हत्या से पहले उन्हें प्रताड़ित किया गया और इसके बाद उन्हें संकरी क़ब्र बना कर दफ़्न कर दिया गया.

    ये हत्याएं इस साल जुलाई में कानी टाउनशिप की चार अलग-अलग घटनाओं के दौरान की गईं, कानी- मध्य म्यांमार के सागिंग ज़िले का एक छोटा इलाक़ा है जो तख़्तापलट कर सत्ता पर क़ाबिज़ हुई सेना का विपक्षी गढ़ माना जाता है.

    म्यांमार में सेना ने फ़रवरी में तख़्तापलट करके सत्ता को जबरन हासिल किया. इस असंवैधानिक गतिविधि में आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर उन्हें बंदी बना लिया गया. इसके बाद सेना को नागरिकों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है.

  4. कोरोना: डॉक्टर फ़ाउची की चेतावनी, क्रिसमस में यात्रा से बढ़ेगा ओमिक्रॉन का संक्रमण

    अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर फ़ाउची ने कहा है कि क्रिसमस के दौरान की जाने वाली यात्रा से कोविड -19 का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन और भी ज़्यादा फैलेगा, यहां तक कि उनमें भी जिनका टीकाकरण पूरी तरह से हो चुका है.

    डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने रविवार को एनबीसी चैनल के एक कार्यक्रम में कहा, ‘’इसमें कोई संदेह नहीं है कि ओमिक्रॉन में फैलने की असाधारण क्षमता है.‘’

    महामारी पर अमेरिकी सरकार को सलाह देने वाले डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि ये वेरिएंट अब "दुनिया भर में काफ़ी उग्र" हो चुका है.

    जैसे-जैसे ये तेज़ी से म्यूटेट होने वाला वेरिएंट फैल रहा है, कई देश कड़े क़दम उठा रहे हैं. यूरोप में, फ़्रांस और जर्मनी ने यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है, वहीं नीदरलैंड्स ने क्रिसमस पर सख़्त लॉकडाउन लगाया है.

    कई देशों की सरकारें अपने कोविड बूस्टर टीकाकरण कार्यक्रमों में तेज़ी ला रही हैं क्योंकि शोधकर्ताओं का कहना है कि बूस्टर डोज़ से गंभीर बीमारी से बचाव में लगभग 85 फ़ीसदी सुरक्षा मिल सकती है.

    रविवार को डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि अमेरिका में तेज़ी से फैलते ओमिक्रॉन संक्रमण का देश भर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

    उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, " अगर हालात ऐसे ही रहे, जैसे वे अभी नज़र आ रहे हैं, तो हमारे अस्पतालों पर तनाव बहुत बढ़ने वाला है."

    फ़ाउची ने कहा कि लोगों को चेहरे पर मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियां बरतने की ज़रूरत है. उन्होंने अमेरिकियों से टीके और बूस्टर लेने की भी अपील की.

    उन्होंने कहा, ‘’ एक शख़्स जिसने टीका और बूस्टर डोज़ ली है और कोई ऐसा आदमी जिसने बिल्कुल भी टीका नहीं लिया दोनों में संक्रमण की गंभीरता में बड़ा अंतर होता है.‘’

    शुक्रवार को व्हाइट हाउस की प्रेस वार्ता में, डॉक्टर फ़ाउची ने कहा था कि बिना टीकाकरण वाले लोगों पर गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने का जोख़िम बहुत अधिक होता है.

  5. नमस्कार!

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