वामपंथी उम्मीदवार ग्रैबिएल बोरिक चिली के राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल करके देश के अब तक के सबसे नौजवान नेता बन गए हैं.
अब तक चिली के चुनावों में कड़े मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी लेकिन 35 साल के पूर्व प्रोटेस्ट लीडर ने अपने विरोधी उम्मीदवार और धुर दक्षिणपंथी नेता एंटोनियो कास्ट को दस अंकों से भी ज़्यादा अंतर से मात दी.
ग्रैबिएल बोरिक ने अपने समर्थकों से लोकतंत्र की देखभाल करने का वादा किया है और साथ ही ये भी कहा है कि वो चिली में नवउदारवादी आर्थिक मॉडल पर रोकथाम लगाएंगे.
ग्रैबिएल एक ऐसे देश का नेतृत्व संभालने जा रहे हैं जो हाल के सालों में ग़ैरबराबरी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण उथल-पुथल से गुजरा है.
ग्रैबिएल की जीत के बाद राजधानी सैंटियागो की सड़कों पर जश्न का माहौल देखा जा सकता है. उनके समर्थक अपने गाड़ियों की हॉर्न बजाते और झंडे लहराते हुए देखे जा सकते हैं.
अपने भाषण में ग्रैबिएल बोरिक ने कहा कि वे अपना जिम्मेदारी के साथ करेंगे और कुछ चुनिंदा लोगों के विशेषाधिकार के ख़िलाफ़ सख़्त रुख अपनाएंगे.
अपने समर्थकों से उन्होंने कहा, "हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है. मैं जानता हूं कि आने वाले सालों में देश का भविष्य दांव पर रहेगा. इसलिए मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि मैं एक ऐसा राष्ट्रपति बनूंगा जो लोकतंत्र की परवाह करता है और वो इसे ख़तरे में नहीं डालेगा. जो बोलने से ज़्यादा सुनेगा, एकीकरण पर जोर देगा और लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों का ख्याल रखेगा."
चिली के राष्ट्रपति चुनावों के आधिकारिक परिणामों के अनुसार ग्रैबिएल बोरिक को 56 फीसदी मत हासिल हुए हैं जबकि उनके विरोधी को महज 44 फीसदी.
दोनों ही उम्मीदवारों ने देश के लिए लोगों के सामने पूरी तरह से अलग-अलग एजेंडा सामने रखा था. दोनों ही उम्मीदवार ऐसे राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखते थे जो पहले कभी मुल्क की सत्ता पर काबिज़ नहीं रहे थे.
चिली लातिन अमेरिकी की सबसे स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन इसके बावजूद ये दुनिया की सबसे अधिक आर्थिक विषमता वाले देशों में शुमार है.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, चिली के 25 फीसदी संसाधनों पर एक फ़ीसदी आबादी का नियंत्रण है.
ग्रैबिएल बोरिक ने सामाजिक अधिकारों का विस्तार करके इस ग़ैरबराबरी की समस्या का हल निकालने का वादा किया है.
उन्होंने चिली की पेंशन व्यवस्था में सुधार की बात कही है. साथ ही वे साप्ताहिक काम के घंटे को 45 से कम करके 40 करना चाहते हैं.