क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगा सकती है सरकार, बजट में हो सकता है कानून में बदलाव
केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को टैक्स के दायरे में लाने के लिए आयकर कानूनों में बदलाव पर विचार कर रही है और कुछ बदलाव के साथ ये अगले साल के बजट का हिस्सा बन सकती हैं.
लाइव कवरेज
अभिजीत श्रीवास्तव, भूमिका राय and अनंत प्रकाश
तत्काल वापस नहीं होगा किसान आंदोलनः संयुक्त किसान मोर्चा

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संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी की घोषणा का स्वागत किया लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वो चल रहे आंदोलन को तुरंत वापस नहीं लेंगे.
संयुक्त किसान मोर्चा ने ये भी कहा कि विरोध प्रदर्शन सिर्फ़ नए कृषि क़ाननों के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि फ़सलों के लाभकारी दाम की वैधानिक गारंटी के लिए भी था, जिस पर अभी भी कुछ फ़ैसला नहीं हुआ है.
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एसकेएम तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने के सरकार के फ़ैसले का स्वागत करता है लेकिन वे संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने तक इंतज़ार करेंगे.
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एसकेएम ने कहा कि हम सभी तीन किसान विरोधी क़ानूनों को निरस्त करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़ैसले का स्वागत करते हैं लेकिन घोषणा के प्रभावी होने की इंतज़ार करेंगे. और अगर ऐसा होता है तो ये भारत में एक साल से अधिक समय तक चले किसान संघर्ष की ऐतिहासिक जीत होगी.
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- देश के किसानों को नमन

मोदी के पास और कोई विकल्प नहीं था: ओवैसी

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने पर तंज़ करते हुए पीएम मोदी को निशाने पर लिया है. ओवैसी एक शेर में लिखा है, दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे-कैसे, कलाम आते हैं दरमियाँ कैसे-कैसे, ज़मीन-ए-चमन गुल खिलाती है क्या-क्या, बदलता है रंग आसमाँ कैसे-कैसे.''
ओवैसी ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, ''कृषि क़ानून शुरू से ही असंवैधानिक था. सरकार के अहंकार के कारण किसानों को सड़क पर उतरना पड़ा. अगर सरकार बाल हठ नहीं करती तो 700 से ज़्यादा किसानों की जान नहीं जाती. किसान आंदोलन को बधाई. पंजाब और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की पतली हालत को देखते हुए मोदी के पास और कोई विकल्प नहीं था.''
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर साधा निशाना, किसानों को दी बधाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके किसानों को बधाई दी है. उन्होंने लिखा है-
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हर एक किसान को जिसने संघर्ष किया और जिस तरह का सुलूक आपके साथ @BJP4India ने किया आप उससे विचलित नहीं हुए.
यह आपकी जीत है!
इस लड़ाई में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है.
कृषि क़ानून वापस लेने के फ़ैसले पर क्या बोले राहुल गांधी

ब्रेकिंग न्यूज़, राहुल गाँधी कृषि क़ानून वापस लेने पर बोले- अहंकार का सिर झुका
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने अपना एक पुराना वीडियो पोस्ट रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया. अन्याय के ख़िलाफ़ ये जीत मुबारक हो. जय हिंद, जय हिंद का किसान!''
राहुल गाँधी का यह पुराना वीडियो इसी साल 14 जनवरी का है. राहुल इसमें कह रहे हैं, ''मैं किसानों के साथ खड़ा हूँ और रहूँगा. मेरी बात को आप ध्यान से सुन लीजिए. यह सरकार तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने पर मजबूर होगी.''
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पीएम मोदी की घोषणा पर राकेश टिकैत बोले आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा
तीनों कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन के अगुआ रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पीएम मोदी की घोषणा पर ट्वीट कर कहा, ''आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि क़ानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा. सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे.''
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ब्रेकिंग न्यूज़, प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा की है.
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा, ''आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूँ कि हमने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है. इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे.''
पीएम मोदी का संबोधन देखिए
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हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है - पीएम मोदी

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पीएम मोदी का संबोधन शुरू हो चुका है. इससे पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से एक ट्वीट करके इस संबंध में जानकारी दी गई.
आज पीएम महोबा में कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे और उसके बाद राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व के लिए झांसी जाएंगे.
राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ''संसार में सेवा का मार्ग अपनाने से ही जीवन सफल होता है. हमारी सरकार इसी सेवा भावना के साथ देशवासियों का जीवन आसान बनाने में जुटी है.अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने किसानों की परेशानियों को क़रीब से देखा है. इसलिए जब देश ने 2014 में देश सेवा का मौक़ा मिला तो कृषि विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी.''
पीएम मोदी ने कहा कि देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए, हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया. सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा.
उन्होंने कहा," तीन कानून लाने का मक़सद छोटे किसानों को मज़बूत बनाना था. बरसों से यह मांग देश के किसान, विशेषज्ञों और संगठन कर रहे थे. पहले भी कई सरकारों ने इस पर मंथन किया था. इस बार भी संसद में मंथन हुआ था और कानून लाया गया. बड़ी संख्या में किसानों ने इसका स्वागत और समर्थन किया. मैं उन सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं. हमारी सरकार किसानो के लिए ख़ासकर छोटे किसानों की बेहतरी के लिए पूरी सत्यनिष्ठा और समर्पण के साथ और नेक नीयत से यह क़नून लेकर आयी थी लेकिन यह किसानों के हित की बात, हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए. भले ही एक वर्ग ही विरोध कर रहा था लेकिन यह हमारे लिए महत्वपूर्ण था."
पीएम मोदी ने कहा, "हम अनेक तरीकों से उन्हें समझाते रहे. उनकी बातों और उनकी तर्कों को समझने में कोई कसर नहीं छोड़ी. कानून के जिन प्रावधानों पर उन्हें एतराज़ था. हम उसमें संशोधन के लिए भी तैयार हो गये. इसी दौरान यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चला गया. सबकुछ देश के सामने है इसलिए मैं ज्यादा नहीं कहूंगा. मैं सच्चे मन से माफ़ी मांगता हूं कि हमारी तपस्या में ही कुछ कमी रही होगी कि हम दिये की रोशनी जैसी पवित्र बात को कुछ किसानों को समझा नहीं पाए."
उन्होंने कहा, "आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है. इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को Repeal करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे."
पीएम मोदी ने कहा,"एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए, ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमेटी का गठन किया जाएगा. इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह नौ बजे देश को संबोधित करेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश को संबोधित करेंगे. इस बात की सूचना उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दी गई है.
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प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए इस ट्वीट में कहा गया है, ''आज गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व है. आज प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले में सिंचाई से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं उद्घाटन करेंगे.
इसके बाद वह राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व के लिए झांसी जाएंगे.
लेकिन इन सभी कार्यक्रमों से पहले वह आज सुबह नौ बजे देश को संबोधित करेंगे.
युगांडा में आत्मघाती हमले के संदिग्ध मौलवी की मौत

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युगांडा में सुरक्षा बलों ने एक हथियारबंद समूह के संदिग्ध मुस्लिम मौलवी को मार दिया है. राजधानी कंपाला में हुए आत्मघाती हमले में इसी समूह का हाथ बताया जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि शेख मुहम्मद अबास किरेवु अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज (एडीएफ़) के लिए भर्तियां करते थे. इस संस्था के विद्रोहियों का संबंध इस्लामिक स्टेट समूह से भी है.
शेख़ मुहम्मद कंपाला के ठीक बाहर मारे गए.
मंगलवार को राजधानी कंपाला में आत्मघाती हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे. इस आत्मघाती हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई थी और 30 से अधिक लोग जख़्मी भी हुए हैं.
एक ओर जहाँ आईएस का कहना है कि इस हमले के पीछे उसका हाथ था वहीं अधिकारियों का दावा है कि इस हमले को अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज ने अंजाम दिया.

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अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ का गठन 1990 के दशक में युगांडा में हुआ था लेकिन अब इनका बेस कांगो में है.
2019 में इस्लामिक स्टेट के प्रति वफ़ादारी का दावा करने के बाद से इस इस्लामिक चरमपंथी संगठन के हमलों में तेज़ी आई है.
मंगलवार को हुए आत्मघाती हमले के बाद 21 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस प्रवक्ता फ्रेड इनांगा ने बताया कि कांगो में सीमा पार करने की कोशिश करने के दौरान 13 संदिग्धों को रोका गया था, इसमें से कुछ बच्चे भी थे.
इसके बाद बुधवार को सीमा के पास अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ के चार संदिग्ध कार्यकर्ता मारे गए थे.
एक अन्य मौलवी शेख़ सुलेमान नसुबुगा को भी खोजा जा रहा है.
सुलेमान पर चरमपंथियों को प्रशिक्षण देने, विस्फ़ोटक बनाने के लिए सामान मुहैया कराने का आरोप है.
युगांडा में पिछले महीने भी एक बम धमाका हुआ था. कुछ दिनों पहले भी कंपाला के पास एक आत्मघाती हमलावर ने एक बस में ख़ुद को उड़ा लिया था. इस हमले में भी कई लोग घायल हो गए थे.
पुलिस का दावा था कि दोनों हमले अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ से जुड़े थे.
मंगलवार को हुए बम धमाकों को अलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है.
नमस्कार,
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