क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगा सकती है सरकार, बजट में हो सकता है कानून में बदलाव

केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को टैक्स के दायरे में लाने के लिए आयकर कानूनों में बदलाव पर विचार कर रही है और कुछ बदलाव के साथ ये अगले साल के बजट का हिस्सा बन सकती हैं.

लाइव कवरेज

अभिजीत श्रीवास्तव, भूमिका राय and अनंत प्रकाश

  1. 'पीएम मोदी के लिए धक्का लेकिन किसानों की भी हार'

  2. तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के प्रमुख हाफ़िज़ साद हुसैन रिज़वी रिहा, समर्थकों ने किया स्वागत

    रिज़वी

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    तहरीक-ए-लब्बैक (पाकिस्तान) के प्रमुख हाफ़िज़ साद हुसैन रिज़वी को बीते दिन (गुरुवार) लाहौर की कोट लखपत जेल से रिहा कर दिया गया. जेल सुप्रीटेंडेंट एजाज़ असगर ने डॉन से इस ख़बर की पुष्टि की है.

    तहरीक-ए-लब्बैक पार्टी के प्रवक्ता मुफ़्ती अबीद ने भी इस ख़बर की पुष्टि की है.

    उन्होंने डॉन को बताया कि रिज़वी पार्टी के मुख्यालय यानी रहमतुल लील अलअमीन मस्जिद भी पहुंचे. जहां सैकड़ों की संख्या में पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया.

    टीएलपी प्रमुख रिज़वी के पिता और पार्टी के संस्थापक ख़ादिम हुसैन रिज़वी की पुण्यतिथि के अवसर पर 20 और 21 नवंबर को मस्जिद में उर्स का आयोजन किया जाएगा.

    पिछले सप्ताह आतंकवाद या सांप्रदायिकता के मामलों की चौथी अनुसूची से रिज़वी का नाम हटाने के बाद उन्हें गुरुवार को रिहा कर दिया गया. यह आतंकवाद रोधी अधिनियम 1997 के तहत आतंकवाद या सांप्रदायिकता के मामलों में संदिग्ध व्यक्तियों की सूची है.

    इससे पहले डॉन ने ख़बर प्रकाशित की था कि बुधवार को पंजाब (पाकिस्तान) के क़ानून मंत्री बशारत राजा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. लेकिन इस बैठक में रिज़वी को रिहा किए जाने के मसले पर आम सहमति नहीं बन सकी थी.

    पंजाब के गृह विभाग ने 10 नवंबर को एक अधिसूचना जारी की थी जिसके बाद रिज़वी का नाम चौथी अनुसूची से हटा दिया गया था.

    इसमें कहा गया कि "हाफ़िज़ मोहम्मद साद का नाम प्रतिबंधित संगठन तहरीक़-ए-लब्बैक पाकिस्तान का प्रमुख होने के नाते लाहौर की ज़िला खुफ़िया समिति की सिफारिश पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 की चौथी अनुसूची में सूचीबद्ध किया गया था.

    इससे पहले सरकार ने 7 नवंबर को टीएलपी को अधिनियम की पहली अनुसूची से हटा दिया था.

    अधिसूचना में कहा गया है कि इसीलिए हाफ़िज़ मोहम्मद साद का नाम आतंकवाद विरोधी अधिनियम1997 की चौथी अनुसूची की सूची से तत्काल प्रभाव से हटाया जाता है.

    इससे पूर्व इसी साल अप्रैल महीने में पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में हिंसक प्रदर्शनों के बाद तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर पाबंदी लगा दी गई थी. यह पाबंदी साल 1997 के आतंकवादी निरोधी क़ानून के तहत लागू की गई थी.

    2 अप्रैल को टीएलपी के विरोध प्रदर्शन से पहले रिज़वी को गिरफ़्तार किया था. उसके अगले दिन पुलिस ने रिज़वी के ख़िलाफ़ आतंकवाद निरोधी क़ानून की धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज़ की थी.

    इमरान ख़ान

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    शांति भंग होने की आशंका के चलते पंजाब सरकार ने 12 अप्रैल से साद रिज़वी को अपनी हिरासत में रखा था.

    रिज़वी की रिहाई के लिए उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे थे.

    20 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की शुरुआत करने के बाद 22 अक्टूबर को टीएलपी ने राजधानी इस्लामाबाद की तरफ़ कूच करने का फ़ैसला किया था.

    इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में पाँच पुलिसकर्मी मारे गए थे और दोनों ओर से सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

    प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला

    चार नवंबर को पंजाब प्रांत की सरकार ने टीएलपी को प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट से बाहर करने का प्रस्ताव स्वीकार किया था और फिर केंद्र सरकार से भी सिफ़ारिश की थी कि टीएलपी पर लगे सारे प्रतिबंध हटा लिए जाएं.

    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब प्रांत की सरकार की सिफ़ारिश पर क़ानून मंत्रालय से सलाह ली थी. क़ानून मंत्रालय की हरी झंडी के बाद इमरान सरकार ने टीएलपी से सभी प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला किया.

  3. INDvNZ: रांची में दूसरे टी20 मैच से पहले स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन, रवि प्रकाश, बीबीसी हिंदी के लिए, रांची से

    रांची में भारत-न्यूज़ीलैंड टी20 मैच से पहले प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, रांची में भारत-न्यूज़ीलैंड टी20 मैच से पहले प्रदर्शन

    भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच रांची में दूसरा टी20 मैच हो रहा है. इस मैच को स्टेडियम में इसकी 100 फ़ीसद क्षमता के साथ बैठ कर देखने की इजाज़त दी गई है. और इसी अनुमति के ख़िलाफ़ चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री ज़्याँ द्रेज और दूसरे सामाजिक संगठनों के लोगों ने मैच से पहले जेएससीए स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन किया.

    रांची में भारत-न्यूज़ीलैंड टी20 मैच से पहले प्रदर्शन

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    ज़्याँ द्रेज ने बीबीसी से कहा, "जब स्टेडियम में 40,000 दर्शकों को एक साथ बैठने की अनुमति दी जा सकती है, तो फिर बच्चों के स्कूल क्यों नहीं खोले जा रहे हैं."

    उन्होंने कहा, "कोविड की पाबंदियाँ सिर्फ़ बच्चों के स्कूलों पर ही क्यों लागू की जा रही हैं. जबकि सरकार भी जानती है कि कोविड के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है. इसलिए हम ‘स्कूल खोलो, तब क्रिकेट खेलो’ नारे के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं."

    ज़्याँ द्रेज ने कहा, "हमारा प्रदर्शन किसी के ख़िलाफ़ नहीं है. हम सिर्फ़ स्कूलों को खोले जाने की माँग कर रहे हैं."

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी माँग के समर्थन में मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा और उम्मीद की कि सरकार स्कूलों के खोले जाने पर सकारात्मक निर्णय लेगी.

  4. किसान आंदोलन के अहम पड़ाव- क़ानून बनने से वापसी के एलान तक

  5. Live: कृषि क़ानूनों की वापसी के एलान पर क्या कह रहे हैं आज़मगढ़ के लोग? बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता विनीत खरे

  6. मोदी सरकार को उद्धव ठाकरे ने दी नसीहत

    उद्धव ठाकरे

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    केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के फ़ैसले की घोषणा के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार को नसीहत दी है.

    उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी और पछतावे से बचने के लिए अन्य दलों को भी विश्वास में लिया करे.

    प्रधानमंत्री ने गुरुवार की सुबह एलान किया है कि आगामी संसद सत्र में इन तीन कृषि क़ानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा.

    उद्धव ठाकरे ने केंद्र के फ़ैसले का स्वागत किया और साथ ही उन्हें सलाह भी दी.

    उन्होंने कहा, "तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा आम आदमी के ताक़त की जीत है. केंद्र सरकार को आज की तरह शर्मिंदगी से बचने के लिए अन्य दलों को विश्वास में लेना चाहिए. उन्हें बातचीत करनी चाहिए."

    उन्होंने उम्मीद जताई की इन क़ानूनों को निरस्त करने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी.

    ठाकरे ने कहा, "पूरे देश में इन क़ाननों के ख़िलाफ़ भावनाएं थीं. आंदोलन चल रहे थे लेकिन वे (आंदोलनकारी किसानों का) विरोध कर रहे थे. किसान अब भी दिल्ली की सीमा पर हैं. लोगों के लिए अन्न उपजाने वाले किसानों में से कइयों की जानें चली गईं. यहां तक कि महाराष्ट्र की महाअघाड़ी सरकार ने भी इन क़ानूनों को लेकर अपना विरोध जताया था."

    मुख्यमंत्री ने कहा, "महाराष्ट्र विधानसभा के सत्रों के दौरान इन क़ानूनों पर विस्तार से चर्चा की गई. अंत में मैं केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत करना चाहूंगा कि आखिरकार उन्होंने इसे संसद के आगामी सत्र में निरस्त करने का निर्णय लिया है."

  7. ऑस्ट्रिया में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से फिर लगेगा पूर्ण लॉकडाउन

    ऑस्ट्रिया

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    यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया ने कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए आगामी सोमवार से एक बार फिर लॉकडाउन लगाने का फ़ैसला किया है.

    इससे पहले सरकार ने सिर्फ उन लोगों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी जिन्होंने कोरोना वैक्सीन नहीं ली है.

    ऑस्ट्रिया के चांसलर अलेक्ज़ेंडर शालेनबर्ग ने कहा है कि ये लॉकडाउन कम से कम दस दिनों तक चलेगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि 1 फ़रवरी 2022 से ऑस्ट्रिया में वैक्सीन लगवाना क़ानूनी रूप से ज़रूरत बन जाएगा.

    ऑस्ट्रिया में जहां एक ओर कोरोना मामलों में बढ़त स्पष्ट रूप से नज़र आ रही है. वहीं, अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में यहां वैक्सीनेशन का स्तर काफ़ी नीचा है.

    ऑस्ट्रिया की तरह कई अन्य यूरोपीय देश भी कोरोना मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रतिबंध लगाने की ओर बढ़ रहे हैं.

    ऑस्ट्रिया के 9 प्रांतीय गवर्नरों के साथ बैठक में शालेनबर्ग ने कहा, “हम पांचवी लहर नहीं चाहते हैं.”

    वहीं, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री एडुअर्ड हेजर ने कहा है कि टीका नहीं लगवाने वालों के लिए आगामी सोमवार से लॉकडाउन लगाया जाएगा. और चेक गणराज्य की सरकार ने भी ऐसे ही कुछ प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है.

    इसके साथ ही जर्मन नेता उन लोगों के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हो गए हैं जिन्होंने कोरोना वैक्सीन नहीं ली है.

  8. लखीमपुर खीरी में कृषि क़ानून की वापसी के बाद क्या कह रहे हैं किसान

    बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे

  9. बीजिंग ओलंपिक के कूटनीतिक बॉयकॉट पर विचार कर रहा है अमेरिका

    जो बाइडन

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    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वो चीन की राजधानी बीजिंग में अगले साल होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेल के कूटनीतिक बॉयकॉट पर विचार कर रहे हैं.

    बाइडन ने संवाददाताओं से कहा," हम इस बारे में विचार कर रहे हैं."

    कूटनीतिक बॉयकॉट का मतलब ये होगा कि अमेरिका इन खेलों में अपने किसी अधिकारी को नहीं भेजेगा.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये बात ऐसे समय कही है जब चीन के साथ उसके संबंधों में एक बार फिर तनाव देखा जा रहा है.

    इसी सप्ताह सोमवार को बाइडन ने पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पहली बार सीधी बातचीत की थी. दोनों नेताओं ने वर्चुअल माध्यम से वीडियो के ज़रिए तीन घंटे तक चर्चा की.

    हालाँकि व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बाइडन की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा था कि दोनों नेताओं के बीच ओलंपिक के बारे में कोई बात नहीं हुई.

    मगर अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसद मांग कर रहे हैं कि चीन में मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर इन खेलों का कूटनीतिक बहिष्कार होना चाहिए.

    चीन में विंटर ओलंपिक अगले साल 4 फ़रवरी से होने हैं.

  10. कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद ग़ाज़ीपुर बॉर्डर का माहौल

  11. कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के फ़ैसले पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने क्या कहा?

    कैप्टन अमरिंदर सिंह

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    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन कृषि क़ानूनों को निरस्त किए जाने के केंद्र के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि "प्रकाश पर्व के अवसर पर तीन कृषि क़ानूनों की वापसी और किसानों से माफ़ी मांगी गई है. इससे बढ़कर और कुछ नहीं हो सकता था. मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को धन्यवाद देता हूं."

    इसके साथ ही कैप्टन ने ये भी कहा कि वो बीजेपी के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं.

    कैप्टन ने अपने ट्वीट में लिखा, "बहुत अच्छी ख़बर! मैं पीएम मोदी का आभारी हूं कि उन्होंने गुरुनानक जयंती के पवित्र अवसर पर हर पंजाबी की मांग को रखते हुए तीन काले क़ानूनों को वापस ले लिया. मैं आशान्वित हूं कि केंद्र सरकार किसानी के विकास के लिए आगे काम करती रहेगी."

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    उन्होंने ये भी कहा कि, "न केवल यह किसानों के लिए बड़ी राहत बन कर आई है बल्कि इससे पंजाब की प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है. मैं बीजेपी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के साथ मिलकर किसानों के विकास के लिए काम करने की उम्मीद करता हूं. मैं पंजाब के लोगों से वादा करता हूं कि तब तक चैन से नहीं बैठूंगा, जब तक मैं हर एक आंख से आंसू नहीं पोछ दूं."

    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, "हर क्षेत्र की अपनी कृषि होती है. एपीएमसी जैसे क़ानून केवल पंजाब और शायद हरियाणा पर लागू थे. अन्य राज्यों पर इनका कोई प्रभाव नहीं था. पंजाब से इस पर सबसे अधिक प्रतिक्रिया देखने को मिली क्योंकि इसका यहां सबसे अधिक प्रभाव पड़ता. तो अब इन क़ानूनों को निरस्त करने का फ़ैसला लिया गया है."

    किसान अब भी आंदोलन पर बैठे हैं, यह पूछने पर अमरिंदर सिंह ने कहा, "प्रधानमंत्री ने माफ़ी मांगी है. सवाल यह है कि संसद की बैठक कब होगी. यह 29 नवंबर, यानी अब से 10 दिनों के बाद होगी. विधेयक लाया जाएगा और क़ानून को निरस्त किया जाएगा. बात वहीं ख़त्म हो जाएगी, तो आंदोलन पर अब और बैठने का क्या फ़ायदा."

    जब कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा गया कि उनका अगला क़दम क्या होगा और क्या अब उनकी पार्टी बीजेपी के साथ जाएगी तो उन्होंने कहा, "तीन महीनों से यह कहा जा रहा था. मैंने कहा था कि किसानों का मुद्दा सबसे पहले आता है, उसके बाद ही सीट बंटवारे पर आपसे बात होगी."

  12. Live: कृषि क़ानूनों की वापसी के एलान के बाद सिंघु बॉर्डर पर कैसा है माहौल? बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी

  13. मोदी की इमेज को धक्का तो लगा हैः अर्थशास्त्री गुरचरण दास

    गुरचरण दास

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    तीन कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने पर बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद सुधार समर्थक अर्थशास्त्री गुरचरण दास से बात की.

    गुरचरण दास ने कहा, "मेरे ख़याल में ये सियासत की जीत हो गयी है. अर्थव्यवस्था की हार हुई है. यूपी में चुनाव आ रहा है तो ये लोग डर गए कि किसान नहीं मान रहे हैं तो इन्होंने ये फ़ैसला ले लिया."

    "इस फ़ैसले से मैं बहुत हैरान हूँ, दुखी हूँ. मायूस हूँ. मुझे दुख हुआ क्योंकि ये पंजाब के किसान की जीत नहीं, हार है. उसके बाद देश की भी हार है."

    "ये बहुत बड़ी नाकामी है. अब रिफार्म लाना मुश्किल है. रिफार्म को बेचना पड़ता है. लोगों समझाना पड़ता है क्योंकि ये आसान नहीं है. मोदी लोगों को समझाने में नाकाम रहे."

    "मोदी की इमेज को धक्का तो लगा है."

  14. तेजस्वी यादव ने कहा- किसान की जीत, पूँजीपतियों के रखवालों और सरकार की हार

    तेजस्वी यादव

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    आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा को किसानों की जीत बताया है.

    उन्होंने कहा, "यह किसान की जीत है, देश की जीत है. यह पूँजीपतियों, उनके रखवालों, नीतीश-भाजपा सरकार और उनके अंहकार की हार है."

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    तेजस्वी ने कहा, "विश्व के सबसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक किसान आंदोलन ने पूँजीपरस्त सरकार को झुकने पर मजबूर किया. आंदोलनजीवियों ने दिखाया कि एकता में शक्ति है. यह सभी की सामूहिक जीत है. बिहार और देश में व्याप्त बेरोज़गारी, महंगाई, निजीकरण के ख़िलाफ़ हमारी जंग जारी रहेगी. भाजपाई उपचुनाव हारे तो इन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया."

    "उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है. विगत वर्ष 26 नवंबर से किसान आंदोलनरत थे. बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के तुरंत पश्चात किसान हित में हम किसानों के समर्थन में सड़कों पर थे. इसी दिन किसान विरोधी नीतीश-भाजपा ने गाँधी मैदान में इन कृषि क़ानूनों का विरोध एवं किसानों का समर्थन करने पर मुझ सहित हमारे अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया. अंततः सत्य और किसानों की जीत हुई."

  15. किसानों की जीत, अहंकार की हारः भूपेश बघेल

    भूपेश बघेल, Bhupesh Baghel

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    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने पर इसे किसानों की जीत और अहंकार की हार बताया.

    उन्होंने कहा, "देश के किसान जीते हैं और नरेंद्र मोदी का अंहकार हारा है. भाजपा नेताओं द्वारा किसानों को कभी ठग, अंहकारी, कभी चीनी, पाकिस्तानी समर्थक क्या-क्या उनके लिए नहीं कहा गया. प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं को देश और किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए."

  16. सरकार ने वोट के लिए क़ानून वापस लिए हैंः अखिलेश यादव

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    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि तीन कृषि क़ानून किसानों के हित में तो वापस हुए ही हैं लेकिन सरकार चुनाव से डर गई और वोट के लिए क़ानून वापस लिए गए हैं.

    उन्होंने कहा, "हो सकता है कि सरकार चुनाव के बाद फिर से ऐसा कोई क़ानून लेकर आए."

    साथ ही अखिलेश ने यह भी पूछा कि, "यह भरोसा कौन दिलाएगा कि भविष्य में ऐसे क़ानून नहीं आएंगे जिससे किसान संकट में आए?"

    अखिलेश ने कहा, "किसान माफ़ नहीं करेंगे और बीजेपी को साफ़ कर देंगे. क्या बीजेपी माफ़ी मांगेगी."

  17. जान गंवाने वाले किसानों के परिवार से भी माफ़ी मांगनी चाहिएः मनीष सिसोदिया

    मनीष सिसोदिया

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    कृषि क़ानून रद्द किए जाने पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार को उन किसानों के परिवारों से भी माफ़ी मांगनी चाहिए जिन्होंने इस आंदोलन की वजह से अपनी जान गंवाई.

    उन्होंने कहा, "भाजपा के यही लोग थे जिन्होंने किसानों को आतंकवादी बताया था. सरकार का किसानों के साथ एक साल तक ऐसा व्यवहार करना ग़लत था."

    मनीष सिसोदिया ने तीनों क़ानूनों को वापस लिए जाने पर दिए गए अपने बधाई संदेश में कहा, "किसानों व किसान आंदोलन को बधाई. निरंकुश सरकार को आपके एक साल लम्बे अहिंसक आंदोलन ने झुकने को मजबूर कर दिया."

    उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को सैंकड़ों किसानों की शहादत के सामने आख़िर झुकना पड़ा. सरकार उन किसानों के परिवारों से भी माफ़ी माँगे जिनकी जान इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन में गई है."

  18. सिंघू बॉर्डर से जश्न की तस्वीरें

    कृषि क़ानूनों को निरस्त करने की पीएम मोदी की घोषणा के बाद सिंघू बॉर्डर पर उत्सव का माहौल है.

    इस माहौल की कुछ तस्वीरें-

    किसान
    किसान
    किसान
  19. आपकी नीयत और आपके बदलते हुए रुख़ पर विश्वास करना मुश्किलः प्रियंका गांधी

    प्रियंका गांधी

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    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़ैसले पर कहा कि "अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी."

    उन्होंने कहा, "600 से अधिक किसानों की शहादत,350 से अधिक दिन का संघर्ष, मोदी जी आपके मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार डाला, आपको कोई परवाह नहीं थी. आपकी पार्टी के नेताओं ने किसानों का अपमान करते हुए उन्हें आतंकवादी, देशद्रोही, गुंडे, उपद्रवी कहा, आपने ख़ुद आंदोलनजीवी बोला उनपर लाठियाँ बरसायीं, उन्हें गिरफ़्तार किया."

    "अब चुनाव में हार दिखने लगी तो आपको अचानक इस देश की सच्चाई समझ में आने लगी कि यह देश किसानों ने बनाया है. यह देश किसानों का है. किसान ही इस देश का सच्चा रखवाला है और कोई सरकार किसानों के हित को कुचलकर इस देश को नहीं चला सकती."

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    प्रियंका ने कहा, "आपकी नीयत और आपके बदलते हुए रुख़ पर विश्वास करना मुश्किल है."

  20. कृषि क़ानूनों की वापसी से कितना बदलेंगे सामाजिक और सियासी समीकरण