आज का कार्टून: अंकल के लिए एक और मास्क

कोरोना से बचने के लिए डबल मास्क की सलाह पर आज का कार्टून.
एक ओर जहां बीते 24 घंटे में 20 हज़ार से अधिक संक्रमित इलाज के बाद ठीक हुए हैं वहीं संक्रमण के कारण 368 लोगों की जान भी गई है.

कोरोना से बचने के लिए डबल मास्क की सलाह पर आज का कार्टून.
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में मरीज़ों और उनके परिजनों पर समस्याओं का पहाड़ टूट पड़ा.
अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की चलते परिजन अपने मरीज़ के लिए खुद ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हैं.
हालात ये हैं कि काफी ऊँची क़ीमतों पर भी उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहे. ऐसे में ये बेहाल परेशान मरीज़ों के परिजन सरकार से क्या बोल रहे है?
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि उनका देश भारत की मदद के लिए हर समय तैयार है.
उन्होंने कहा कि भारत की ज़रूरत के हिसाब से चीन उसकी हर समय मदद करने के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियों ने सरकार की मदद से सक्रिय भागीदारी दिखलाई है. ऑक्सीजन मशीन की पहली खेप भारत पहुँच गई है.
इसके अलावा चीन के विदेश मंत्री ने कोरोना संकट के मसले पर वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अफगानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों से भी चर्चा की.
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कोरोना संकट से भारत की लड़ाई में रूस की मदद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच बुधवार को बात हुई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मेरे दोस्त राष्ट्रपति पुतिन से आज अच्छी बात हुई. हमने कोरोना महामारी की स्थिति पर चर्चा की. कोरोना के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई में रूस की मदद के लिए मैंने राष्ट्रपति पुतिन को शुक्रिया कहा."

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प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है कि पीएम केयर्स फंड से एक लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स ख़रीदे जाएँगे.
पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा है कि पीएम केयर्स फंड की ओर से 500 और पीएसए ऑक्सीजन प्लांट्स की मंज़ूरी दी गई है, जो डीआरडीओ की ओर से विकसित तकनीक के आधार पर बनाई जाएँगी.
ये फ़ैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए एक उच्चस्तरीय बैठक में हुआ. इस बैठक में पीएम मोदी ने निर्देश दिए कि ये ऑक्सीन कंसेन्ट्रेटर्स जल्द ख़रीदे जाएँ और उन राज्यों को दिए जाएँ, जो कोरोना से ज़्यादा प्रभावित हैं.
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भारत पर कहर बन कर आई है. बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं. कई लोगों की ऑक्सीजन की कमी से जान जा रही है.
मंगलवार को भारत में कोरोना संक्रमण के तीन लाख 60 हज़ार नए मामले सामने आए हैं. जबकि कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या दो लाख से भी ज़्यादा हो गई है.
भोपाल के विवेक शर्मा मार्च महीने में कोविड पॉज़िटिव हो गए थे.
उन्हें डायबटीज समेत दूसरी बीमारियां भी हैं.
उन्हें डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा.
वो छह दिन अस्पताल में रहे, उसके बाद 7 दिनों तक घर में क्वारंटीन रहे. अब वो स्वस्थ हैं.
18 साल से अधिक के सभी लोग एक मई से कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बनाई गई वैक्सीन ले सकेंगे.
लेकिन एक मैसेज को अलग-अलग माध्यमों से फैलाया जा रहा है कि पीरियड के दौरान महिलाओं के लिए ये वैक्सीन लेना सुरक्षित नहीं है.
इसे लेकर कई महिलाओं ने अपनी शंका ज़ाहिर की. हमने कई जानकारों से पूछा कि क्या ये महज़ एक अफ़वाह है या इसके पीछे कोई सच्चाई भी है?
भारत में कोरोना को लेकर जारी चिंता ने क्रिकेट पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है.
ऑस्ट्रेलिया के तीन खिलाड़ी इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के बीच से ही लौट गए हैं.
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एडम ज़ैंपा और केन रिचर्डसन भी अपने हमवतन एंड्र्यू टाय की तरह आईपीएल को बीच में ही छोड़ ऑस्ट्रेलिया वापस चले गए हैं.
एक दिन पहले भारतीय ऑफ़-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी टूर्नामेंट बीच में ये कहते हुए ही छोड़ दिया कि वह अपने परिवार की मदद करने के लिए आईपीएल से ब्रेक ले रहे हैं.

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अशरफ पडन्ना
केरल से, बीबीसी हिंदी के लिए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि वैक्सीन के लिए भाग-दौड़ के कारण भी केरल में वायरस को फैलने में मदद मिल रही है.
केरल में आईएमए के सचिव डॉक्टर पी गोपीकुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों ने लोगों में घबराहट पैदा कर दी है.
उनका कहना था, "वैक्सीन के लिए बनाए गए केंद्र भी वायरस फैलने की वजह हो सकते हैं. मुझे ऐसे कुछ मामलों की जानकारी है. इनकी संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि जब से कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के तेज़ी से फैलने की ख़बर आई है लोगों में वैक्सीन लेने के लिए अफ़रा-तफ़री मची हुई है."
सोमवार को राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन लेने के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी हुई थी. लाइन लंबी थी और धूप भी बहुत ज़्यादा थी और इस कारण लाइन में लगे चार बुज़ुर्ग कोलैप्स कर गए और उनकी मौत हो गई.
क़रीब दो हज़ार लोगों ने शहर के एक इंडोर स्टेडियमे में बने वैक्सीन सेंटर पर वैक्सीन के लिए ऑनलाइन रजिस्टर किया था. लेकिन उन्हें स्टेडियम के बाहर घंटों तक खड़े होकर अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ रहा था.
बहुत तो सुबह में ही आ गए थे लेकिन पूर्व निर्धारित समय से दो घंटे के बाद से वैक्सीन लगनी शुरू हुई.
पेशे से ईएनटी सर्जन डॉक्टर गोपीकुमार कहते हैं, यह उतना ही ख़तरनाक है जितना की शादी-ब्याह या फिर अंतिम संस्कार में लोगों का जमा होना. फ़िलहाल शादी समारोह में अधिकतम 50 और अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 लोगों को जमा होने की अनुमति है.
आईएमए ने राज्य सरकार से कहा है कि वो स्टेडियम और कम्यूनिटी हॉल में बने वैक्सीनेशन सेंटर को बंद करदें और लोगों को क्लिनिक के ज़रिए वैक्सीन दिलवाएं.
कोरोना के सबसे ज़्यादा नए मामले में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद केरल तीसरा राज्य बन गया है.

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कोरोना से मौतें और ऑक्सीजन की क्षमता
केरल में केस फ़ैटलिटी रेट यानी कोरोना से मरने वालों की दर बहुत कम 0.35 फ़ीसद है.
अब तक आधिकारिक रूप से केरल में 5170 लोगों की मौत हुई है लेकिन कुछ विशेषज्ञ सरकार के इस आंकड़े से सहमत नहीं हैं.
राज्य में ज़रूरत से ज़्यादा 510 मिट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन मौजूद है और फ़िलहाल केरल में रोज़ाना 100 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है.
केरल में रोज़ाना 205 मिट्रिक टन ऑक्सीजन बनाने की क्षमता है और उनमें से 149 मिट्रिक टन ऑक्सीजन केवल एक कंपनी आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स अपने पालक्कड स्थित प्लांट से बना रही है. यह प्लांट केरल और तमिलनाडु की सीमा पर है और इस प्लांट से बनी ऑक्सीजन से दोनों राज्यों का काम चल रहा है.
लेकिन अब ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियों ने ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता बढ़ाकर रोज़ाना एक हज़ार मिट्रिक टन करने का फ़ैसला किया है.
राज्य सरकार के अधिकारियों ने अब ऑक्सीजन ले जाने वाले ट्रकों को एम्बुलेंस का दर्जा देने का फ़ैसला किया है ताकि राज्य भर में उसके आने-जाने में किसी तरह की रुकावट ना हो.

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कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत में कटौती का फ़ैसला सीरम इंस्टिट्यूट ने लिया सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत में कटौती का फ़ैसला लिया है.
कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए कहा, "सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया की ओर से परोपकार वाले कदम के तौर पर मैं राज्य सरकारों के लिए इसकी एक खुराक की कीमत 400 रुपये से कम करके 300 रुपये करता हूं. इससे राज्य सरकारों के हज़ार करोड़ रुपये की बचत होगी और ज्यादा से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा सकेगी. और अनगिनत ज़िंदगियां बचाई जा सकेगी."
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उत्तर प्रदेश में बरेली की नवाबगंज सीट से बीजेपी विधायक केसर सिंह गंगवार का कोरोना से निधन हो गया. केसर सिंह गंगवार 18 अप्रैल को कोरोना पॉज़िटिव हुए थे. पहले बरेली में उसके बाद नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.
केसर सिंह गंगवार उत्तर प्रदेश में बीजेपी के तीसरे विधायक हैं, जिनका कोरोना की दूसरी लहर के बाद कोरोना संक्रमण के कारण निधन हुआ है. इससे पहले लखनऊ से विधायक सुरेश श्रीवास्तव और औरैया से विधायक रमेश दिवाकर की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है.
केसर सिंह गंगवार का इलाज पहले बरेली के ही एक निजी अस्पताल में हो रहा था, लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार ख़राब हो रहा था. उनके परिजनों ने सोशल मीडिया पर उन्हें समुचित इलाज न मिल पाने की बात की थी और कहा था कि उन्हें सत्ताधारी दल का विधायक होने के बावजूद 24 घंटे तक एक आईसीयू बेड नहीं मिल सका था.
इसके बाद परिवार के लोग उन्हें बरेली से नोएडा ले गए. स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर केसर सिंह के बेटे ने सरकार पर कई सवाल भी खड़े किए थे.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केसर सिंह गंगवार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. केसर सिंह गंगवार साल 2017 में बरेली के नवाबगंज से बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए थे. इससे पहले वे बहुजन समाज पार्टी में थे और एमएलसी रह चुके थे.

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प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल में उत्तर 24-परगना जिले की खड़दह विधानसभा सीट से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार काजल सिन्हा की कोरोना संक्रमण की वजह से मौत के तीन दिनो बाद उनकी पत्नी नंदिता सिन्हा ने खड़दह थाने में शिकायत दर्ज करा के उपचुनाव आयुक्त सुदीप जैन और आयोग के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मागं की है.
ध्यान रहे कि खड़दह में छठे चरण में 22 अप्रैल को मतदान हुआ ता. उसके तीन दिनो बाद 25 अप्रैल को काजल सिन्हा की संक्रमण के कारण मौत हो गई थी.
उनको मतदान से एक दिन पहले ही हालत बिगड़ने पर महानगर के संक्रमाक बीमारियों के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. चुनाव आयोग ने अब तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
अब तक राज्य में काजल सिन्हा समेत चार उम्मीदवारों की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है जबकि कम से कम एक दर्जन उम्मीदवार संक्रमित हैं.
मुर्शिदाबाद जिले में शमशेरगंज और जंगीपुर में संयुक्त मोर्चा उम्मींदवारों के निधन की वजह से वहां चुनाव टाल दिया गया था.
अब उन सीटों पर 16 मई को मतदान होगा. मालदा में भी एक निर्दलीय उम्मीदवार की संक्रमण से मौत हो गई है. लेकिन निर्दलीय की मौत पर चुनाव टालने का प्रावधान नहीं है.
खड़दह थाने के एक अधिकारी ने बताया कि काजल सिन्हा की पत्नी ने बुधवार शाम को चुनाव आयोग और उपचुनाव आयुक्त के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई है.
उसमें उपचुनाव आयुक्त सुदीप जैन और आयोग के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की गई है.
नंदिता सिन्हा ने अपनी शिकायत में पति की मौत के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि आयोग ने तेजी से बढ़ते संक्रमण के बीच राज्य में आठ चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया था.
टीएमसी ने बार-बार आखिरी कुछ चरणों का मतदान एक साथ कराने की अपील की थी. लेकिन आयोग ने इस पर ध्यान नहीं दिया. इसी वजह से चुनाव प्रचार के दौरान संक्रमित होने के बाद काजल की मौत हो गई.
पश्चिम बंगाल में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और राज्य में एक्टिव मामले एक लाख के पार हो गए हैं. खासकर राजधानी कोलकाता और उससे सटे उत्तर 24-परगना में स्थिति सबसे गंभीर है. राज्य में आठवें चरण की 35 सीटों पर बृहस्पतिवार को मतदान होना है. इनमें कोलकाता की सात सीटें भी शामिल हैं.

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दिलनवाज़ पाशा
बीबीसी संवाददाता
भारत में वैक्सीनेशन के तीसरे चरण में 18 से 44 साल तक के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी जिसके लिए केंद्र सरकार के आरोग्य सेतु ऐप या को-विन पोर्टल पर पंजीकरण आज शाम से शुरू हो गया है.
18 वर्ष से ऊपर के सभी लोग आरोग्य सेतु ऐप या cowin.gov.in पर कोरोना टीकाकरण के लिए पंजीकृत करा सकते हैं. ये पंजीकरण शाम चार बजे शुरू हुआ लेकिन जानकारी ना होने की वजह से बहुत से लोगों ने पहले ही पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जिसकी वजह अब उन्हें दिक्कतें आ रही हैं.
दरअसल, भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने एक ट्वीट में पंजीकरण के 28 अप्रैल से शुरू होने की जानकारी दी थी जिसके बाद बहुत से लोगों ने सुबह से से अपने आप को पंजीकृत करने की कोशिश की. लेकिन आरोग्य सेतु ऐप पर 1976 के बाद की जन्मतिथि एंटर ही नहीं हो पा रहीं थीं.
बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि पंजीकरण शाम चार बजे से शुरू होगा. लेकिन शाम चार बजे पंजीकरण शुरू होते ही लोगों को कोविन के सर्वर में दिक्कत आने लगी.
कुछ लोग पंजीकरण करा पा रहे हैं तो बहुत से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इसी बीच नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ आरएस शर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, 'बहुत से दिनों में रोज़ाना पचास लाख लोग पंजीकरण करते हैं. हमने इससे दोगुनी संख्या का अनुमान लगाया था. हमें उम्मीद थी कि आज पंजीकरण खुलने पर हमारे सिस्टम इस लोड को संभाल पाएंगे.'
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उन्होंने कहा, '45 साल से अधिक उम्र के लोगों को केंद्र सरकार फ्री में वैक्सीन लगाती रहेगी. कुछ राज्य और अस्पताल एक मई या उसके बाद इस अभियान में शामिल होंगे.
ऐसे में बुकिंग या अस्पताल में उपलब्धता तब ही दिखाई देगी जब ये राज्य या अस्पताल प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगे.'
मुंबई के रहने वाले गौतम गड़ा ने सही समय पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए मोबाइल में शाम चार बजे का अलार्म लगाया था. लेकिन चार बजे जैसे ही उन्होंने कोविन ऐप पर प्रयास शुरू किया, ऐप काम नहीं कर रहा था.
33 साल के गौतम गड़ा कहते हैं, 'मैं सुबह से ही रजिस्ट्रेशन कराने के लिए तैयार था. लेकिन चार बजते ही सर्वर में दिक्कत आई, मैं बीस मिनट तक प्रयास करता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ.'
गड़ा कहते हैं, 'महाराष्ट्र में बिना पंजीकरण के भी पिछली बार टीकाकरण हुआ था. मैंने अपनी मां के लिए टीकाकरण कराया था लेकिन जब टीका लगवाने पहुंचे तो वहां लंबी लाइन लग रही थी, उन लोगों को भी वैक्सीन लग रही थी जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था.'
गड़ा कहते हैं, 'इस बार वैक्सीन के लिए पैसे भी देने पड़ सकते हैं. मुझे वैक्सीन के लिए पैसे देने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा, मैं साल में एक मोबाइल ख़रीददता हूं तो वैक्सीन भी लगवा ही सकता हूं.'
भारत दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम संचालित कर रहा है जिसमें एक मई से देश में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाया जाएगा.
मुंबई की ही रहने वाली 31 साल की तारिणी चाहती थीं कि पंजीकरण की प्रक्रिया बिना दिक्कत के हो. उन्होंने ठीक 3 बजकर 59 मिनट पर प्रयास शुरू किया.
तारिणी कहती हैं, 'मैंने किसी तरह पंजीकरण तो करा लिया लेकिन मुझे कोई वैक्सीन सेंटर नहीं मिला है. ऐसे में ये दुर्भाग्यपूर्ण ही है.'
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लखनऊ के रहने वाले और कोरोना से रिकवर हुए देवांश टीकाकरण को लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने आज सुबह से ही पंजीकरण करने की कोशिशें शुरू कर दीं लेकिन हर बार उन्हें एरर मैसेज दिखाई दिया.
बीबीसी से बात करते हुए देवांश ने कहा, 'मैं एक सप्ताह पहले ही कोरोना से रिकवर हुआ हूं और एक महीने बाद ही वैक्सीन लगवा पाउंगा लेकिन मैं सुबह से ही रजिस्ट्रेशन की कोशिश कर रहा हूं ताकि मुझे स्पॉट मिल जाए.'
देवांश के माता पिता पहले ही टीकाकरण करा चुके हैं और अब तक वायरस से बचे हुए हुए हैं लेकिन उनके परिवार में अन्य लोग इससे प्रभावित हुए हैं.
देवांश कहते हैं, 'मम्मी-पापा का वैक्सीनेशन हो गया था लेकिन फिर भी हमने घर में बहुत सावाधानी बरती. हमारे घर में तो नहीं लेकिन आसपास और रिश्तेदार बहुत बुरी तरह प्रभावित है. कई जानने वालों की मौत भी हुई है. इसलिए हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं.'
देवांश कहते हैं, 'कोविन ऐप सही से काम नहीं कर रहा है. मैंने कई बार लॉग इन की कोशिश की लेकिन ओटीपी ही जेनरेट नहीं हुआ. वेबसाइट पर भी जन्मतिथि रजिस्टर नहीं हो पा रही थी. अब मैं फिर से प्रयास करूंगा.'
देवांश शाम चार बजे के बाद प्रयास करने पर भी पंजीकरण नहीं करा सके.
देवांश कहते हैं, 'कई बार प्रयास करने पर ओटीपी आ रहा है लेकिन पंजीकरण के पेज पर वो फिर से मोबाइल नंबर डालने के लिए कह रहा है. बार बार कोशिश करने पर भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है.'
देवांश के मुताबिक आरोग्य सेतु एप पर वो पहले से ही लॉग इन थे लेकिन अब वो भी लॉग आउट हो गया है और कई प्रयास करने पर भी लॉग इन नहीं हो पा रहा है.
बिहार के गोपालगंज के रहने वाले नैय्यर ईमाम भी तीन बजे से ही रजिस्ट्रेशन का प्रयास कर रहे थे. लेकिन उन्हें भी कई प्रयासों के बाद सफलता नहीं मिल सकी.
बीबीसी से बात करते हुए नैयर ने कहा, 'अभी तो सर्वर डाउन है लेकिन कोशिश जारी है, उम्मीद है जल्द ही रजिस्ट्रेशन करा पाउंगा.'
नैयर कहते हैं, 'वैक्सीन ने दुनिया भर को उम्मीद दी है. जिन देशों में वैक्सीन के दोनों डोज़ लगे हैं वहां वायरस बहुत हद तक कंट्रोल में हैं. मुझे उम्मीद है कि वैक्सीन लगाने से अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी.'
चेन्नई में रह रहे सारिम इकबाल पहले प्रयास में ही पंजीकरण करा पाए. बीबीसी से बात करते हुए सारिम ने कहा, 'मेरा पहले प्रयास में ही रजिस्ट्रेशन हो गया है.'
सारिम कहते हैं, 'मैं चेन्नई में ही टीका लगवाउंगा और यहां मुझे डेट मिल रही है लेकिन मैंने अभी सोचा नहीं है कि कब लगवाना है.'
सारिम ने अपने पिता को तो वैक्सीन के लिए मना लिया है लेकिन उनकी अम्मी नहीं मान रही हैं.
सारिम कहते हैं, 'लेकिन मैंने अम्मी का रजिस्ट्रेशन भी कर दिया है.'
ट्विटर पर टिप्पणी करने वाले बहुत से लोगों की शिकायत है कि बहुत प्रयासों के बाद पंजीकरण कराने पर वैक्सीन सेंटर ही नहीं मिल पा रहा है.
आदित्य ने लिखा, 'पंजीकरण तो किसी तरह हो गया है लेकिन एक मई के लिए कोई सेंटर ही उपलब्ध नहीं है.'
इसी बीच कोविड रजिस्ट्रेशन का डैशबोर्ड भी डाउन हो गया है.
वहीं चेतन नरूला ने लिखा, 'अभी तुरंत रजिस्ट्रेशन का कोई तुक नहीं है. जब तक राज्य सरकारें वैक्सीन नहीं हासि करेंगी और उन्हें विभिन्न अस्पतालों और केंद्रों में नहीं भेजेंगी तब तक अपाइंटमेंट ही नहीं मिलेंगे. अभी ये बेकार का प्रयास है. जब ये सेंटर खुलेंगे तब फिर से लॉग इन करना होगा.'
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा के रहने वाले दिलीप अग्रवाल पिछले साल कोरोना से संक्रमित हो गए थे.
उनके मुताबिक़ बीमारी के दौरान उन्हें राज्य सरकार से बहुत मदद मिली.
दवाइयां मुफ़्त में मिलीं और उनका हाल जानने के लिए सरकार की ओर से उन्हें फ़ोन आते रहते थे.

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भारत में कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण का तीसरा चरण 1 मई से शुरू हो रहा है. इसमें 18 साल से 44 साल के लोगों को भी टीका दिया जाएगा.
इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 28 अप्रैल से शुरू हो रही है.
इस चरण में टीका लगवाने के लिए लोगों को कोविन प्लेटफॉर्म या आरोग्य सेतु एप पर जाकर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा, सीधे अस्पताल में जाकर रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा.
कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की दो वैक्सीन को इजाज़त दी थी और इसके बाद विदेश में बनी स्पूतनिक वैक्सीन को भी आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई.
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महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा है कि राज्य में लॉकडाउन को 15 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा. ये पाबंदियाँ 30 अप्रैल को ख़त्म होनी थी.
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र कैबिनेट के सभी सदस्यों की यही राय थी कि मौजूदा पाबंदियों को अगले 15 दिनों के बढ़ा देना चाहिए.
एक मई से 18 साल और उससे ज़्यादा उम्र वालों के लिए वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है. इस पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पास सभी आधारभूत सुविधाएँ हैं, लेकिन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन नहीं है.
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उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वैक्सीन निर्माताओं से अलग से बात कर रहे हैं. राजेश टोपे ने ये भी जानकारी दी कि 18 से 44 आयुवर्ग के लिए अलग वैक्सीनेशन सेंटर होंगे.

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दो मई को पाँच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना होनी है. केंद्रीय चुनाव आयोग ने इस मतगणना के लिए कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए व्यापक दिशा निर्देश जारी किए हैं.

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आलोक प्रकाश पुतुल
रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ में 18 से 44 तक की आयु वर्ग के लोगों के लिए 1 मई से शुरू होने वाला कोविड टीकाकरण अभियान खटाई में पड़ता नज़र आ रहा है.
कुछ ज़िलों में 1 मई से टीकाकरण नहीं किए जाने की घोषणा भी कर दी गई है.
धमतरी के ज़िला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर बी के साहू के अनुसार, "एक मई से शुरू होने वाला कोरोना टीकाकरण अभियान स्थगित किया गया है. लेकिन वर्तमान में जो टीकाकरण अभियान चल रहा है, वह वैसा ही चलता रहेगा."
स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बार-बार के अनुरोध के बाद भी 1 मई से शुरू होने वाले टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार ने टीका उपलब्ध कराने की सहमति नहीं दी.
इसके अलावा टीके की क़ीमत को लेकर भी राज्य के मुख्यमंत्री सवाल उठा चुके हैं.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि एक ही टीके की क़ीमत केंद्र सरकार और राज्य सरकार के लिए अलग-अलग नहीं हो सकती है.
एक दिन पहले ही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि प्रथम किश्त के रूप में राज्य शासन ने कोरोना के टीका के दोनों उत्पादकों, सीरम इंस्टीट्यूट एवं भारत बायोटेक को 50 लाख डोज टीके का आर्डर दिया है.
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि दोनों कंपनियों ने इस साल जुलाई से पहले टीके की आपूर्ति में असमर्थता जताई है.

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पिछले कुछ दिनों से गुजरात में सोशल मीडिया पर रेमडेसिविर से जुड़े पोस्ट की बाढ़ आ गई है.
अहमदाबाद की एक प्राइवेट फार्मा कंपनी ने पिछले दिनों ये घोषणा की कि रेमडेसिविर इंजेक्शन उसके अस्पताल में 500 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा.
इस घोषणा के बाद अस्पताल के बाहर लोगों की लाइन लग गई. दस अप्रैल को जब बीबीसी की टीम वहां पहुंची थी तो अस्पताल के बाहर तकरीबन 1000 लोग अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे.
कुछ लोग वहां अपने परिवार वालों के लिए आए हुए थे, तो कुछ दोस्तों के लिए लाइन में खड़े थे.
इंजेक्शन लेने के लिए आए लोगों में कुछ सूरत, भरूच, कच्छ और आणंद जैसे ज़िलों से आए थे.
लाइन में खड़े एक व्यक्ति ने बीबीसी गुजराती को बताया कि राज्य में शराबबंदी होने के बावजूद ये आसानी से मिल जाता है लेकिन लोगों को कोरोना का इंजेक्शन हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
एक तरफ़ लोग इंजेक्शन हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ लोकल मीडिया में रेमडेसिविर की कालाबाज़ारी की ख़बरें छाई हुई हैं.
इन मीडिया रिपोर्टों के बीच ज़ाइडस हॉस्पिटल ने कहा कि उनके यहां रेमडेसिविर का इंजेक्शन ऑउट ऑफ़ स्टॉक हो गया है.
दूसरी तरफ राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने सूरत में रेमडेसिविर इंजेक्शन निशुल्क बांटना शुरू कर दिया.
विपक्ष ने उनके इस कदम पर सवाल उठाया.
इस बीच राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी करके अलग-अलग दवा कंपनियों के रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत के बारे में जानकारी दी.
हालांकि राज्य में अभी ये स्थिति है कि प्राइवेट हॉस्पिटल कोरोना संक्रमित मरीज़ों के परिजनों को रेमडेसिविर इंजेक्शन का इंतज़ाम खुद करने के लिए कह रहे हैं.