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लालकिला हिंसा: राजदीप सरदेसाई और शशि थरूर के ख़िलाफ़ देशद्रोह का केस दर्ज

उत्तर प्रदेश पुलिस ने राजदीप सरदेसाई समेत कई पत्रकारों और शशि थरूर के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

लाइव कवरेज

  1. हिंसा के बाद लाल क़िले पर भारी सुरक्षा इंतज़ाम

    दिल्ली में मंगलवार को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान आंदोलनकारी भीड़ में से कुछ लोग लाल किले की प्राचीर पर चढ़ गए थे. जिसके बाद से ही वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

    इस बीच दिल्ली मेट्रो ने लाल क़िला मेट्रो स्टेशन और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन को आज बंद रखने का घोषणा की है.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की ख़बर के मुताबिक़, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक आदेश जारी किया है, जिसके मुताबिक़ लाल क़िला 27 जनवरी से लेकर 31 जनवरी तक बंद रहेगा.

    हालांकि लाल क़िले को बंद क्यों किया गया है, उस कारण का उल्लेख नहीं किया गया है. लेकिन इससे पहले 6 जनवरी और 18 जनवरी को आदेश जारी करके लाल क़िले को 19 से 22 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया गया था. यह आदेश बर्ड फ़्लू को लेकर जारी किया गया था.

    पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि 26 जनवरी को लाल क़िला परिसर में हुई हिंसा के बाद, एएसआई ने नुकसान का जायज़ा लेने के लिए फाटकों को बंद रखने का निर्णय लिया है.

  2. पाकिस्तान: कैसे इन औरतों ने आपदा को अवसर में बदला

    साल 2020 जहां दुनिया भर के देशों के लिए एक मुश्किल भरा साल रहा, वहीं कुछ लोगों के लिए ये नए मौके लेकर आया.

    पाकिस्तान में भी कुछ ऐसा ही हुआ. वहां कई स्टार्टअप कंपनियों ने ख़ुद को नए माहौल के लिए तैयार किया.

    उन्होंने आपदा को अवसर में बदलते हुए कई विदेशी कंपनियों के साथ करार किया और ख़ूब मुनाफ़ा कमाया.

    लाहौर से बीबीसी संवाददाता अली काज़मी की रिपोर्ट.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, लाल क़िला और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन आज भी बंद

    दिल्ली के लाल क़िला मेट्रो स्टेशन को आज भी बंद रखा गया है. यहां प्रवेश और निकास द्वार दोनों ही बंद रहेंगे.

    इसके अलावा जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन के प्रवेश द्वार भी बंद रहेंगे. इसके अलावा दूसरे मेट्रो स्टेशन सामान्य तरीक़े से काम करेंगे.

  4. बाग़पत ज़िला प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग को खाली कराया

    बाग़पत ज़िला प्रशासन ने बुधवार देर रात एक प्रदर्शनस्थल को ख़ाली कराया. न्यूज़ एजेंसी एएनआई की ख़बर के अनुसार,नेशनल हाईवेअथॉरिटी ऑफ़ इंडिया यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुरोध के बाद ये कार्रवाई की गई. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अपने अनुरोध में कहा था कि उन्हें अपने अधूरे काम को पूरा करना है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बाग़पत के अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह ने कहा,“भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हमें एक अनुरोध पत्र लिखा था क्योंकि प्रदर्शन के कारण उनके काम में रुकावट आ रही थी. जिसके बाद हम यह जगह खाली कराने आए. प्रदर्शन कर रहे लोग, जिसमें कई बुज़ुर्ग भी शामिल थे उन्होंने शांतिपूर्ण तरीक़े से जगह खाली कर दी.”

    उन्होंने आगे कहा,“हमने प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए किसी भी तरह का बल प्रयोग नहीं किया. बुज़ुर्गों को जिनमें एक मानसिक तौर पर कमज़ोर शख़्स भी शामिल थे, उन सभी को उनके घर भेज दिया गया है.”

    अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह ने बताया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीक़े से हुई, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रेस नोट जारी कर सरकार पर लगाया हिंसा भड़काने का आरोप

    किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जनवरी को एक प्रेस नोट जारी करके 26 जनवरी को भड़की हिंसा के लिए सरकार पर आरोप लगाए हैं.

    प्रेस नोट में कहा गया है कि "अभी तक यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीक़े से चल रहा था लेकिन इस आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश अब जनता के सामने आ चुकी है. कुछ व्यक्तियों और संगठनों के सहारे सरकार ने इस आंदोलन को हिंसक बनाया. प्रेस नोट में दीप सिद्धु और सतनाम सिंह पन्नु की अगुवाई वाले किसान मज़दूर कमेटी का नाम मुख्य रूप से लिया गया है."

    संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने प्रेस नोट में साफ़ तौर पर यह लिखा है कि उनका लाल क़िले और दिल्ली के किसी भी दूसरे हिस्से में हुई हिंसा से कोई ताल्लुक़ नहीं है.

  5. अब किसान आंदोलन का भविष्य क्या होगा?

    गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में आयोजित किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के लिए दिल्ली पुलिस ने 37 किसान नेताओं पर FIR दर्ज की है.

    इस बीच दो किसान संगठनों ने ख़ुद को किसान आंदोलन से अलग कर लिया है. तो क्या नए कृषि क़ानूनों को लेकर दो महीनों से भी ज़्यादा समय से जारी किसान आंदोलन में फूट पड़ गई है?

    किसान नेताओं का इस पर क्या कहना है और अब आगे आंदोलन की राह क्या होगी?

  6. गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के कैंप में बिजली गुल

    दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाज़ीपुर में आंदोलन पर बैठे किसानों का कहना है कि बुधवार रातभर के लिए उनके कैंप में बिजली काट दी गई और आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.

    बीती रात गाज़ीपुर में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्रा ने कहा कि पूरी रात किसानों के कैंप में बिजली नहीं रही.

    उन्होंने बताया कि बुधवार देर शाम से यहां पुलिसबलों की संख्या भी बढ़नी शुरू हो गई थी और बिजली भी काट दी गई थी. रात भर यहां अंधेरा रहा. किसानों ने ट्रैक्टर की बैटरियों से किसी तरह रोशनी की.

    किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि “शायद यहां से किसानों को हटाने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन बिजली क्यों काटी गई है इस पर हमारे पास कोई जानकारी नहीं है.”

    टिकैत ने एक बयान जारी कर कहा कि "पुलिस प्रशासन दहशत फैलाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार को डराना बंद करना चाहिए."

    बीजेपी ने की राहुल गांधी से माफ़ी की मांग, कांग्रेस पर लगाया किसानों को उकसाने का आरोप

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने किसान आंदोलन की हिंसा को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा.

    एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, "राहुल गांधी लगातार केवल समर्थन नहीं कर रहे थे बल्कि उकसा रहे थे. सीएए के वक़्त भी ये ही हुआ था. वैसे ही ये भी आंदोलन है. कांग्रेस की सरकार है पंजाब में, जानबूझकर किसानों को उकसाया गया. उन लोगों के ट्वीट्स भी हैं. एक ट्वीट में कांग्रेस ने लिखा कि अहिंसक मार्च को हिंसक दिखाने की कोशिश हो रही है. ये जो लाल क़िले पर हुआ, क्या वो अहिंसक था? नांगलोई में हुआ, अहिंसक था? जिस तरह पुलिस को पीटा गया क्या वो अहिंसक था?"

    जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने तो बातचीत का रास्ता अपनाया लेकिन कांग्रेस किसानों को उकसा रही है.

    उन्होंने कहा, "सरकार ने तो 11राउंड की चर्चा की, साल-डेढ़ साल क़ानून रोकने की भी तैयारी दिखाई. दिखाओ कि किसानों का कौन-सा हक़ कम हुआ है. इन क़ानूनों में बस किसानों को विकल्प दिया गया है. ये कांग्रेस को भी पता है लेकिन कांग्रेस समझौता नहीं होने देना चाहती."

    "हम कांग्रेस की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं. पहले सीएए के वक़्त ऐसा आंदोलन किया, एक बार फिर कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं होंगे. देश की जनता इस सरकार के साथ खड़ी है. बाकी प्रदेशों में आंदोलन नहीं है. कांग्रेस के प्रयासों के बावजूद अनेक राज्यों में नहीं हुआ है."

    कुछ किसान संगठनों ने ख़ुद को आंदोलन से दूर किया

    इससे पहले राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने किसान आंदोलन से खुद को दूर करने का ऐलान कर दिया था.

    उन्होंने कहा, “मैं किसी और के साथ इस तरह से आंदोलन में नेतृत्व नहीं कर सकता जिनकी दिशा अलग हो. मेरी शुभकामनाएं उनके साथ लेकिन वीएम सिंह और राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन इस आंदोलन से खुद को दूर करने का ऐलान करते हैं.”

    इस घोषणा के बाद किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा था, “कुछ किसान संगठनों ने हिंसा के बाद अपना आंदोलन ख़त्म कर दिया है ये अच्छी बात नहीं है. 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन को झटका लगा है. इस पर हम आत्मचिंतन करेंगे और अब हमें लोगों को दोबारा से इकट्ठा करना पड़ेगा. गणतंत्र दिवस के दिन जो कुछ हुआ उसकी हमने नैतिक ज़िम्मेदारी ली है.“

  7. नमस्कार! ये बीबीसी हिंदी का लाइव पन्ना है जहाँ हम आपको दिनभर की बड़ी ख़बरें और ज़रूरी लाइव अपडेट देंगे. 27 जनवरी (बुधवार) की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.