दिल्ली-उत्तर
प्रदेश सीमा पर गाज़ीपुर में आंदोलन पर बैठे किसानों का कहना है कि बुधवार रातभर
के लिए उनके कैंप में बिजली काट दी गई और आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.
बीती रात
गाज़ीपुर में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्रा ने कहा कि पूरी रात किसानों
के कैंप में बिजली नहीं रही.
उन्होंने बताया कि बुधवार देर शाम से यहां पुलिसबलों की संख्या भी बढ़नी शुरू हो गई थी और बिजली
भी काट दी गई थी. रात भर यहां अंधेरा रहा. किसानों ने ट्रैक्टर की बैटरियों से किसी
तरह रोशनी की.
किसान नेता
राकेश टिकैत का कहना है कि “शायद यहां से किसानों को हटाने की कोशिश की
जा सकती है, लेकिन बिजली क्यों काटी गई है इस पर हमारे पास कोई जानकारी नहीं है.”
टिकैत
ने एक बयान जारी कर कहा कि "पुलिस प्रशासन दहशत फैलाने
की कोशिश कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार को डराना बंद करना चाहिए."
बीजेपी ने की राहुल गांधी से माफ़ी की मांग, कांग्रेस पर लगाया किसानों को उकसाने का आरोप
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और बीजेपी नेता
प्रकाश जावड़ेकर ने किसान आंदोलन की हिंसा को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर
निशाना साधा.
एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, "राहुल गांधी लगातार केवल समर्थन नहीं कर रहे थे बल्कि उकसा रहे थे. सीएए के
वक़्त भी ये ही हुआ था. वैसे ही ये भी आंदोलन है. कांग्रेस की सरकार है पंजाब में, जानबूझकर
किसानों को उकसाया गया. उन लोगों के ट्वीट्स भी हैं. एक ट्वीट में कांग्रेस ने
लिखा कि अहिंसक मार्च को हिंसक दिखाने की कोशिश हो रही है. ये जो लाल क़िले पर हुआ, क्या वो
अहिंसक था? नांगलोई में हुआ, अहिंसक था? जिस तरह पुलिस को पीटा गया
क्या वो अहिंसक था?"
जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने तो बातचीत का रास्ता अपनाया
लेकिन कांग्रेस किसानों को उकसा रही है.
उन्होंने कहा, "सरकार
ने तो 11राउंड की चर्चा की, साल-डेढ़
साल क़ानून रोकने की भी तैयारी दिखाई. दिखाओ कि किसानों का कौन-सा हक़ कम हुआ है.
इन क़ानूनों में बस किसानों को विकल्प दिया गया है. ये कांग्रेस को भी पता है
लेकिन कांग्रेस समझौता नहीं होने देना चाहती."
"हम कांग्रेस की कड़े शब्दों में भर्त्सना
करते हैं. पहले सीएए के वक़्त ऐसा आंदोलन किया, एक
बार फिर कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं होंगे. देश की जनता इस सरकार के साथ खड़ी है.
बाकी प्रदेशों में आंदोलन नहीं है. कांग्रेस के प्रयासों के बावजूद अनेक राज्यों
में नहीं हुआ है."
कुछ किसान संगठनों ने ख़ुद को आंदोलन से दूर किया
इससे पहले राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने किसान आंदोलन से खुद को दूर करने का ऐलान कर दिया था.
उन्होंने कहा, “मैं किसी और के साथ इस तरह से आंदोलन में नेतृत्व नहीं कर सकता जिनकी दिशा अलग हो. मेरी शुभकामनाएं उनके साथ लेकिन वीएम सिंह और राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन इस आंदोलन से खुद को दूर करने का ऐलान करते हैं.”
इस घोषणा के बाद किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा था, “कुछ किसान संगठनों ने हिंसा के बाद अपना आंदोलन ख़त्म कर दिया है ये अच्छी बात नहीं है. 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन को झटका लगा है. इस पर हम आत्मचिंतन करेंगे और अब हमें लोगों को दोबारा से इकट्ठा करना पड़ेगा. गणतंत्र दिवस के दिन जो कुछ हुआ उसकी हमने नैतिक ज़िम्मेदारी ली है.“