26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर
रैली के एक धड़े की हिंसा के बाद बुधवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस.एन.
श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.
उन्होंने कहा कि अभी तक 25 से अधिक
आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. 19 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और 50 लोगों
को हिरासत में लिया गया है, पुलिस के साथ हुए समझौते को किसान नेताओं ने न मानकर विश्वासघात किया है. किसी
भी साज़िशकर्ता को छोड़ा नहीं जाएगा और क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने बताया, “कुल मिलाकर 394 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं कुछ अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं.
पुलिस के 428 बैरिकेड, 30 पुलिस की गाड़ियां, 6 कंटेनर्स और 8 टायर किलर्स को
नुक़सान पहुंचा है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया.
लाल क़िले पर फहराए गए धार्मिक झंडे की घटना को गंभीरता से लिया गया है. फ़ेस
रिकगनिशन सिस्टम से लोगों की पहचान हो रही है, जिन पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.”
“308 ट्विटर हैंडल जिनका संबंध पाकिस्तान से है, उनको बैन किया गया था. पुलिस
कार्रवाई में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है और इस स्थिति को पुलिस ने बख़ूबी
संभाला. जो किसान नेता इसमें शामिल थे उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.”
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 2 जनवरी
को दिल्ली पुलिस को पता चला था कि किसान एक ट्रैक्टर मार्च करने जा रहे हैं.
“संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया था कि उनके
समर्थक 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में आकर भाग लें. जैसे ही हमें इसकी जानकारी
मिली, हम लोगों ने किसानों के नेताओं से संपर्क किया और उनके साथ विस्तार से
बातचीत की, पांच राउंड की बैठक हुई और कई बार फ़ोन पर बातचीत हुई.”
“हमने उनसे अपील की कि वो 26 जनवरी को यह रैली न करके
किसी और दिन ट्रैक्टर रैली करें. इस पर उन्होंने इनकार कर दिया. इसके बाद हमने
केएमपी पेरिफ़ेरल हाइवे पर उनसे रैली निकालने की अपील लेकिन उन्होंने दिल्ली में
ही ट्रैक्टर मार्च निकालने की ठान ली. पांच राउंड की बैठक के बाद उनसे तीन रूट पर
सहमति बनी थी. दिल्ली की जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह तय हुआ था कि
कुछ नियम एवं शर्तें लागू होंगी.”
“पहली शर्त थी कि किसान ट्रैक्टर रैली दोपहर 12 बजे
शुरू होगी और शाम पांच बजे तक ख़त्म होगी. दूसरी शर्त थी कि ट्रैक्टर मार्च किसान
नेता लीड करेंगे और आगे की पंक्ति में होंगे और यह भी तय हुआ कि हर जत्थे के साथ
उनके नेता चलेंगे. 5,000 से अधिक ट्रैक्टर नहीं होंगे और कोई भी हथियार, भाला,
तलवार आदि नहीं होगा. रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण होनी चाहिए.”
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इसके लिए लिखित अनुमति दी गई थी और किसान नेताओं से शपथपत्र लिया गया लेकिन 25 जनवरी की शाम को यह पता चला कि वे अपने वादे से मुकर रहे हैं.
“उन्होंने उग्रवादी धड़े को आगे कर दिया और भड़काऊ भाषण दिए जिसके बाद उनकी मंशा साफ़ हो गई लेकिन फिर भी दिल्ली पुलिस ने संयम से काम लिया. सुबह साढ़े 6 बजे से बैरिकेड तोड़ना शुरू हो गया. सिंघु बॉर्डर पर सुबह साढ़े सात बजे रैली शुरू हो गई और उस रैली को मुकरबा चौक से बाएं नहीं मुड़ना था लेकिन वो मुड़ गए. सतनाम सिंह पन्नू ने मुकरबा चौक पर भड़काऊ भाषण दिया जिसके बाद उनके समर्थक बैरिकेड तोड़ने लगे. दर्शनपाल सिंह आकर वहां बैठ गए और उन्होंने दाहिने मुड़ने से मना कर दिया. टिकरी बॉर्डर और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से भी प्रदर्शनकारी साढ़े आठ बजे चलना शुरू हो गए.”
“पुलिस के पास सभी विकल्प थे लेकिन उसने संयम का रास्ता चुना क्योंकि हम जान-माल की हानि नहीं चाहते थे. हमारे और उनके बीच में समझौता था कि हम शांतिपूर्ण रैली करवाएंगे और यह जो हिंसा हुई है वो नियम और शर्तों के उल्लंघन के कारण हुई है. इस हिंसा में सभी किसान नेता शामिल हैं.”