किसानों की ट्रैक्टर परेड: दिल्ली पुलिस का एलान- हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई, किसान संगठन बोले- जारी रहेगा आंदोलन
दिल्ली पुलिस के मुताबिक किसानों की परेड में हुई हिंसा के दौरान 83 पुलिसकर्मी घायल हुए. किसान संगठनों ने बताया-असामाजिक तत्वों का काम. दिनभर की ज़रूरी ख़बरों से अपडेट रहने के लिए बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज से जुड़े रहे.
लाइव कवरेज
टिकरी बार्डर से आंखों देखा हाल
टिकरी बार्डर पर अभी सब कुछ शांतिपूर्ण हैं. बैरिकेड के एक
तरफ़ किसान नेता अपने संगठनों के झंडे लेकर खड़े हैं, भारी संख्या में युवा इस
रैली में नज़र आ रहे हैं.
वहीं बैरिकेड की दूसरी ओर बड़ी संख्या में पुलिस बल
तैनात है, रास्ता साफ़ कर दिया गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि लगभग एक घंटे
में बैरिकेड खोल दिए जाएंगे.
- दिलनवाज़ पाशा, बीबीसी संवाददाता
इमेज स्रोत, Piyush Nagpal/BBC
कहां हुई थी पहली गणतंत्र दिवस परेड
आज अगर टीवी के किसी केबीसी नुमा कार्यक्रम में यह पूछा जाए कि देश की राजधानी में पहली गणतंत्र दिवस परेड कहां हुई थी, तो सबसे पहले घंटी दबाने वालों का उत्तर राजपथ ही होगा और दर्शकों का भी यही मानना होगा कि कितना आसान सवाल है!
पर हक़ीक़त इससे बिल्कुल जुदा है.
दिल्ली में 26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड, राजपथ पर न होकर इर्विन स्टेडियम (आज का नेशनल स्टेडियम) में हुई थी.
तब के इर्विन स्टेडियम के चारों तरफ चहारदीवारी न होने के कारण उसके पीछे पुराना किला साफ नज़र आता था.
साल 1950-1954 के बीच दिल्ली में गणतंत्र दिवस का समारोह, कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे कैंप, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में आयोजित हुआ.
ब्रेकिंग न्यूज़, चीन के मामले में 'धैर्य से काम लेंगे' - व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने कहा है कि
बाइडन प्रशासन चीन को लेकर अमरीका की नीति क्या होगी इस पर अपने सहयोगियों और
रिपब्लिकन्स से भी चर्चा करेगा.
दरअसल अमेरिका में चीन की तीन टेलीकॉम कंपनियों पर लगे
प्रतिबंध को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब में साकी ने कहा कि, "ये मामला एजेंसियों के बीच का है,
राज्य विभाग, ट्रेजरी विभाग और अन्य एजेंसियां मिलकर चीनी कंपनियों पर लगे
प्रतिबंध की समीक्षा करेंगी और ये तय करेंगी की आगे किस दिशा में बढ़ना है."
"हम इस
पूरे मामले में धैर्य से काम लेंगे क्योंकि ये मामला हमारे चीन के साथ रिश्तों से
जुड़ा है. जिसका मतलब साफ़ है कि हम अपने सहयोगियों, डैमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स
से इस पर चर्चा करेंगे."
"साथ ही हम चाहते हैं कि एजेंसियां
अपना काम करें, इसकी समीक्षा करें और आकलन करें कि हमें दोनों देशों के रिश्तों को
कैसे आगे बढ़ाना है."
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26 जनवरी: परेड निकालने की किसानों की क्या है तैयारी?
कल राजधानी दिल्ली में दो परेड्स होने वाली हैं.
एक तरफ़ राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड निकाली जाएगी, तो दूसरी तरफ़ बीते दो महीने से केंद्र के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे आंदोलन कर रहे किसानों ने भी ट्रैक्टर परेड निकालने की तैयारी की है.
किसानों के इस मार्च के लिए पुलिस ने इजाज़त तो दे दी है, मगर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को अपनी परेड के लिए गणतंत्र दिवस के बजाय कोई और दिन चुनना चाहिए था.
दिल्ली के नज़दीक सिंघु बॉर्डर पर प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को लेकर क्या तैयारियां हैं...
यही जानने के लिए बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा ने उनसे बात की.
वीडियो कैप्शन, 26 जनवरी को सियासत दिल्ली दो परेड की गवाह बनेगी.
गणतंत्र परेडः दिल्ली-एनसीआर में ट्रैक्टर रैली से पहले बढ़ी सुरक्षा
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गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की राज़धानी दिल्ली में आईटीओ,
यमुना ब्रिज जैसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. यहां भारी पुलिस बल की
तैनाती के साथ ही जगह-जगह पर बैरिकेड लगाए
गए हैं.
इस बार दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
का सबसे बड़ा कारण किसानों की ट्रैक्टर रैली है. आज गणतंत्र दिवस की परेड के बाद
किसान तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई
के मुताबिक़ सोमवार को तय ट्रैक्टर रैली से पहले ही किसान संगठनों ने ऐलान किया है
कि जब 1 फ़रवरी को देश का बजट पेश होगा तो
अलग-अलग इलाकों से बढ़कर किसान संसद की ओर मार्च निकालेंगे.
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किसानों की रैली गणतंत्र दिवस परेड के बाद निकलेगी क्योंकि पुलिस ने ये साफ़ किया है कि रिंग रोड पर होने वाली
गणतंत्र दिवस की परेड के बाद ही किसान रैली निकाल सकेंगे.
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है.
मंगलवार के लिए पुलिस ने ट्रैफ़िक गाइडलाइन भी जारी की है.
इसमें नेशनल हाइवे 44, सिंघु और टिकरी बॉर्डर जैसे रास्ते लोगों को ना जाने की
सलाह दी गई है. साथ ही गाज़ीपुर बॉर्डर, नेशनल हाइवे 24 पर भी लोगों को यातायात की
समस्या हो सकती है ऐसे में इस रास्ते पर भी ना जाने की सलाह दी गई है.
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दिल्ली की सीमा पर दो महीने से कृषि कानून के विरोध में
प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में मुंबई के आज़ाद मैदान में हज़ारों की तादाद
में किसान इकट्ठा हुए हैं.
किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच इस कानून पर चर्चा के
लिए 11 दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन अभी भी किसान
और सरकार दोनों ही पक्ष कानून पर पीछे हटते नज़र नहीं आ रहे.
किसानों का मानना है कि ये तीनों ही कानून किसान विरोधी है
और सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए. वहीं दूसरी ओर सरकार इस कानून को किसानों की
भलाई वाला बता रही है और वापस लेने को तैयार नहीं है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी दख़ल दिया है और एक समिति
का गठन किया है जो दोनों पक्षों से बात कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी.
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