ट्रंप प्रशासन के लोगों पर चीन का प्रतिबंध लगाना बेतुका- अमेरिकी सरकार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल की प्रवक्ता एमिली हॉर्न ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने का चीन के फ़ैसला "निरर्थक और बेतुका है."
उन्होंने कहा कि अमेरिका की दोनों ही पार्टियों के नेताओं को चीन के इस कदम की निंदा करनी चाहिए.
जिस वक्त बाइडन राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले थे उससे ठीक पहले चीन ने पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो समेत 27 और लोगों पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी. चीन का कहना है कि अमेरिका के कुछ चीन विरोधी राजनेता अपने स्वार्थी राजनीतिक हितों और पूर्वाग्रहों के कारण चीन के ख़िलाफ़ नफ़रत फैला रहे हैं.
चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इन राजनेताओं के बयान चीनी और अमेरिकी लोगों के हितों में नहीं हैं और यह सुनियोजित हैं जो बेतरतीब तरीक़े से चीन के आंतरिक मामलों में दख़ल देते हैं और यह चीन के हितों को नज़रअंदाज़ करते हैं, चीन के लोगों को नाराज़ करते हैं और चीन-अमेरिका रिश्तों को बाधित करते हैं.
एमिली हॉर्न ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि "बाइडन के शपथग्रहण के दिन प्रतिबंध लगाना एक तरह से दरार पैदा करने की कोशिश जैसा है."
"दोनों पार्टियों से जुड़े लोगों को इस बेतुके कदम की आलोचना करनी चाहिए. राष्ट्रपति बाइडन को उम्मीद है कि चीन को हराने के लिए अमेरिका बेहतर स्थिति में हो इसके लिए वो दोनों पार्टियों के नेताओं के साथ मिल कर काम करेंगे."
अपने कार्यकाल के आख़िरी दिन माइक पोम्पियो ने कहा था कि चीन ने वीगर मुसलमानों का दमन कर जनसंहार किया है और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध किया है.
बाइडन सरकार में विदेश मंत्री बने एंटोनी ब्लिंकन से मंगलवार को जब पॉम्पियो के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो भी इस बात को मानते हैं.
शिंजियांग में वीगर मुसलमानों को यातना देने के लिए चीन पर लगातार आरोप लगते रहे हैं. चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है.