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कोरोना वायरस: गृह मंत्रालय की राज्यों को चिट्ठी, सड़क-रेलवे ट्रैक पर न चलने दें मज़दूरों को
गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि अगर कोई प्रवासी मज़दूर सड़क-ट्रैक पर जाते हुए पाया जाता है तो उसे क़रीबी शेल्टर होम में रखा जाए.
लाइव कवरेज
ब्रिटेन: संक्रमण से मरने वालों की संख्या में आई कमी

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने बताया है कि अब कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या में कमी आ रही है.
उन्होंने कहा कि केयर होम्स के कर्मचारियों का कोरोना टेस्ट जून के पहले सप्ताह में कराया जाएगा. इनमें वो सभी लोग शामिल होंगे जिनमें संक्रमण के लक्षण होंगे या नहीं भी होंगे.
हैनकॉक ने कहा, ''केयर होम्स के लोगों को बचाने की ज़रूरत है.''
ब्राज़ील में दो महीने में दूसरे स्वास्थ्य मंत्री की विदाई

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ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्री नेल्सन टेइश ने एक महीने से भी कम समय काम करने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया है.
वो पिछले महीने ही मंत्री बनाए गए थे जब राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो ने स्वास्थ्य मंत्री लुइज़ हेनरिक मैन्डेटा को बर्ख़ास्त कर दिया था.
राष्ट्रपति ने सोमवार को जिम और हेयर कटिंग सैलूनों को आवश्यक सेवाएँ बताते हुए कहा था कि उन्हें खुला रखा जा सकता है.
पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय से कोई परामर्श नहीं लिया गया.
ब्राज़ील की मीडिया का कहना है कि इसके बाद राष्ट्रपति का क्लोरोक्वीन दवा को समर्थन देने से शायद स्वास्थ्य मंत्री का सब्र टूट गया.
ब्राज़ील लैटिन अमरीका का सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है.
वहाँ के सरकारी आँकड़ों के अनुसार देश में दो लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हैं और 14,000 लोगों की मौत हो चुकी है.
सड़क-रेलवे ट्रैक पर न चलने दें मज़दूरों को: गृह मंत्रालय

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केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिवों को चिट्ठी लिखकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उनके यहां पर प्रवासी मज़दूर सड़कों या रेलवे ट्रैक पर न चलें, प्रवासी मज़दूरों के घर जाने की व्यवस्था केवल बसों या श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के ज़रिए होनी चाहिए.
गृह मंत्रालय के ख़त में लिखा है कि अगर कोई प्रवासी मज़दूर सड़क पर जाते हुए पाया जाता है तो उसे क़रीबी शेल्टर होम में रखा जाए, उसको खाना-पानी मुहैया कराया जाए.
गृह मंत्रालय ने कहा है कि जिन राज्यों में प्रवासी मज़दूर फंसे हुए हैं उन्हें बसों या श्रमिक स्पेशल ट्रेन के ज़रिए ही उन्हें उनके घर भेजा जाए.
यह भी साफ़ किया गया है कि फंसे हुए मज़दूरों को उनके घर भेजने की ज़िम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की है.
इस ख़त में लिखा गया है कि रेल मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मदद से 100 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें हर रोज़ चला रही है इसलिए मज़दूरों के जाने की व्यवस्था केवल बसों या श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के ज़रिए होनी चाहिए.
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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'गांव में मरेंगे तो कोई कफ़न ओढ़ा देगा, यहां मरेंगे तो लोग नाले में फेंक देंगे...' प्रवासी मज़दूरों का दर्द, जिनसे बात की बीबीसी हिंदी के संपादक मुकेश शर्मा ने.
मोदी सरकार ना किसानों के दर्द को समझती है ना उनकी दिक़्क़तों को - कांग्रेस

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केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज में कृषि को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं को विपक्षी दल कांग्रेस ने टोटकों का अर्थशास्त्र बताया है.
वित्त मंत्री की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "एक बात स्पष्ट है कि मोदी सरकार ना किसानों के दर्द को समझती है, ना उनकी दिक़्क़तों को. इसलिए किसानों को एक पाई की भी मदद नहीं की गई."
कांग्रेस प्रवक्ता ने आर्थिक पैकेज को वुडू इकोनॉमिक्स यानी टोटकों का अर्थशास्त्र बताया.
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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तमिलनाडु में कल से फिर खुलेंगी सरकारी शराब की दुकानें, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सरकारी शराब की दुकानों को खोलने का आदेश जारी कर दिया है.
राज्य में शनिवार से ये दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगी.
मगर चेन्नई, तिरूवल्लुर के अलावा किसी भी कन्टेनमेंट क्षेत्र और शॉपिंग मॉल में शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी.
मद्रास हाई कोर्ट ने 8 मई को लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानें खोले जाने पर आपत्ति जताते हुए सरकार को इन्हें बंद करने का आदेश दिया था.
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी जिसके बाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.
तमिलनाडु में शुक्रवार को कोविड-19 के 447 नए मामले सामने आए.
राज्य में कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़कर 9,674 हो गई है.
तमिलनाडु में अब तक कोरोना से 66 लोगों की मौत हुई है.
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न्यूयॉर्क में लॉकडाउन 28 मई तक बढ़ा

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न्यूयॉर्क में शहरी इलाक़े में लॉकडाउन को 28 मई तक बढ़ा दिया गया है. न्यूयॉर्क राज्य के दूसरे इलाक़ों में इसमें ढील दी जाएगी.
वहाँ सरकार की ओर से लोगों को घरों में ही रहने का आदेश शुक्रवार को ख़त्म होने वाला था.
न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्र्यू कुओमो ने लॉकडाउन बढ़ाने की पुष्टि की.
न्यूयॉर्क के विख्यात ब्रॉडवे थिएटर को सितंबर के शुरू तक बंद रखे जाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है.
अमरीका में न्यूयॉर्क अभी भी महामारी का केंद्र बना हुआ है.
अमरीका में अब तक 85,807 लोगों की मौत हुई है जिसमें से 27,607 लोग केवल न्यूयॉर्क में मारे गए हैं.
अमरीकी संसद में 30 खरब डॉलर के राहत पैकेज पर मतदान

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इमेज कैप्शन, हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की डेमोक्रेट स्पीकर नैन्सी पेलोसी अमरीका में विपक्षी डेमोक्रेट के बहुमत वाले हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में 3 ट्रिलियन या 30 खरब डॉलर के एक प्रोत्साहन पैकेज संबंधी बिल पेश कर सकते हैं.
1,800 पन्नों के इस विधेयक को हीरोज़ ऐक्ट कहा जा रहा है, जिससे लाखों अमरीका वासियों को दूसरे दौर में राहत राशि देने और स्थानीय सरकारों, स्वास्थ्य सेवाओं और पोस्टल सेवाओं को पैसे देने का प्रस्ताव किया गया है.
बिल के एक अंश में सुझाया गया है कि हवाई यात्री और सार्वजनिक रेल-बस में जाने वाले लोग मास्क लगाएँ.
साथ ही एक हीरो फ़ंड बनाने की भी बात की गई है जिसमें प्रस्ताव किया गया है कि आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मियों को अतिरिक्त वेतन दिया जाए.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने बिल को वीटो करने की धमकी देते हुए डेमोक्रेट सांसदों पर अपनी विचारधारा वाली इच्छाएँ थोपने का आरोप लगाया है.
सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैक्कॉनेल ने इस विधेयक को एक "नितांत अगंभीर प्रयास" बताया है.
पैकेज में किसानों की असल मुश्किलों की कोई चर्चा नहीं - सीताराम येचुरी
सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी ने आर्थिक पैकेज पर वित्त मंत्री की आज की घोषणाओं को 'फिर से मेगा पैकेजिंग' बताते हुए कहा है कि खेती की हालत महामारी से पहले ही ख़राब थी.
उन्होंने कहा कि अभी रबी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचा भी नहीं जा सका है और जून में खरीफ़ फसलों की बुआई होनी है.
उन्होंने ट्विटर पर आगे लिखा, "बीज, खाद और दूसरी चीज़ों की कमी है. इस पैकेज में इनकी कोई बात ही नहीं की गई, किसानों की वित्तीय मदद की बात करना तो बहुत दूर की बात है."
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कोरोना वायरस पर बीबीसी हिंदी का ख़ास डिजिटल रेडियो कार्यक्रम 'इंडिया बोल' फ़ेसबुक पर
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हटाए गए टीका विशेषज्ञ ने कहा, अमरीका की सर्दी आधुनिक इतिहास की सबसे स्याह सर्दी होगी

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इमेज कैप्शन, रिक ब्राइट अमरीका के एक पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी ने अमरीकी संसद से कहा है कि कोरोना वायरस की वजह से अमरीका में इस बार की सर्दी आधुनिक इतिहास की सबसे स्याह सर्दी हो सकती है.
रिक ब्राइट उस सरकारी एजेंसी की अगुआई कर रहे थे जो एक टीका बनाने की कोशिश कर रही थी, मगर पिछले महीने उन्हें हटा दिया गया.
ब्राइट ने कहा कि उन्हें नौकरी से इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने एक ऐसी दवा को बढ़ावा देने से मना कर दिया जिसका परीक्षण नहीं हुआ था और राष्ट्रपति ट्रंप उसे पासा पलटने वाली दवा बता रहे थे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने रिक ब्राइट को एक असंतुष्ट कर्मचारी बताया है.
समय निकल रहा है
ब्राइट ने हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की स्वास्थ्य पर बनी उपसमिति से कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की जान इसलिए गई क्योंकि सरकार शुरुआती दौर में अकर्मण्य थी.
उन्होंने कहा कि उन्होंने सबसे पहले जनवरी में मेडिकल साधनों की कमी की बात उठाई थी और स्वास्थ्य विभाग के सर्वोच्च स्तर तक मुद्दे को उठाया मगर कोई जवाब नहीं मिला.
अपने बयान में रिक ब्राइट ने चेतावनी दी कि कोरोना संकट से निपटने के लिए अमरीका को मिला वक़्त ख़त्म होता जा रहा है.
उन्होंने कहा, ”अगर हमने अपना रवैया नहीं ठीक किया, विज्ञान के आधार पर क़दम नहीं उठाया, तो ये महामारी और ख़राब होगी और जल्दी ख़त्म नहीं होगी. बिना बेहतर प्लानिंग के, 2020 का ठंड का मौसम आधुनिक इतिहास का सबसे स्याह मौसम रहने जा रहा है.“
उन्होंने समिति से ये भी कहा कि जनवरी में आए एक ईमेल को वो कभी नहीं भूलेंगे, जो एक फ़ेस मास्क प्लानर ने भेजा था और उसमें मास्क की गंभीर किल्लत को लेकर आगाह किया था.
ब्राइट ने कहा, ”उसने लिखा...हमें कुछ करना होगा. और मैंने इसे स्वास्थ्य विभाग के सर्वोच्च स्तर तक पहुँचाया, पर कोई जवाब नहीं आया.”
रिक ब्राइट को क्यों हटाया
एक व्हिसलब्लोअर ने इस महीने अपनी शिकायत में कहा कि रिक ब्राइट को बायोमेडिकल ऐडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (बार्डा) से राजनीतिक कारणों से हटाया गया.
ब्राइट का कहना है कि उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन दवाओं को कोविड-19 की दवा के तौर पर बढ़ावा देने से इनकार कर दिया था.
राष्ट्रपति ट्रंप मलेरिया की रोकथाम में काम आने वाली दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को कोविड-19 के इलाज में एक पासा पलटने वाली दवा बता रहे थे जबकि जानकारों ने चेतावनी दी थी कि ये असरकारी नहीं होगा, बल्कि ख़तरनाक भी हो सकता है.

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ट्रंप ने क्या कहा?
सुनवाई पूरी होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "मैं उन्हें नहीं जानता. मैं उनसे कभी नहीं मिला. मैं उनसे मिलना चाहता भी नहीं."
"पर मैंने उनको देखा, वे एक नाराज़, असंतुष्ट कर्मचारी लग रहे थे, जिनके बारे में कई लोगों का कहना है, कि उन्होंने बहुत अच्छा काम नहीं किया."
अमरीका में अन्य घटनाएँ:
- अब तक 85,807 लोगों की मौत
- न्यूयॉर्क अभी भी महामारी का केंद्र, 27,607 लोगों की मौत
- मिशिगन राज्य की विधायिका ने गुरुवार को लॉकडाउन का विरोध कर रहे दक्षिणपंथी गुटों की ओर से मौत की धमकियाँ मिलने और हथियारबंद प्रदर्शन की वजह से सत्र को रद्द किया
- अमरीका में एक चौथाई कामगारों ने बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन किया है
- राष्ट्रपति ट्रंप के फ़्लोरिडा स्थित रिज़ॉर्ट को इस सप्ताहांत आंशिक रूप से खोला जाएगा
निर्मला जी और अनुराग जी का धारावाहिक किसी के पल्ले नहीं पड़ रहा - भूपेश बघेल
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री की ओर से आर्थिक पैकेज पर दी जा रही ब्रीफ़िंग पर प्रतिक्रिया देते हुए समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "पिछले 3 दिन से निर्मला जी और अनुराग जी का धारावाहिक चल रहा है, रोज़ एक-एक वर्ग के बारे में हिन्दी और अंग्रेजी में दोनों समझा रहे हैं परन्तु पल्ले किसी के नहीं पड़ रहा है, जब ये धारावाहिक पूरा समाप्त हो जाएगा तभी कोई प्रतिक्रिया देना ठीक होगा."
इससे पहले उन्होंने प्रवासियों की ट्रेन से वापसी को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल के बयान पर एतराज़ जताया.
पीयूष गोयल ने ट्विटर पर लिखा, "रेलवे रोज़ाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाकर कामगारों को उनके घर पहुंचाने के लिये तैयार है, लेकिन मुझे दुख है कि कुछ राज्यों जैसे प.बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ व झारखंड की सरकारों द्वारा इन ट्रेनों को अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे श्रमिकों को घर से दूर कष्ट सहना पड़ रहा है."
इसकी प्रतिक्रिया में भूपेश बघेल ने ट्विटर पर लिखा, "अब आप सार्वजनिक रूप से ग़लत बयान दे रहे हैं. मज़दूर जो कष्ट और पीड़ा झेल रहे हैं उसके लिए उत्तरदायित्व राज्य नहीं हैं. राज्यों पर दोष मढ़ना ठीक नहीं."
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, "छत्तीसगढ़ की ओर से 30 ट्रेनों की अनुमति मांगी गई है और हमें अब तक सिर्फ़ 14 मिली हैं. ट्रेनों के लिए हम क़रीब 1.17 करोड़ का भुगतान भी रेलवे को कर चुके हैं. रेलवे या किसी राज्य की ओर से कोई प्रस्ताव हमारे पास लंबित नहीं है. केंद्रीय रेल मंत्री जी आपका बयान तथ्यहीन और आधारहीन है."
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मज़दूरों की लगातार वायरल हो रही मार्मिक तस्वीरों के लिए कौन है ज़िम्मेदार?
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बीबीसी हिंदी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर हमने यही सवाल पूछा. पढ़िए कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएँ -:
मलिका दीक्षित ने लिखा, ''ऐसी तस्वीरें लगातार मीडिया दिखा रहा है. सरकार सफ़ाई देने के अलावा कोई ठोस क़दम नहीं उठा रही है.''
पवन कुमार ने आरोप लगाया, ''ऐसे हालात के लिए मोदी सरकार ज़िम्मेदार है. रात में आकर अपने मन की बात थोप देते हैं. ग़रीबों से कोई मतलब नहीं है.''
इंस्टाग्राम पर श्रीचंद्र ने लिखा, ''इन हालात के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार मानना चाहिए, जो हर बार बिना तैयारी के आकर फ़रमान जारी कर देते हैं.''
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ट्विटर पर आरके नाम के यूज़र लिखते हैं, ''राज्य सरकार जिनके पास मज़दूरों को खिलाने के साधन तक नहीं हैं. क्योंकि फ्री, फ्री, फ्री बांटते रहते थे. उसी फ्री का नतीजा है.''
भूमिका लिखती हैं, ''ऐसे हालात के लिए कोरोना ज़िम्मेदार है.'' वहीं अर्पित के मुताबिक़, ऐसे हालात के लिए तब्लीग़ी जमात ज़िम्मेदार है.
कल्पेश लिखते हैं, ''ऐसी तस्वीरों के लिए स्थानीय प्रशासन ज़िम्मेदार है.'' कई पाठकों ने व्यंग्य करते हुए मज़दूरों की इस हालत के लिए नेहरू को ज़िम्मेदार बताया.
कराची में कोविड मरीज़ की मौत के बाद अस्पताल में तोड़-फोड़
रियाज़ सुहैल
बीबीसी संवाददाता, कराची

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पाकिस्तान के कराची शहर में एक अस्पताल में कुछ लोगों ने कोविड-19 से मारे गए अपने एक रिश्तेदार की लाश नहीं सौंपे जाने को लेकर हंगामा और तोड़-फोड़ की जिसके बाद पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.
जिन्ना पीजी मेडिकल सेंटर हॉस्पिटल के निदेशक डॉक्टर सीमी जमाली ने बताया कि जिस वॉर्ड में तोड़-फोड़ की गई वहाँ 37 कोरोना रोगियों का इलाज हो रहा था.
60 साल के रोगी की हालत बिगड़ने पर बुधवार को अस्पताल लाया गया जहाँ अगले दिन उसकी मौत हो गई.
डॉक्टर जमाली ने बताया, "अस्पताल के पास ही डेरा डाले मरीज़ के रिश्तेदारों ने लाश माँगी पर हमने मना कर दिया क्योंकि नियमों के अनुसार हमें पहले ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी सूचना देनी थी, और फिर ईधी फ़ाउंडेशन के वॉलंटियरों को बुलाना था जो शव को दफ़नाने की तैयारी करते."
लेकिन इसके बाद मरीज़ के रिश्तेदारों ने अस्पताल पर हमला कर दिया और फ़र्नीचर, खिड़कियाँ और कंप्यूटर को तोड़ा और लाश नीचे ले गए.
विशेष विमानों से अब तक 12,000 भारतीय वापस लौटे
नागरिक विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है कि अभी तक विदेशों में फँसे 12,000 से ज़्यादा भारतीय नागरिकों को विशेष उड़ानों से देश वापस लाया गया है.
वहीं भारत से 3,000 से ज़्यादा यात्रियों को दूसरे देशों में भी ले जाया गया है.
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ट्रंप की धमकी के बाद बदला चीन का स्वर

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कोरोना महामारी को लेकर अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन से संबंध तोड़ने की धमकी के बाद चीन ने अमरीका से महामारी से लड़ने में सहयोग करने का आग्रह किया है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों सरकारों को मिलकर इस वायरस से लड़ना चाहिए. पर उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि इसके लिए ज़रूरत इस बात की होगी कि अमरीका हमारे साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखे.
अमरीकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को चीन से सारे संबंध तोड़ने की धमकी दी थी और एक बार फिर चीन पर महामारी को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया था.
दोनों देशों के रिश्ते अमरीकी सीनेट के एक बिल पास करने की वजह से भी बिगड़ सकते हैं जिसमें सीनेट ने चीन के शिन्जियांग प्रांत में मानवाधिकारों के हनन को लेकर चीन को सज़ा दिए जाने की बात की थी.
इस प्रांत में लगभग 10 लाख मुस्लिम वीगर अल्पसंख्यकों को पुनर्शिक्षा शिविरों में भेज दिया गया है.
आवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमॉडिटी एक्ट) में संशोधन की घोषणा

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आर्थिक पैकेज को विस्तार से समझाने के लिए की गई प्रेस कॉन्फ़्रेंस मेंआवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमॉडिटी एक्ट) में संशोधन की घोषणा की गई.
उन्होंने कहा कि 1955 से लागू आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की घोषणा की गई है जिसके तहत फ़ूड प्रोसेसिंग के व्यवसाय में लगे लोगों के लिए कोई स्टॉक लिमिट नहीं होगी.
सीरल, आलू-प्याज़, तेल, तिलहन और दालें नए क़ानून के दायरे में नहीं होंगे. हालांकि बाढ़ और सूखे जैसी स्थिति में सरकार इस बारे में अपने विवेक से निर्णय ले सकती है.
झारखंड के मज़दूरों की वापसी को लेकर पीयूष गोयल के बयान पर हेमंत सोरेन को एतराज़
झारखंड के प्रवासियों की ट्रेन से वापसी को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के बयान पर एतराज़ जताया है.
पीयूष गोयल ने कहा था कि कुछ राज्यों की सरकारें श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को पर्याप्त मंज़ूरी नहीं दे रही हैं. इनमें झारखंड का भी नाम शामिल था.
पीयूष गोयल ने ट्विटर पर लिखा, "रेलवे रोज़ाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाकर कामगारों को उनके घर पहुंचाने के लिये तैयार है, लेकिन मुझे दुख है कि कुछ राज्यों जैसे प.बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ, व झारखंड की सरकारों द्वारा इन ट्रेनों को अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे श्रमिकों को घर से दूर कष्ट सहना पड़ रहा है."
इसके जवाब में हेमंत सोरेन ने भी ट्वीट कर लिखा, "माननीय रेल मंत्री जी, ऐसा प्रतीत हो रहा है की आपके विभाग द्वारा आप तक सही जानकारी नहीं पहुँचायी गयी हैं. हमने अब तक 110 ट्रेनों की NOC दे दी है और 50 ट्रेनों में लगभग 60 हज़ार से ज़्यादा श्रमिक घर लौट चुके हैं."
"पुनः आपसे ज़्यादा से ज़्यादा ट्रेनें झारखण्ड के लिए चलाने का आग्रह करता हूँ. अभी हर रोज़ मात्र 4-6 ट्रेनें झारखण्ड आ रही हैं जो हमारे लगभग 7 लाख श्रमिक झारखंडियों को जल्द वापस लाने हेतु पर्याप्त नहीं हैं. आशा है कि आप इस मुद्दे पर ध्यान देते हुए झारखंडियों की सहायता करेंगे."
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