केरल में हुई भारी बारिश के बाद कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच बना तत्काल संकट काफ़ी हद तक कम हो गया है.
बारिश के चलते काबिनी समेत कावेरी बेसिन में तेज़ी से पानी आने लगा, जिसके बाद कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना पड़ा.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से कहा कि काबिनी रिज़र्वायर में पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ने के कारण शुक्रवार दोपहर से तमिलनाडु की ओर पानी छोड़ा जा रहा है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त पानी नहीं है, बल्कि बांध की सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए छोड़ा गया है, क्योंकि काबिनी रिज़र्वायर पूरी तरह भर चुका है.
इससे पहले कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया था. कुल मिलाकर यह करीब 4.5 टीएमसी फीट पानी होता है.
काबिनी रिज़र्वायर को बचाने के लिए पानी छोड़ा जा रहा
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारी बारिश के बाद काबिनी रिज़र्वायर में करीब 26,000 क्यूसेक, कृष्णराज सागर में 22,000 क्यूसेक, हरंगी में 10,440 क्यूसेक और हेमावती में 11,884 क्यूसेक पानी की आवक हुई है.
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और आसपास के इलाकों की पेयजल ज़रूरतों के लिए करीब 36 टीएमसी फीट पानी सुरक्षित रखना ज़रूरी है, जबकि लगभग 4 टीएमसी फीट पानी वाष्पीकरण के लिए आरक्षित रखा जाता है.
सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सुझाव दिया कि नहरों में पानी बेहद सावधानी से छोड़ा जाए और सबसे पहले पेयजल ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जाए.
शिवकुमार ने कहा कि बैठक में शामिल सभी नेताओं ने सरकार के रुख का समर्थन किया और कई सुझाव दिए हैं, जिन पर कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.
सामान्य वर्ष में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी फीट पानी छोड़ना होता है. हालांकि, इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनियमितता के कारण जुलाई में कर्नाटक केवल 3.6 टीएमसी फीट पानी ही छोड़ सका, जबकि तय मात्रा 40 टीएमसी फीट थी. यह पानी तमिलनाडु की कुरुवई धान फसल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
जोसेफ़ विजय पर क्या बोले शिवकुमार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय को लेकर पूछे गए सवाल पर डीके शिवकुमार ने कहा कि उनका किसी को बदनाम करने का कोई इरादा नहीं है.
उन्होंने कहा, "जोसेफ़ विजय एक अच्छे इंसान हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं. मुझे भरोसा है कि वे हमारी बात समझेंगे. राजनीति में नए होने के बावजूद वे साहसी और परिपक्व नेता हैं. मैं उनके साहसिक फैसले की सराहना करता हूं. मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम सबको मिलकर रहना और साथ काम करना है. आखिरकार भारत एक है."