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पहली मोहब्बत को भुलाना इतना मुश्किल क्यों होता है?
बहुत से लोगों के लिए पहली बार प्यार में पड़ना ज़िंदगी के सबसे यादगार अनुभवों में से एक होता है.
लेकिन ऐसा क्यों है कि पहली मोहब्बत और पहला रिश्ता कई दशक बीत जाने के बाद भी दिमाग़ में ताज़ा बना रहता है? उस दौर की यादें इतनी गहरी क्यों होती हैं और उन्हें भुला पाना इतना मुश्किल क्यों होता है?
दरअसल कम उम्र में दिमाग़ लंबे समय तक रहने वाली यादें बनाता है.
कई लोगों को पहली मोहब्बत का अनुभव किशोरावस्था में होता है. यह दिमाग़ के विकास का ऐसा दौर होता है, जब यादों को संजोने और लंबे समय तक संभालकर रखने की क्षमता अपने चरम पर होती है.
वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइकोलॉजी की प्रोफ़ेसर कैथरीन लोवी कहती हैं, "इस उम्र में हमारे भीतर यादों को सटीक तरीके से संजोने और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने की असाधारण क्षमता होती है."
वह बताती हैं कि दिमाग़ उन बातों और घटनाओं को ज़्यादा अच्छी तरह याद रखता है, जो भावनाओं और एहसासों से जुड़ी होती हैं.
उनके मुताबिक़, जब कोई घटना पहली बार होती है, ज़िंदगी पर गहरा असर डालती है या दुख, पीड़ा और बेचैनी जैसी तीव्र भावनाएं पैदा करती है, तो उसके लंबे समय तक याद रहने की संभावना बढ़ जाती है.
इसके अलावा किसी याद को जितनी बार दोहराया जाए और याद किया जाए, उसके दिमाग़ में बने रहने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है.
यही वजह है कि भावनात्मक अनुभव अक्सर सबसे लंबे समय तक याद रहते हैं.
प्रोफ़ेसर लोवी कहती हैं, "हर बार जब हम इन अनुभवों और यादों को दोबारा याद करते हैं, तो उनसे जुड़े न्यूरल कनेक्शन और मज़बूत हो जाते हैं."
हार्मोन और पहली मोहब्बत का कनेक्शन
चाहे वह ख़ुशी और रोमांच हो या दिल टूटने का दर्द, पहली मोहब्बत से जुड़े एहसास अक्सर बहुत गहरे और असरदार होते हैं.
कैथरीन लोवी के मुताबिक़, किशोरावस्था के दौरान शरीर और दिमाग़ में कई हार्मोन और रासायनिक पदार्थ सक्रिय हो जाते हैं. यही चीज़ें तीव्र भावनाओं को जन्म देती हैं.
सबसे पहले एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन में बढ़ोतरी भावनात्मक आकर्षण पैदा करती है.
इसके बाद जब कोई रिश्ता बनना शुरू होता है, तो दिमाग़ में सेरोटोनिन, डोपामिन और ऑक्सिटोसिन जैसे रसायन निकलते हैं.
ये रसायन ख़ुशी, पुरस्कार मिलने के एहसास, भावनात्मक जुड़ाव और क़रीबी रिश्तों से जुड़े होते हैं.
पहली मोहब्बत रिश्तों को समझने की शुरुआत भी होती है. सबसे बुनियादी स्तर पर मानवीय रिश्ते हमारी ज़िंदगी और सामाजिक अस्तित्व से जुड़े होते हैं.
किसी युवा के लिए पहला प्रेम संबंध एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है. क्योंकि वह पहली बार अपने परिवार और सीमित सामाजिक दायरे से बाहर किसी व्यक्ति के साथ गहरा भावनात्मक रिश्ता बना रहा होता है.
कैथरीन लोवी पहली मोहब्बत को "इंसानी रिश्तों से जुड़े जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अनुभवों में से एक" मानती हैं.
वह कहती हैं, "हमें अपने परिचित दायरे से बाहर किसी व्यक्ति पर भरोसा करना सीखना पड़ता है. हमें एक नई दिशा में क़दम बढ़ाना होता है."
उनके मुताबिक़, पहली मोहब्बत सिर्फ़ एक भावनात्मक अनुभव नहीं है. यह वह प्रक्रिया भी है, जिसमें इंसान भरोसा करना, क़रीबी महसूस करना और नए संबंध बनाना सीखता है.
पुराना प्यार दोबारा मिलने पर क्या होता है?
1993 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डॉ. नैन्सी कालिश ने उन लोगों पर अध्ययन किया, जिन्होंने कई साल बाद अपनी पुरानी प्रेमी या प्रेमिकाओं से संपर्क किया था.
इन लोगों में ज़्यादातर या तो अविवाहित थे या अपने जीवनसाथी को खो चुके थे.
कई जोड़ों ने कुछ ही हफ़्तों के भीतर अपना रिश्ता फिर से शुरू कर दिया. इनमें से 72 फ़ीसदी लोगों ने बाद में एक-दूसरे से शादी भी कर ली.
इंटरनेट आने के बाद पुरानी मोहब्बतों को ढूंढना और उनसे संपर्क करना पहले की तुलना में कहीं आसान हो गया.
साल 2004 में किए गए एक दूसरे अध्ययन में नैन्सी कालिश ने पाया कि अपनी पुरानी प्रेमी या प्रेमिकाओं से दोबारा संपर्क करने वाले 62 फ़ीसदी लोग उनके साथ प्रेम संबंध में आ गए थे.
हालांकि इनमें से सिर्फ़ पांच फ़ीसदी रिश्ते शादी तक पहुंच सके.
पहली मोहब्बत सालों तक याद क्यों रहती है?
कैथरीन लोवी का शोध सिर्फ़ पहली मोहब्बत तक सीमित नहीं है. वह लोगों की पूरी ज़िंदगी की यादों का अध्ययन करती हैं.
लेकिन उनका कहना है कि पहली मोहब्बत की यादों का एक अलग ही स्थान होता है.
वह कहती हैं, "मैंने 70 और 80 साल की उम्र के लोगों से भी बात की है. उनमें से कई लोग आज भी अपनी पहली मोहब्बत से जुड़ी यादों को ज़िंदगी की सबसे स्पष्ट और महत्वपूर्ण यादों में गिनते हैं."
उनके मुताबिक़, बहुत से लोगों के लिए पहली मोहब्बत सिर्फ़ अतीत का एक अध्याय नहीं होती.
वह एक ऐसा अनुभव होती है, जो कई सालों और कभी-कभी कई दशकों तक उनके मन और भावनाओं में ज़िंदा रहता है.
पुरानी मोहब्बतों की यादें मौजूदा रिश्तों को कैसे मज़बूत कर सकती हैं?
पुरानी मोहब्बत को याद करना हमेशा खोए हुए रिश्ते की इच्छा का संकेत नहीं होता.
यह मौजूदा रिश्तों को भी मज़बूत बना सकता है.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ ह्यूस्टन के प्रोफ़ेसर एडम फ़ेटरमैन एक अवधारणा पर अध्ययन करते हैं, जिसे वह "रोमांटिक नॉस्टेल्जिया" कहते हैं.
उनके मुताबिक़, यह अतीत के लिए लगाव और प्रेम का ऐसा भाव है, जो मौजूदा रिश्ते के संदर्भ में पैदा होता है.
फ़ेटरमैन कहते हैं कि किसी रिश्ते के ख़ास पलों को दोबारा याद करना, जैसे पहली मुलाक़ात में देखी गई फ़िल्म को फिर साथ देखना, लोगों को उन सुखद भावनाओं को दोबारा महसूस करने में मदद कर सकता है.
उनके मुताबिक़, जो लोग अपने रिश्तों की ऐसी साझा यादों को ज़्यादा याद करते हैं, वे अपने साथी के साथ ज़्यादा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं. इससे प्रेम और अपनापन भी बढ़ता है.
पहली नज़र का प्यार और यादें
केट और गुन्टर की मुलाक़ात 1989 में हुई थी. दोनों उस समय ब्रिटेन के डेवॉन में छुट्टियां बिता रहे थे.
उन्हें पहली नज़र में ही एक-दूसरे से प्यार हो गया.
लेकिन गुन्टर को जर्मनी लौटना पड़ा. दोनों ने मुलाक़ातें जारी रखीं और चिट्ठियों के ज़रिए संपर्क बनाए रखा. फिर भी वे साथ रहने का कोई रास्ता नहीं निकाल सके.
केट कहती हैं, "उन्हें यह बताना कि मैं उनके साथ नहीं रह सकती, मेरी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल फ़ैसला था."
करीब दो साल तक रिश्ते में रहने के बाद दोनों ने भारी मन से अलग होने का फ़ैसला कर लिया.
करीब 30 साल बाद केट को अलमारी में गुन्टर की पुरानी चिट्ठियां मिलीं. उनसे जुड़ी सारी यादें फिर ताज़ा हो गईं.
वह कहती हैं, "मैं लगातार रोती रही." फिर उन्होंने सोचा, "मैंने एक शानदार इंसान का दिल तोड़ दिया और कभी उसे वजह भी नहीं बताई."
उन्होंने गुन्टर के पारिवारिक कारोबार का पता खोजा और उन्हें एक चिट्ठी लिखी. उन्हें किसी जवाब की उम्मीद नहीं थी.
लेकिन गुन्टर ने जवाब दिया.
केट याद करते हुए कहती हैं, "22 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट पर फ़ोन की घंटी बजी. जब मैंने देखा कि कॉल जर्मनी से है, तो मेरी धड़कन तेज़ हो गई."
दोनों ने घंटों बातें कीं. कुछ सप्ताह बाद गुन्टर उनसे मिलने मैनचेस्टर पहुंच गए.
केट कहती हैं, "जब मैंने उन्हें देखा तो ऐसा लगा जैसे हम कभी अलग हुए ही नहीं थे."
बाद में गुन्टर उन्हें उसी पहाड़ी पर ले गए, जहां दोनों 30 साल पहले साथ चढ़े थे. वहीं उन्होंने शादी का प्रस्ताव रखा.
इसके बाद दोनों ने शादी कर ली.
केट कहती हैं, "ज़िंदगी में हर किसी को दूसरा मौक़ा नहीं मिलता. लेकिन अब जब मैं उन्हें देखती हूं, तो मुझे किसी बात का अफ़सोस नहीं होता."
गुन्टर भी इससे सहमत हैं. वह कहते हैं, "मैं उन्हें अब दोबारा नहीं खोऊंगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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