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रूस: पुतिन के कट्टर आलोचक एलेक्सी नवेलनी की अपील ख़ारिज
रूस की एक अदालत ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर आलोचक एलेक्सी नवेलनी की अपील खारिज कर दी है. एलेक्सी ने सज़ा की शर्तों का उल्लंघन करने के एक मामले के ख़िलाफ़ अपील की थी.
एलेक्सी बीते महीने जर्मनी से इलाज कराने के बाद रूस लौटे थे. रूस पहुंचते ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद उन्हें परोल के नियमों के उल्लंघन के मामले में दोषी क़रार दे दिया गया.
एलेक्सी पर घातक नर्व एजेंट नोविचोक का हमला हुआ था और इसी के इलाज के लिए वे जर्मनी गए थे.
एलेक्सी खुद पर हमले के लिए रूसी राष्ट्रपति को दोष देते हैं और कहते हैं कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं. वहीं रूसी सरकार एलेक्सी के लगाए आरोपों से इनकार करती रही है.
साल 2014 में भ्रष्टाचार के एक मामले में एलेक्सी को सज़ा सुनाई गई थी जिसके तहत उनके लिए नियमित रूप से पर रूसी पुलिस के समक्ष हाजिरी देना ज़रूरी थी.
शनिवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान एलेक्सी ने बाइबल और हैरी पॉटर सिरीज़ (जानीमानी किताब) का उदाहरण दिया और कहा कि उन पर लगाए आरोप 'बेतुके' हैं. उन्होंने कहा कि नर्व एजेंट के हमले के कारण उनका इलाज चल रहा था ऐसे में उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वो पुलिस सामने जाकर हाजिरी दर्ज कराएं.
उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया को पता है कि मैं कहां था. जब मेरी तबीयत ठीक हो गई मैंने वापसी का टिकट खरीदा और अपने घर लौटा."
जज ने उसकी दलील को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सज़ा पूरी करनी होगी. हालांकि जज ने उनको पहले दी गई तीन साल की सज़ा के वक्त में से छह सप्ताह कम कर दिए हैं.
शनिवार को एक और मामले में एलेक्सी को अदालत में पेश होना है. उन पर राष्ट्रपति पुतिन की प्रशंसा करने वाले द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हुए पूर्व सैनिक का अपमान करने का आरोप है.
मॉस्को से बीबीसी संवाददाता स्टीव रोज़नबर्ग की विश्लेषण
अदालत जाते वक्त एलेक्सी ने मीडिया के सामने अपने हाथों से 'वी' विक्टरी यानी जीत का निशान बनाया था. हालांकि कोर्ट के फ़ैसले के बाद अदालत के बाहर उनके लिए खुश होने की वजह कम ही थी.
कोर्ट ने नवेलनी को मिली सज़ा को क़रीब डेढ़ महीने कम तो किया है, लेकिन उनकी सज़ा को बरकरार रखा है.
अपने सबसे कट्टर आलोचक की सज़ा फिर से बहाल होने पर रूसी सरकार को उम्मीद होगी कि वो भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाने वाले और सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित कर सकने की काबिलियत रखने वाले रूस के एकमात्र विपक्षी नेता के कारण पैदा हुए ख़तरे को कम कर सकेगी.
लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि रूस को अब पश्चिमी दुनिया के देशों से कड़ी आलोचना झेलनी पड़ेगी और हो सकता है कि उस पर दबाव भी बढ़ जाए.
इसका संकेत इस बात से मिलता है कि इसी सप्ताह राष्ट्रपति पुतिन से प्रवक्ता ने अमेरिका और यूरोप के देश 'पागलों की हद तक' प्रतिबंधों की बात करने का आरोप लगाया था.
हालांकि ये भी सच है कि रूसी सरकार पश्चिमी देशों की आलोचना को अपने हक में इसतेमाल करने की कोशिश करेगी और ये साबित करने की कोशिश करेगी कि एलेक्सी नवेलनी दरअसल पश्चिमी देशों के भेजे प्यादे हैं और देश की घेराबंदी की जा रही है.
यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि एलेक्सी नवेलनी के जीवन को ख़तरा है, इस बात को ध्यान में रखते देखते हुए उन्हें आज़ाद कर देना चाहिए.
रूस भी यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स का एक सदस्य है. हालांकि रूस ने इस बयान को "ग़ैर-क़ानूनी" करार दिया है.
एलेक्सी पर लगे आरोपों को लेकर उनके समर्थकों का कहना है कि ये उनकी आवाज़ को दबाने और उनके राजनीतिक करियर को ख़त्म करने की कोशिश है.
वो राष्ट्रपति पुतिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं. उन्होंने ये भी दावा किया है कि काले सागर के पास पुतिन ने एक शानादार महल बनवाया है.
नवेलनी के सहयोगी इस साल होने वाले संसदीय चुनावों में पुतिन समर्थक राजनीतिक पार्टियों को चुनौती देने की तैयारी में हैं. राष्ट्रपति पुतिन भी गुरुवार को चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जता चुके हैं.
रूस के मुद्दे को लेकर सोमवार को यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाले ही जहां रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर चर्चा होनी है.
हालांकि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में भी रूस के मामले को लेकर ही राय बनी हुई है. रूस से गैस खरीदने की नॉर्ड स्ट्रीम- 2 परियोजना पर जर्मनी काम कर रहा है.
पोलैंड समेत कुछ और देश इसका विरोध कर रहे हैं. लिथुआनिया ने कहा है कि सितंबर में रूस में चुनाव संपन्न होने तक इस परियोजना पर काम रोक दिया जाना चाहिए.
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